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कोरोनावायरस: क्यों कोरेंटाइन में जाना चाहते हैं बिहार के 83 जूनियर डॉक्टर

पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पीटल के 83 जूनियर डॉक्टरों ने सरकार से 15 दिनों के कोरेंटाइन पर जाने की मांग की है, इससे एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है

By Pushya Mitra

On: Wednesday 25 March 2020
 

पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पीटल के 83 जूनियर डॉक्टरों ने सरकार से 15 दिनों के कोरेंटाइन पर जाने की मांग की है। उनका कहना है कि वे अस्पताल के एक कोरोना पोजिटिव मरीज के संपर्क में आ गये हैं और उनके कई साथियों में कोरोना के लक्षण मिल रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने चिकित्सा कर्मियों को पर्याप्त संख्या में व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण(पीपीई) उपलब्ध कराने की मांग ट्विटर पर की है। दरभंगा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पीटल के जूनियर डॉक्टरों ने भी सोमवार को पूरी दोपहर काम बंद रखा, जबकि उस वक्त देश के विभिन्न राज्यों से आये प्रवासी बिहारी मजदूरों की लंबी कतारें स्क्रीनिंग के लिए अस्पताल के आगे खड़ी थी। एम्स में  कोरोना मरीज की मृत्यु के बाद एक डॉक्टर और एक नर्स को आइसोलेशन में भेजा गया है, वहीं एक डॉक्टर अपनी मर्जी से होम आइसोलेशन में है। एन-95 मास्क और पीपीई के अभाव में कोरोना का मुकाबला कर रहे डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों में भारी आक्रोश है।

एनएमसीएच के 83 जूनियर डॉक्टरों ने 23 मार्च को ही एक पत्र लिख कर 83 डॉक्टरों को 15 दिनों के कोरेंटाइन में भेजे जाने की मांग की थी, बाद में अस्पताल के अधीक्षक ने उस पत्र को बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को भेज दिया। हालांकि उन्हें अभी तक कोरेंटाइन में भेजे जाने की अनुमति नहीं मिली है।

उधर दरभंगा के जूनियर डॉक्टरों का कहना था, कोरोना से मुकाबले की जिम्मेदारी हम पर है, मगर हमें खुद ढंग के व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण(पीपीई) नहीं मिल रहे। कोरोना संक्रमण के लिए सुरक्षित माने जाने वाले एन-95 मास्क तो दुर्लभ ही हो गये हैं। उन्हें टू लेयर और थ्री लेयर वाले सामान्य मास्क से काम चलाना पड़ रहा है। वे कई दिनों से एन-95 मास्क और पीपीई किट की मांग कर रहे हैं, मगर उन्हें ये उपलब्ध नहीं कराये जा रहे। इस पर प्राचार्य डॉ एचएन झा ने कहा कि अस्पताल के अधीक्षक भी कई दफा इस मांग को बीएमएसआईसीएल (बिहार मेडिकल सर्विस एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉपरेशन लिमिटेड) को भेज चुके हैं, मगर वहां से आपूर्ति नहीं हो रही।

इन दो बड़े अस्पतालों के अलावा राजधानी पटना के आईजीआईएमएस अस्पताल में भी जूनियर डॉक्टर दो दफा एन-95 मास्क और पीपीई के लिए सामूहिक प्रतिरोध कर चुके हैं। फिलहाल ज्यादातर डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी टू लेयर और थ्री लेयर मास्क से ही काम चला रहे हैं। पीपीई कभी कभार बहुत कम मात्रा में आता है और कुछ लोगों को मिलता है, कुछ ऐसे ही रह जाते हैं।

