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कोविड-19: फ्रांस और चीन में किए गए ट्रायल में विफल रही हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन

दोनों अध्ययनों में सामान्य एवं गंभीर रोगियों पर दवा का प्रतिकूल प्रभाव दिखाई दिया

By Banjot Kaur

On: Sunday 17 May 2020
 
Photo: Wikimedia commons
Photo: Wikimedia commons Photo: Wikimedia commons

कई लोगों ने ये दावा किया था कि मलेरिया की दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (एचसीक्यू) नोवेल कोरोना वायरस बीमारी के उपचार में कारगर है। इस दावे को ले कर फ्रांस और चीन में दो अलग-अलग बेतरतीब (रैंडम) और नियंत्रित ट्रायल (आरसीटी) किए गए।

इस ट्रायल से पता चला कि सामान्य एवं गंभीर रोगियों पर ये दवा विफल रही और इसके प्रतिकूल प्रभाव भी दिखे। आरसीटी के परिणाम 15 मई, 2020 को बीएमजे जर्नल में प्रकाशित हुए।

इससे पहले भी कोविड-19 के संभावित उपचार के रूप में इस दवा का कई इन-विट्रो (प्रयोगशाला में) और ऑबजर्वेशनल (अवलोकन) अध्ययन किया जा चुका था। इन-विट्रो परिणाम सकारात्मक थे, लेकिन अवलोकन अध्ययन से मिश्रित नतीजे सामने आए थे।

दवा पर पहला आरसीटी चीन में हुआ था, लेकिन कोविड-19 के खिलाफ इसकी क्षमता उत्साहित करने वाली नहीं थी। 

पेपर के मुताबिक, अस्पष्ट लाभ के बावजूद, चीनी नेशनल गाइडलाइंस और अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा क्लोरोक्विन और एचसीक्यू के ऑफ-लेबल यूज (गैर-अनुमोदित लक्षण, मरीज, आयु समूह में दवा का इस्तेमाल) की सिफारिश की गई थी।

पेपर कहता है, “अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी हाल ही में एचसीक्यू इस्तेमाल की सिफारिश की है। राष्ट्रपति के समर्थन ने इसकी मांग में तेजी से वृद्धि ला दी, जिसने इसके नकारात्मक पहलुओं को छुपा दिया।“ 

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने भी स्वास्थ्य कर्मियों, गंभीर रोगियों और पुष्ट मामलों के संपर्क में आए लोगों में कोविड-19 रोकथाम (निवारक उपचार) के लिए इस दवा की सिफारिश की थी।

चीनी अध्ययन

अध्ययन के लिए मामूली और सामान्य रूप से कोविड-19 संक्रमित 150 लोगों पर इस दवा का ट्रायल हुआ था। ये सभी लोग चीन के हुबेई, हेनान और अनहुई प्रांत के थे। इसमें दावा किया गया कि यह एचसीक्यू के मूल्यांकन के लिए पहला आरसीटी था।

इन लोगों को दो समूहों में विभाजित किया गया था। एक समूह को एचसीक्यू के साथ ही देखभाल के सामान्य मानक प्रदान किए गए और दूसरे समूह की केवल देखभाल की गई। तीन दिनों तक मरीजों को हर दिन दो सौ मिलीग्राम एचसीक्यू का डोज दिया गया और बाकी के दिनों के लिए 800 मिलीग्राम का डोज दिया गया।

ट्रायल के जरिए ये देखना था कि क्या 28 दिनों के बाद रोगी सार्स-सीओवी-2 वायरस से मुक्त होते हैं या नही। 150 मरीजों में से 109 मरीज वायरस से मुक्त हुए। 

