Sign up for our weekly newsletter

अर्थव्यवस्था बचाने आगे आया ग्रामीण विकास मंत्रालय, राज्यों की बैठक बुलाई

मंदी की ओर बढ़ रही अर्थव्यवस्था में ग्रामीण संकट बड़ी भूमिका निभा सकता हैं, इसलिए मोदी सरकार ने ग्रामीण संकट का हल ढूंढ़ना शुरू कर दिया है।

By Raju Sajwan

On: Thursday 30 May 2019
 

मंदी की शिकार हो रही अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए मोदी सरकार का सारा फोकस ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर होगा। देश की लगभग दो तिहाई खपत करने वाले ग्रामीण क्षेत्र में निराशा का माहौल है, ऐसे में आम चुनाव के परिणाम आते ही केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय को बड़ा काम सौंपा गया है। मंत्रिमंडल के शपथ लेने से दो दिन पहले ही मंत्रालय ने अगले सप्ताह एक बैठक बुला ली है, जिसमें सभी राज्यों को बुलाया गया है। दो दिन तक चलने वाली इस बैठक में ग्रामीण विकास के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर विचार विमर्श होगा।

पिछले पांच साल के दौरान ग्रामीण संकट काफी बढ़ा है। ग्रामीण भारत में मजदूरी कम हुई है। कृषि संकट बढ़ा है और रही-सही कसर सूखे और अतिशय मौसम की घटनाओं ने पूरी कर दी। मानसून के जिस तरह के संकेत मिल रहे हैं, उससे लगता है कि देश के कई हिस्सों में तीसरी बार लगातार सूखे के हालात रहेंगे। इसका असर अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय है। इसका अंदाजा इस बात से लगाए जा रहा है कि सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) ने पिछले माह जारी आंकड़ों में बताया था कि ऑटो की बिक्री में 2.96 प्रतिशत घटी। इसके बाद यह कहा गया कि अगर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की हालत नहीं सुधरी तो ऑटो की बिक्री में और गिरावट आएगी।

ऐसे में, अगली सरकार के लिए अर्थव्यवस्था खासकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संभालना एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

इन हालातों में बेहद महत्वपूर्ण साबित होने जा रहे ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से जो सूचना राज्यों को भेजी गई है, उसमें कहा गया है कि बैठक में राज्यों के समक्ष न्यू इंडिया 2022 का ड्राफ्ट रखा जाएगा। इस ड्राफ्ट में 75 लक्ष्य रखे गए हैं। इनमें 2022 तक देश की विकास दर 9 से10 प्रतिशत तक पहुंचाना, विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर) क्षेत्र की वृद्धि दर दोगुनी करना, किसानों की आमदनी दोगुनी करना शामिल है। इसके अलावा महिलाओं की श्रम भागीदारी कम से कम 30 फीसदी और सस्ती दर पर अधिक से अधिक लोगों को ऋण सुविधा उपलब्ध कराना, सबको घर, 175 गीगावाट अक्षय ऊर्जा, गांवों तक डिजिटल कनेक्टिविटी, जल संरक्षण, सतत पर्यावरण, सब बच्चों को शिक्षा, कौशल विकास, उच्चतर शिक्षा, आयुष्मान भारत का दूसरा चरण, डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाना, इलाज पर जेब से खर्च (ओओपीई) को 15 फीसदी तक कम करना, पोषण संकेतकों में सुधार करना,सामाजिक सुरक्षा, पिछड़े समुदायों का सामाजिक आर्थिक विकास, संतुलित क्षेत्रीय विकास, ग्रामीण विकास कार्यक्रम और ग्राम स्वराज अभियान के कार्यक्रमों को शामिल किया गया है।  

30 जून 2022 तक का लक्ष्य

बैठक में पिछले 5 साल के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे विकास कायों की भी समीक्षा की जाएगी। साथ ही, अगले 1000 दिन का एजेंडा भी तैयार किया जाएगा, ताकि 30 जून 2022 तक न्यू इंडिया के लक्ष्य हासिल किए जा सकें और 15 अगस्त 2022 को इसका जश्न मनाया जा सके। लक्ष्य रखा गया है कि जून 2020 तक 70 लाख घर, जून 2021 तक 70 लाख और जून 2022 तक 60 पक्के घर बनाए जाएंगे। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 130 से 135 किमी सड़क रोजाना बनाई जाएगी। 2 अक्टूबर 2019 तक हर गांव तक कनेक्टिविटी पहुंचाने का एक्शन प्लान तैयार किया जाएगा, जो जून 2022 तक पूरा हो जाएगा। हर पांच किलोमीटर के दायरे में बैंकिंग सेवा, मनरेगा, एनआरएलएम, पीएमजीएसवाई, प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण में डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देना, सरकारी सेवाओं की डिजिटल डिलीवरी, जियो टैगिंग पर फोकस किया जाएगा।

कृषि क्षेत्र के लिए

मनरेगा और डीएवाई-एनआरएलएम के लाभार्थियों की आमदनी  बढ़ाना, 1000 किसान उत्पादक संगठन बनाना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़कों के माध्यम से बाजार तक किसानों की पहुंच बढ़ाई जाएगी। साथ ही, ग्रामीण उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराया जाएगा। ग्रामीण मंत्रालय द्वारा कृषि मंत्रालय के साथ मिलकर 60 साल से अधिक उम्र के सीमांत और छोटे किसानों पेंशन देने, मनरेगा के माध्यम से सिंचाई व जल संचयन में सुधार की दिशा में काम किया जाएगा। सतत कृषि के लिए 38 लाख महिला किसानों के साथ काम किया जाएगा।

स्वच्छता एवं ठोस कचरा प्रबंधन

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने अपने ड्राफ्ट में स्वच्छता एवं ठोस कचरा प्रबंधन को भी प्रमुखता देते हुए कहा कि स्वच्छ भारत मिशन या मनरेगा के तहत हर घर में शौचालय सुनिश्चित किया जाएगा। मनरेगा, राज्य संसाधनों व वित्त आयोग के फंड से हर गांव में ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन की व्यवस्था की जाएगी। कचरा से आमदनी के मॉडल को बढ़ावा दिया जाएगा। वेस्ट वाटर के दोबारा इस्तेमाल का इंतजाम किया जाएगा। ओडीएफ स्टेट्स को सस्टेनेबल बनाया जाएगा। जल संसाधन मंत्रालय को इस काम में साथ जोड़ा जाएगा।