आईजीआईएमएस के एक डॉक्टर ने नाम न प्रकाशित किये जाने की शर्त पर जानकारी दी कि उनके डिपार्टमेंट कुल 18 स्टाफ हैं, जबकि उन्हें कभी आठ मास्क मिलता है, कभी दस, वह भी टू लेयर और थ्री लेयर। आज कई दिनों बाद उन्हें एन-95 मास्क मिला है। वे बताते हैं कि कई दिनों बाद आज यह सूचना आयी है कि पूरे अस्पताल के लिए 100 पीपीई यूनिट आ रहा है। फिर खबर आयी कि उसमें से 40-45 उन सुरक्षाकर्मियों के लिए ही रखा जायेगा जो आइसोलेशन वार्ड पर तीन शिफ्टों में ड्यूटी कर रहे हैं। वे कहते हैं कि आईजीआईएमएस में 300 डॉक्टर और स्टाफ आईसीयू में रेगुलर ड्यूटी करते हैं और कुल 1500 स्टाफ हैं। अगर आईसीयू के स्टाफ के लिए ही तीन शिफ्ट के हिसाब से एन-95 मास्क और पीपीई किट मांगा जाये तो रोज 900 यूनिट की जरूरत है।

भागलपुर के एक एनेस्थेसिस्ट जिन्हें इन दिनों पुलिस बल की सेवा में भेजा गया है, कहते हैं मास्क का संकट वाकई बहुत गंभीर है। बाजार में ही उपलब्ध नहीं है, कोई करे तो क्या करे। दिक्कत सिर्फ डॉक्टरों की नहीं, नर्सों, वार्ड ब्वाय, अटेंडेंट और दूसरे हजारों हेल्थ वर्करों की है, उनकी फिक्र सबसे आखिर में की जाती है, मगर सच यही है कि खतरों से सबसे अधिक जूझना उन्हें ही पड़ता है। पटना की एक नर्स ने कहा कि शुरुआत में कुछ लोगों ने भयवश बाजार से खुद मास्क खरीदना शुरू किया था, मगर अब वह भी अनुपलब्ध है।

बिहार में जन स्वास्थ्य अभियान से जुड़े डॉ शकील कहते हैं, कल मैंने भी अपने साथियों के लिए मास्क और पीपीई ड्रेस खरीदने की कोशिश की, मगर पटना की सबसे बड़ी मेडिकल मंडी में भी वह अनुपलब्ध था। सरकार को इस बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिए।

वे कहते हैं कि असुरक्षित माहौल में काम करने की वजह से स्वास्थ्य कर्मी मानसिक रूप से भी परेशान रहते हैं, कल संभवतः बिहार सरकार ने राज्य के सभी स्वास्थ्य कर्मियों के लिए एक माह के मूल वेतन के बराबर प्रोत्साहन देने की घोषणा की, मगर स्वास्थ्य कर्मी इससे संतुष्ट नहीं हैं, उनकी प्राथमिकता उनका स्वास्थ्य है, पैसा नहीं।

डॉ शकील कहते हैं कि स्थिति ऐसी ही गयी है कि कई पारा मेडिकल स्टाफ खुद भी डर से घर नहीं जा रहे, कई लोगों को उनके मकान मालिक घर नहीं आने दे रहे। क्योंकि उन्हें संक्रमण का डर है। इस बात की पुष्टि आइजीआइएमएस के डॉक्टर और पारा मेडिकल स्टाफ भी करते हैं। कुछ पारा मेडिकल स्टाफ जो बैचलर रह कर काम कर रहे हैं, लॉक डॉउन के बाद उनके लिए खाने-पीने का भी संकट हो गया है, क्योंकि पटना के सभी भोजनालय बंद हो गये हैं। इन परिस्थितियों में कोरोना संक्रमण की विषम परिस्थितियों से जूझना उनके लिए मुश्किल हो रहा है।

बिहार में एन 95 मास्क और पीपीई की उपलब्धता के बारे में जब हमने बीएमएसआईसीएल के प्रबंध निदेशक संजय कुमार सिंह से बात करने की कोशिश की तो उनके दफ्तर से हमें बताया गया कि वे मीटिंग में व्यस्त हैं और अभी बात करने में सक्षम नहीं हैं। राज्य स्वास्थ्य समिति की सर्विलांस ऑफिसर रागिनी मिश्रा ने कहा कि हमने केंद्र से ज्यादा से ज्यादा एन 95 मास्क और पीपीई उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है, बिहार मेडिकल सप्लाई एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉर्पोरेशन लिमिटेड भी इसकी खरीदारी का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि यह शिकायत सही है कि राज्य के स्वास्थ्य कर्मियों को घर आने से मकान मालिक रोक रहे हैं।