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कोरोनावायरस ने बिगाड़ा बनारस के लंगड़ा आम का स्वाद

बनारस के आसपास आम की किस्म लंगड़ा के बाग हैं, जिन्हें यूरोप में एक्सपोर्ट किया जाता है, लेकिन कोरोनावायरस की वजह से किसान और व्यापारियों की चिंता में डाल दिया है

On: Thursday 23 April 2020
 
बनारस में लगे आम के पेड़। फोटो: रिजवाना तबस्सुम
बनारस में लगे आम के पेड़। फोटो: रिजवाना तबस्सुम बनारस में लगे आम के पेड़। फोटो: रिजवाना तबस्सुम

रिजवाना तबस्सुम

वाराणसी के शार्दूल विक्रम के पास करीब 35 एकड़ में आम के पेड़ों को लंबी शृंखला है।  शीलू बताते हैं, "अबकी बनारसी लंगड़ा को अमेरिका और खाड़ी देशों में भेजने की तैयारी की थी। कृषि वैज्ञानिक पंजाब सिंह के निर्देशन में फोर्ड फाउंडेशन के जरिए एपिडा के माध्यम से बनारसी लंगड़ा और दशहरी आम निर्यात होना था, मगर अफसोस कोरोना ने सारे मंसूबों पर पानी फेर दिया। शार्दूल कहते हैं कि कोरोनावायरस की वजह से आम को निर्यात करने की जरूरी तैयारियां पूरी तरह ठप हो गई हैं।

बनारस के लोहता के पास है मोहन सिंह का बगीचा है। इस बगीचे में आम के सैकड़ों पेड़ हैं। बनारसी सफेद लंगड़ा, दशहरी और चौसा भी। मोहन पूरे साल अपने बगीचों की देखरेख करते हैं। इन्हीं तीन-चार महीनों का वो बेसब्री से इंतजार करते हैं। इसी दरम्यान पूरे साल की कमाई हो जाया करती थी। लेकिन कोरोना ने इस बार सब चौपट कर दिया। मोहन बताते हैं, "पहले बारिश और ओलावृष्टि ने हमें बर्बाद कर दिया, अब कोरोना ने।"

वाराणसी में पहले 1200 हेक्टेयर में आम के बाग हुआ करते थे। रिंग रोड के निर्माण के चलते करीब दो सौ एकड़ बाग इसकी भेंट चढ़ गए। करीब एक हजार एकड़ में आम के बाग मौजूद हैं। 

बनारस का लंगड़ा है लंगड़ा। नाम भले ही लंगड़ा है, लेकिन मिठास में है सबसे अव्वल यह आम मूल रूप से वाराणसी के नजदीकी इलाकों में ही होता है। आम की इस किस्म, जैसा कि इससे संबद्ध कहानी कहती है, इस आम का नाम एक लंगड़े साधु के नाम पर रखा गया, जिसने पहली बार इस आम की खेती की। अब बनारस के आसपास लंगड़ा आम के बाग बगीचे कम हो गए हैं। इसलिए उत्पादन भी कम हो रहा है। बनारस में 600 हेक्टेयर में लंगड़ा आम के बगीचे रह गए हैं। लंगड़ा आम को आम का बाप भी कहा जाता है।

मैंगो एक्सपोर्ट एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष नदीम सिद्दीकी बताते हैं 'आम का सबसे बड़ा बाजार यूपी है। संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन, सऊदी अरब, कतर, कुवैत और अमेरिका में भी भारतीय आम का जलवा है। एपीडा के अनुसार, साल 2018-19 में 406.45 करोड़ रुपये का 46510.23 मीट्रिक टन आम निर्यात किया गया था। इस बार ऑन सीजन होने की वजह से निर्यात डेढ़ गुना होने की उम्मीद थी। अगर मई में लॉकडाउन खुल भी गया तो विदेशों में आम जा पाना मुश्किल है। हवाई जहाज से तो जाएगा नहीं। बागवानों की मांग है कि आम की सप्लाई पर न रोक लगाई जाए।"

मैंगो ग्रोअर्स एसोसिएशन के मुताबिक भारत में कुल 26 लाख हेक्टेयर में आम का उत्पादन हो रहा है। जिसमें 1 करोड़ 90 लाख मिट्रिक टन पैदावार होती है। यूपी, आंध्र, कर्नाटक, बिहार, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, गुजरात बड़े उत्पादक राज्य हैं। आम का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश है। जहां करीब 50 लाख मिट्रिक टन आम पैदा होता है। एपिडा के मुताबिक यह कुल उत्पादन का 23.47 फीसदी होता है।

एपीडा के अनुसार, साल 2018-19 में 406.45 करोड़ रुपए का 46,510.27 मीट्रिक टन आम निर्यात किया गया था। इस बार निर्यात डेढ़ गुना होने की उम्मीद थी, लेकिन अब कोविड-19 की वजह से विदेशों में आम जा पाना मुश्किल है।