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कोरोनावायरस संक्रमण को धर्म से जोड़ना सही नहीं: डब्‍ल्‍यूएचओ

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (डब्‍ल्‍यूएचओ) ने भारत में तब्लीग जमात के संदर्भ में कहा है कि मरीजों को सिर्फ मरीज के दृष्टिकोण से देखना चाहिए उनके धर्म के आधार पर नहीं

By DTE Staff

On: Tuesday 07 April 2020
 

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 6 अप्रैल, 2020 को एक संवाददाता सम्मेलन में यह सिफारिश की है कि देशों को कोरोनावायरस के मरीजों को धर्म या उससे सम्बंधित किसी अन्य मानदंडों से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। यह टिपण्णी ऐसे समय में की गई है, जब नई दिल्ली में इस्लामिक संप्रदाय की तबलीगी जमात से जुड़े कई लोग कोरोनावायरस से संक्रमित पाए गए हैं। जिसकी वजह से भारत भर में तबलीगी जमात की कड़ी आलोचना हो रही है।

5 अप्रैल को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल, जो नियमित रूप से मीडिया को कोरोनावायरस के बारे में सूचना दे रहे थे, ने कहा कि भारत में संक्रमण के तेजी से बढ़ने के पीछे तबलीगी जमात ही जिम्मेदार है। उनके अनुसार भारत में कोरोनावायरस के मामले 4.1 दिन में दोगुने हो रहे हैं। पर यदि दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में तबलीगी जमात कहे जाने वाले इस्लामिक संप्रदाय की मीटिंग से संक्रमण नहीं फैलता तो यह मामले 7.14 दिन में दोगुने होते। 

डब्ल्यूएचओ के आपातकालीन कार्यक्रम निदेशक माइक रयान ने 6 अप्रैल को भारत के विषय में पूछे गए एक सवाल के जवाब में उत्तर दिया था कि "कोविड-19 के संक्रमण में किसी का दोष नहीं है। हमें हर पीड़ित को सिर्फ एक मरीज मानना चाहिए। इसको धर्म से जोड़ा जाना इस समस्या का हल नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण है कि हमें नस्लीय, जातीय और धार्मिक आधार पर मामलों को वर्गीकृत नहीं करना चाहिए” 

स्वास्थ्य और गृह मंत्रालय के अधिकारी 1 अप्रैल से ही अपने बयानों में तबलीगी जमात को इस संक्रमण के तेजी से फैलने के लिए जिम्मेदार मान रहे हैं। 2 अप्रैल को लव अग्रवाल ने देश के राज्यों में इस जमात के लोगों द्वारा फैलाये संक्रमण का ब्यौरा दिया था। वहीं 3 अप्रैल को उन्होंने 17 राज्यों में इस जमात के कारण संक्रमण के फैलने की बात मानी थी। 4 अप्रैल को उन्होंने कहा था कि भारत में कोरोनावायरस के 30 फीसदी मामलों के लिए तबलीगी जमात जिम्मेदार है।

इससे पहले मार्च के अंतिम सप्ताह में मंत्रालय ने उस सवाल का जवाब देने से इंकार कर दिया था, जिसमें उनसे कोरोना वायरस से संक्रमित सैनिकों और अर्धसैनिक बलों के जवानों की संख्या के बारे में पूछा गया था। जिसपर उन्होंने जवाब दिया था कि उनकी नजर में सभी मामले एक सामान हैं। और उन्हें इस तरह वर्गीकृत करना सही नहीं है। इसके साथ ही सरकार ने प्रभावित स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या को भी अब तक साझा नहीं किया है।

अग्रवाल ने 31 मार्च को इस तरह के सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया था और कहा कि जो भी संक्रमित हुए हैं वो मरीजों को सेवाएं देने के दौरान प्रभावित हुए थे। पत्रकारों के सुरक्षात्मक उपकरणों, वेंटिलेटर, मास्क और अन्य आवश्यक चीजों की उपलब्धता के बारे में बार-बार पूछने पर भी मंत्रालय अब तक  उसका उत्तर देने से बचता आ रहा है। लेकिन मंत्रालय लगातार जमात के बारे में जानकारी दे रहा है, वह बता रहा है कि इस जमात में शामिल कितने विदेशियों को ब्लैकलिस्ट किया गया है या उनपर अन्य कार्रवाई की गयी हैं। 

इन सबके बीच तबलीगी जमात और उससे जुडी सच्ची-झूठी अफवाहें चारों ओर फैली हुई हैं। इनके बीच दो खबरे ऐसी भी हैं जो दिखती हैं कि इन झूठी-सच्ची और अधूरी खबरों का क्या परिणाम होता है। जहां कथित तौर पर तबलीगी जमात में शामिल दो लोगों के संपर्क में आने और उससे जुड़े ताने झेलने के कारण एक मुस्लिम युवक ने हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में 5 अप्रैल को आत्महत्या कर ली थी।

हालांकि वह युवक जांच के दौरान संक्रमित नहीं पाया गया था, लेकिन इसके बावजूद स्थानीय लोगों द्वारा उत्पीड़न किये जाने के चलते उसने आत्महत्या कर ली थी। वहीं रविवार को सामने आयी एक अन्य घटना में, जमात की आलोचना के चलते एक आम बहस इतनी बढ़ी की उसके चलते उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। 

माइक रयान रयान ने यह भी कहा है कि स्वास्थ्य कर्मियों पर किये जा रहे हमले पूरी तरह गलत और अस्वीकार्य हैं और उनकी सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाया जाना चाहिए। यह टिप्पणी इंदौर में हुई एक घटना के संदर्भ में सामने आई है, जहां मुस्लिम बहुल इलाके में नियमित निगरानी के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों पर कथित तौर पर हमला किया गया था।