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ज्वालामुखी फटने से पहले भी आई हैं सुनामी

ऐसा ही वाक्या 27 अगस्त 1883 को भी हुआ था। तब भी इसी ज्वालामुखी के फटने से भयंकर सुनामी आई थी जिसमें 36,000 लोगों को जान गंवानी पड़ी थी

By Bhagirath Srivas

On: Monday 24 December 2018
 

इंडोनेशिया के सुंडा खाड़ी में 22 दिसंबर को आए सुनामी से मरने वालों का आंकड़ा 281 पर पहुंच गया है जबकि करीब 1,100 लोग जख्मी और सैकड़ों लापता हैं। जावा और सुमात्रा द्वीप पर आई सुनामी ने लोगों को संभलने का मौका भी नहीं दिया क्योंकि इस सुनामी की कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई।

सुनामी की वजह क्राकाटाओ ज्वालामुखी का फटना और इसके कारण समुद्र के अंदर हुई हलचल बताई जा रही है। इस तरह की सुनामी पहली बार नहीं आई है। ऐसा ही वाक्या 27 अगस्त 1883 को भी हुआ था। तब भी इसी ज्वालामुखी के फटने से भयंकर सुनामी आई थी जिसमें 36,000 लोगों को जान गंवानी पड़ी थी। इस सुनामी से 30 मीटर ऊंची लहरें उठी थीं जिससे भारी तबाही मची थी। यह सुनामी इतनी असरदार थी कि इसका प्रभाव दक्षिण जॉर्जिया द्वीप, पनामा, फ्रांस, इंग्लैंड, अलास्का, हवाई और सेन फ्रांसिस्को तक पर्यावरणीय दबाव बन गया था। हालांकि सुनामी का प्रत्यक्ष प्रभाव अधिकांश स्थानों पर नहीं पड़ा। इस सुनामी की गणना सबसे खतरनाक ज्वालामुखी सुनामी के रूप में होती है।

27 अगस्त 1883 को भी क्राकाटाओ ज्वालामुखी फटने से भयंकर सुनामी आई थी। फोटो क्रेडिट : जियोलॉजी डॉट कॉमइसके अलावा करीब 73,000 साल पहले पश्चिमी अफ्रीका के केप वर्डे द्वीप में भी ऐसी ही एक घटना हुई थी। यहां फोगो ज्वालामुखी फटने के बाद उसके लावा का बड़ा हिस्सा समुद्र में चला गया था। इसका अध्ययन करने वाले वैज्ञानिक रिकॉर्डो रामल्हो ने पाया कि समुद्र में भारी मात्रा में मलबा जाने से एक भयंकर सुनामी पैदा हुई जिसने करीब 30 मील दूर स्थित पड़ोसी द्वीप को निगल लिया। इस सुनामी से करीब 800 फीट ऊंची लहरें उठी थीं। रोमल्हो ऐसे सुनामी को दुर्भल लेकिन प्रभावशाली मानते हैं। उनके अनुसार, ऐसी घटनाएं एक लाख साल में एक बार घटित होती हैं।

क्राकाटाओ ज्वालामुखी इस साल 18 जून से सक्रिय था। यूरोपीय स्पेस एजेंसी के सेंटीनेल 1 उपग्रह के चित्रों के मुताबिक, 22 दिसंबर को जब इसमें विस्फोट हुआ तो इसका एक बड़ा हिस्सा समुद्र में समा गया। भूभौतिकीविद मीका मैककिनन ने नेशनल ज्योग्राफिक को बताया कि इस तरह ही घटनाएं असामान्य नहीं हैं। वह बताते हैं कि ज्वालामुखी में चट्टानों की परतों में तरल पदार्थ होता है। हर विस्फोट के बाद वह नीचे की ओर बहता है। इसके नीचे जाने में ज्यादा वक्त नहीं लगता। अगर इसकी मात्रा अधिक हो तो यह तटों की ओर बड़ी लहरें पैदा कर सकती है।

सुनामी के बारे में अधिकांश लोग सोचते हैं कि यह भूकंप के कारण आता है। लेकिन यह सुनामी का एकमात्र कारण नहीं है। मैककिनन बताते हैं कि ग्लेशियर का पिघलना, भूस्खलन और ज्वालामुखी के फटने से समुद्र में बड़ी लहरें पैदा होती हैं। 2012 में शोधकर्ताओं ने पाया था कि ज्वालामुखी से एक मिनट के भीतर निकटवर्ती तट पर 50 से 100 फीट ऊंची लहरें आ सकती हैं।  

इंडोनेशिया में बहुत से ज्वालामुखी सक्रिय हैं। यह दुनिया में भूकंप के प्रति सबसे संवेदनशील क्षेत्र रिंग ऑफ फायर में स्थित है। ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि यहां के लोगों को आगे इस तरह की आपदाओं ने नहीं जूझना पड़ेगा।