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मुख्य श्रम आयुक्त कार्यालय को नहीं पता लॉकडाउन में कितने प्रवासी मजदूर फंसे हैं

मुख्य श्रम आयुक्त कार्यालय ने 8 अप्रैल को 20 क्षेत्रीय कार्यालयों को सर्कुलर भेजकर 3 दिन में प्रवासी मजदूरों का आंकड़ा एकत्र करने को कहा था

By Bhagirath Srivas

On: Wednesday 06 May 2020
 

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अधीन आने वाले मुख्य श्रम आयुक्त कार्यालय को नहीं पता कि किस राज्य अथवा जिले में कितने प्रवासी मजदूर फंसे हैं। यह स्थिति तब है जब मुख्य श्रम आयुक्त ने अप्रैल के दूसरे सप्ताह में देश के 20 क्षेत्रीय कार्यालयों को सर्कुलर भेजकर लॉकडाउन की वजह से फंसे प्रत्येक प्रवासी मजदूर की तुरंत गणना करने को कहा था।

उल्लेखनीय है कि देशभर में 25 मार्च से लॉकडाउन की घोषणा के बाद से अलग-अलग राज्यों में प्रवासी मजदूर जहां-तहां फंसे हैं। बहुत से राज्यों में प्रवासी मजदूरों का धैर्य जवाब दे रहा है। वे अपने घर जाने को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। बहुत से मजदूर सैकड़ों किलोमीटर की दूरी पैदल ही नाप रहे हैं। किस राज्य में कितने मजदूर फंसे हैं, इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

इस संकट के दौर में मुख्य श्रम आयुक्त कार्यालय ने 8 अप्रैल 2020 को एक सर्कुलर जारी किया जिसमें देशभर के 20 क्षेत्रीय कार्यालयों से लॉकडाउन की वजह से फंसे प्रवासी मजदूरों का आंकड़ा एकत्र करने को कहा गया। यह आंकड़ा जिलेवार और राज्यवार एकत्र करना था। ये आंकड़े किस प्रारूप में एकत्र किए जाएंगे, इसकी जानकारी भी सर्कुलर में दी गई थी। क्षेत्रीय कार्यालयों को कहा गया था कि वे तीन दिन में आंकड़े एकत्र कर मुख्य श्रम आयुक्त कार्यालय को भेज दें।

कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट इनिशिएटिव (सीएचआरआई) के वेंकटेश नायक ने सूचना के अधिकार कानून के तहत मुख्य श्रम आयुक्त कार्यालय से राज्यों द्वारा एकत्र किए गए प्रवासी मजदूरों के बारे में जानकारी मांगी। 5 मई 2020 को कार्यालय के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी ने एक लाइन में जवाब दिया कि यह जानकारी उपलब्ध नहीं है। 

वेंकटेश नायक कहते हैं कि केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी का जवाब प्रवासी मजदूरों के आंकड़े की उपलब्धता पर सवाले खड़े करता है। ऐसा तब है जब प्रवासी मजदूरों की तत्काल गणना का आदेश जारी हुआ है। वह सवाल उठाते हैं कि क्या केंद्रीय श्रम आयुक्त एवं अन्य पब्लिक अथॉरिटी के पास लॉकडाउन से फंसे प्रवासी मजदूरों का सही आंकड़ा नहीं है? अगर आंकड़ा उपलब्ध है तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है? वेंकटेश नायक ने अब मुख्य सूचना आयोग में शिकायत दायर कर जल्द सुनवाई की मांग की है।