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प्रदूषित शहरों में 6 माह के भीतर बनाए जाएं 175 निगरानी स्टेशन: एनजीटी

देश के विभिन्न अदालतों में विचाराधीन पर्यावरण से संबंधित मामलों में क्या कुछ हुआ, यहां पढ़ें –  

By Susan Chacko, Dayanidhi

On: Monday 24 August 2020
 

एनजीटी की खंडपीठ ने 21 अगस्त को भारत के 122 “नॉन अटेन्मेंट सिटीज (एनएसी)” में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए सुधारात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

6 मार्च, 21 जुलाई और 18 अगस्त को सीपीसीबी की रिपोर्टों के साथ-साथ केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर एनजीटी ने वायु प्रदूषण की रोक-थाम करने के लिए कई आदेश पारित किए।

  •         अदालत ने आदेश दिया कि एनएसी के लिए आवश्यक 398 ऑनलाइन स्टेशनों में से 173 पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं, बाकी के 175 स्टेशनों को पूरा करने का काम अगले छह महीनों के भीतर तेजी से पूरा किया जाना चाहिए।
  •         राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रदूषणकारी गतिविधियों को रोकने और जो एनएसी की वहन क्षमता से परे है उन्हें स्थानांतरित करने के लिए कदम उठाने को कहा गया है।
  •         एनजीटी ने निर्देश दिया कि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एसपीसीबी) और प्रदूषण नियंत्रण समितियों (पीसीसी) द्वारा एक साथ क्षमता और “सोर्स ऑफ़ अपॉर्शन्मन्ट स्टडीज” का अध्ययन किया जाना चाहिए।
  •         सभी संबंधित राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों को कार्य योजनाओं पर अमल करना चाहिए, जिनमें ठूंठ (स्टबल) के जलने पर नियंत्रण और प्रदूषण फैलाने और शोर करने वाले पटाखे जलाना शामिल है।
  •         15 जनवरी 2021 से पहले सीपीसीबी को 31 दिसंबर, 2020 तक कार्य योजनाओं के अनुपालन की स्थिति के बारे में जानकारी देनी होगी।
  •         राज्यों को विशेष वनीकरण सेवाओं के कार्यो के लिए कम्पेन्सेटरी  अफ्फोरेस्टशन फण्ड (कैम्पा) राशि का उपयोग करना चाहिए।

ये कुछ निर्देश थे जो जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और एनजीटी के एस. पी. वांगड़ी की खंडपीठ ने पारित किए थे।

प्लेटिनम एएसी ब्लॉक प्राइवेट लिमिटेड को गलत तरीके से "रेड श्रेणी" में नहीं डाला जा सकता है : एनजीटी

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने मैसर्स प्लेटिनम एएसी ब्लॉक प्राइवेट लिमिटेड को बंद करने के लिए दादर, नगर और हवेली के प्रदूषण नियंत्रण समिति के तर्क को इस आधार पर स्वीकार करने से इनकार कर दिया कि उद्योग की गतिविधियां "रेड श्रेणी" के तहत आती हैं।

गतिविधियों में फ्लाई ऐश का निपटान शामिल है। जबकि मामला यह है कि उद्योग की गतिविधियां "रेड श्रेणी" में नहीं हैं। ट्रिब्यूनल ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और पीसीसी की एक संयुक्त समिति से रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था। इकाई की गतिविधियों की जांच करने के बाद उक्त समिति ने कहा कि गतिविधियां "ग्रीन श्रेणी" के अंतर्गत आती हैं। उक्त रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए, ट्रिब्यूनल ने 17 जनवरी, 2020 को अपील का निस्तारण किया था।

हालांकि, पीसीसी ने रिपोर्ट प्रस्तुत कर कहा कि फ्लाई एश के निपटान में इकाई की गतिविधियों के दौरान प्रदूषण होता है और इसलिए, ट्रिब्यूनल द्वारा लिया गया निर्णय वापस लिया जाना चाहिए।

एनजीटी ने पीसीसी के तर्क को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और कहा कि इस मामले में कानून के अनुसार उचित दिशा-निर्देश देने में कोई रोक नहीं थी, बजाय इसके कि इकाई को गलत तरीके से "रेड श्रेणी" करार दिया जाए।

उपरोक्त के मद्देनजर, अदालत ने कहा कि 17 जनवरी के एनजीटी के आदेश को वापस लेने का कोई आधार नहीं है और इस तरह 21 अगस्त को आवेदन का निस्तारण किया गया।

फरीदाबाद में प्रदूषणकारी रंगाई (डाइंग) उद्योग नहीं कर रहे हैं पर्यावरणीय मानदंडों का पालन

एनजीटी ने 21 अगस्त को हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) को निर्देश दिया कि वह फरीदाबाद में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों से निर्धारित मुआवजे की वसूली करे। प्रदूषणकारी इकाइयों को मानदंडों के अनुपालन और मुआवजे के भुगतान के बिना काम करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। एनजीटी के आदेश में कहा गया है कि आगे की सतर्कता बनाए रखी जाए। एनजीटी ने 30 नवंबर को अनुपालन की स्थिति की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

 यह आदेश उस याचिका के जवाब में था जिसमें 29 सितंबर, 2016 के एनजीटी के आदेश को लागू करने की मांग की गई थी, मूल आवेदन संख्या 51/2016 में मामला वरुण शोकंद बनाम हरियाणा राज्य और अन्य था।

आदेश में फरीदाबाद में प्रदूषणकारी रंगाई उद्योगों को पर्यावरणीय मानदंडों का पालन करने की आवश्यकता पर जोर दिया था। 8 जनवरी के आदेश में ट्रिब्यूनल ने सीपीसीबी, जिला मजिस्ट्रेट, फरीदाबाद और एचएसपीसीबी से मामले में एक तथ्यात्मक और कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था।

एचएसपीसीबी द्वारा 17 अगस्त को रिपोर्ट के माध्यम से ट्रिब्यूनल को सूचित किया गया था कि निरीक्षण के दौरान उल्लंघन पाए गए थे और पर्यावरण क्षतिपूर्ति और अभियोजन को बंद करने, मूल्यांकन और वसूली के माध्यम से आवश्यक कार्रवाई की गई थी।

ट्रिब्यूनल ने उल्लेख किया कि अदालत के निर्देशों में से कुछ पर कार्रवाई करने के अलावा, पर्यावरण नियमों का उल्लंघन रोका नहीं गया।  एचएसपीसीबी पर्यावरणीय कानूनों के उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई करने का अपना वैधानिक दायित्व नहीं निभा रही है।