अब, इन 109 में से 53 को एचसीक्यू के साथ ही मानक देखभाल दिया गया था, जबकि 56 की केवल देखभाल की गई थी। अध्ययन में कहा गया है कि एचसीक्यू के साथ ही मानक देखभाल प्राप्त मरीजों में 28 दिनों के भीतर वायरस मुक्त होने की संभावना 85.4% थी, जबकि सिर्फ देखभाल प्राप्त मरीजों में ये संभावना 81.3% रही। यानी, ये अंतर सिर्फ 4.1% का था। अध्ययन के मुताबिक, ये अंतर बताता है कि रोगियों के उपचार में एचसीक्यू के कारण कोई महत्वपूर्ण उपलब्धि नहीं मिली।

इसके उलट, इस ट्रायल से दवा के महत्वपूर्ण दुष्प्रभाव की बात जरूर सामने आई।

अध्ययन के अनुसार, "एचसीक्यू प्राप्त मरीजों में प्रतिकूल घटनाओं (एडवर्स इवेंट्स) के मामले उन मरीजों के मुकाबले अधिक थे, जिन्हें एचसीक्यू नहीं दिया गया था।" अध्ययन के अनुसार, एचसीक्यू की हाई डोज इस्तेमाल करने वाले एक और अध्ययन में गैस्ट्रो-इंटेस्टाइनल, डायरिया के मामले सामने आए।

अध्ययन के मुताबिक, "एक मरीज में क्षणिक धुंधली दृष्टि (ब्लर्ड विजन) की शिकायत आई, जिसके लक्षण एचसीक्यू बन्द करने के दो दिन बाद ठीक हो गए।" 

फ्रेंच अध्ययन

मार्च में आयोजित फ्रेंच आरसीटी में कोविड-19 से बुरी तरह प्रभावित लोग शामिल थे। ये सभी मरीज 18 से 80 वर्ष के थे। उनमें सार्स-सीओवी-2 संक्रमण की पुष्टि हो चुकी थी और इन्हें मास्क या नाक के जरिए ऑक्सीजन सप्लाई की आवश्यकता थी।

181 मरीजों में से 84 (उपचार समूह) को अस्पताल में आने के 48 घंटे के भीतर एचसीक्यू दिया गया और 8 को 48 घंटे के बाद दवा दी गई। 89 मरीजों (नियंत्रण समूह) को एचसीक्यू नहीं दिया गया। 

उपचार समूह की तुलना नियंत्रण समूह से की गई थी।

अध्ययन में पाया गया कि उपचार समूह में 21वें दिन, बिना आईसीयू सपोर्ट के जीवित रहने की दर (सर्वाइवल रेट)  76 प्रतिशत थी, जबकि नियंत्रण समूह में ये 75 प्रतिशत थी।

उपचार समूह में 21वें दिन ओवरऑल सर्वाइवल रेट 89 प्रतिशत और नियंत्रण समूह में 91 प्रतिशत था।

अध्ययन में कहा गया है, "हमने पाया कि 21वें दिन सिर्फ मानक देखभाल प्राप्त मरीजों की तुलना में मानक देखभाल के साथ प्रति दिन 600 मिलीग्राम एचसीक्यू डोज प्राप्त करने वाले मरीजों की मौत या आईसीयू में दाखिले की जरूरत में कमी नहीं आ रही थी।"

अध्ययन के अनुसार, दोनों ही समूहों में एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम के बिना सर्वाइवल रेट में वृद्धि नहीं हुई।

ये परिणाम तब भी नहीं बदला, जब 48 घंटों के बाद एचसीक्यू प्राप्त करने वाले आठ रोगियों को विश्लेषण में शामिल किया गया। इस अध्ययन ने दवा के महत्वपूर्ण दुष्प्रभावों को भी बताया, जिसमें अचानक कार्डियक डेथ भी शामिल है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कम से कम दो स्वास्थ्यकर्मियों की मौत एचसीक्यू सेवन के बाद हुई। इसमें एक स्वास्थयकर्मी असम से और एक मुंबई के थे। हालांकि, आईसीएमआर ने इन मौतों की वैज्ञानिक जांच नहीं की, जिससे मौत का असली कारण पता नहीं चल सका है।