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क्या वायरस को रोकने में ज्यादा कारगर हो सकते हैं मास्क के लिए तांबे से बने फिल्टर

तांबे के फोम से बने यह फिल्टर 0.1 से 1.6 माइक्रोन आकार के कणों को दूर कर सकते हैं| जिसका मतलब है कि यह कोरोनावायरस को भी प्रभावी रूप से फिल्टर कर सकते हैं

By Lalit Maurya

On: Friday 26 March 2021
 

कोरोना महामारी के चलते आज लोगों के लिए फेसमास्क पहनना जरुरी हो चुका है जो इस महामारी को फैलने से रोकने का एक प्रभावी तरीका है। लेकिन हाल ही में इन मास्क से फैलने वाले कचरा एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है ऐसे में यदि ऐसे मास्क हो जिनको आसानी से पुनः उपयोग किया जा सके और उसके बाद भी वो इतने प्रभावी रहे जितना पहले थे, यह बहुत मायने रखता है।

आमतौर पर हम जो मास्क पहनते हैं वो बहुत नाजुक होते हैं। साथ ही उन्हें आसानी से कीटाणुरहित नहीं किया जा सकता। लेकिन हाल ही में वैज्ञानिकों ने इस समस्या का भी हल निकल लिया है उन्होंने मास्क में धातु के बने फिल्टर इस्तेमाल करने की बात कही है। धातु के बने फोम टिकाऊ होते हैं। उनकी सतह का क्षेत्रफल ज्यादा और मौजूद छिद्र छोटे होते हैं। जिस वजह से वो प्रभावी रूप से रोगाणुओं को फ़िल्टर कर सकते हैं।

हाल ही में अमेरिकन केमिकल सोसाइटी के जर्नल नैनो लेटर्स में एक शोध प्रकाशित हुआ है जिसमें शोधकर्ताओं ने ताम्बे के बहुत बारीक तारों को धातु के फोम में बदल दिया है, जिनका इस्तेमाल फेसमास्क और एयर फिल्ट्रेशन सिस्टम में किया जा सकता है। शोध के अनुसार ताम्बे के फोम कुशलता से फिल्टर करते हैं साथ ही इन्हें आसानी से कीटाणुरहित करके पुनः उपयोग किया जा सकता है। यही नहीं इन्हें खराब होने के बाद रिसाइकिल भी कर सकते हैं।

जब कोविड-19 और सांस का मरीज, खांसता और छींकता है तो हवा में छोटी बूंदों और एयरोसोल के रूप में कण भी मुक्त होते हैं। इसमें 0.3 माइक्रोन से छोटे कण कई घंटों तक हवा में रह सकते हैं। ऐसे में इन कणों को रोकने के लिए बनाए गए फिल्टर, फेसमास्क और एयर फिल्टर के लिए बहुत मायने रखते हैं। लेकिन वर्त्तमान में हम जो फिल्टर प्रयोग कर रहे हैं उनमें कई कमियां हैं जैसे फाइबरग्लास, कार्बन नैनोट्यूब और पॉलीप्रोपाइलीन फाइबर से बने फिल्टर बार-बार कीटाणुरहित करने में टिकाऊ नहीं रहते हैं।

जबकि कई फिल्टर इलेक्ट्रोस्टैटिक्स पर निर्भर करते हैं ऐसे में उन्हें धोया नहीं जा सकता, नतीजन बड़ी मात्रा में कचरा पैदा होता है। ऐसे में शोधकर्ताओं ने इसके विकल्प के रूप में धातु के बने फिल्टर का निर्माण किया है जिनके छिद्र छोटे और जो धोने और कीटाणुरहित करने में जायदा मजबूत और प्रतिरोधी होते हैं। इसके लिए उन्होंने तांबे से बने फोम का इस्तेमाल किया है। 

कितना कारगर है यह फिल्टर

शोधकर्ताओं द्वारा बनाए तांबे के यह फोम 0.1 से 1.6 माइक्रोन आकार के कणों को फिल्टर कर सकते हैं। जिसका मतलब है कि यह कोरोनावायरस को भी प्रभावी रूप से फिल्टर कर सकते हैं। उनके द्वारा बनाया सबसे प्रभावी फिल्टर 2.5 मिमी मोटा था, जिसमें ताम्बे की मात्रा 15 फीसदी थी। इस फोम की सतह के क्षेत्रफल ज्यादा था, जिस वजह से वो जांच के समय 0.1 से 0.4 माइक्रोन आकार के 97 फीसदी कणों को रोक सकने में सक्षम था। शोधकर्ताओं के अनुसार सांस लेने में यह फिल्टर उतने ही प्रभावी थे जितना कोई व्यावसायिक रूप से उपलब्ध पॉलीप्रोपाइलीन एन 95 फेसमास्क होता है। चूंकि यह फिल्टर तांबे के बने हैं ऐसे में यह सफाई के लिए इस्तेमाल होने वाले कई घटकों के लिए प्रतिरोधी होते हैं। जिससे इन्हें आसानी से साफ़ किया जा सकता है।

यही नहीं तांबे के रोगाणुरोधी होने के गुण बैक्टीरिया और वायरस को मारने में भी मददगार होते हैं। साथ ही इन फिल्टर को रीसायकल किया जा सकता है। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि यदि वर्त्तमान में सामान की कीमत को देखें तो उसके हिसाब से इसकी कीमत प्रति मास्क करीब 145 रुपए (2 डॉलर) होगी। जो थोड़ी ज्यादा जान पड़ती है, लेकिन इसके कीटाणुरहित करने और इसका पुनः उपयोग और लम्बा जीवनकाल इसकी कीमत को कम कर देगा।