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वायु प्रदूषण से भारतीय व्यापार को प्रत्येक वर्ष 7 लाख करोड़ का नुकसान : रिपोर्ट

भारत के कामगार अपने स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण के प्रतिकूल प्रभावों के कारण प्रति वर्ष 130 करोड़ (1.3 बिलियन) कार्यदिवसों की छुट्टी लेते हैं जिसके 6 बिलियन अमरीकी डालर के राजस्व का नुकसान होता है।

By Vivek Mishra

On: Tuesday 20 April 2021
 

भारत में वायु प्रदूषण की वजह से प्रत्येक वित्तीय वर्ष में भारतीय व्यापार जगत को करीब 95 बिलियन अमरीकी डालर (7 लाख करोड़) का नुकसान उठाना पड़ता है, जो कि भारत की कुल जीडीपी का करीब 3 प्रतिशत है। यह नुकसान सालाना कर संग्रह के 50% के बराबर है या भारत के स्वास्थ्य बजट का डेढ़ गुना है। डलबर्ग एडवाइजर्स ने यह रिपोर्ट क्लीन एयर फंड और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के सहयोग से तैयार की है। यह रिपोर्ट वायु प्रदूषण के भारी आर्थिक नुकसान के साथ-साथ स्वास्थ्य पर इसके विनाशकारी प्रभावों को सामने रखते हुए वायु प्रदूषण से निपटने के लिए तत्काल सक्रिय होने पर जोर देता है।
 
डलबर्ग का अनुमान है कि भारत के कामगार अपने स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण के प्रतिकूल प्रभावों के कारण प्रति वर्ष 130 करोड़ (1.3 बिलियन) कार्यदिवसों की छुट्टी लेते हैं जिसके 6 बिलियन अमरीकी डालर के राजस्व का नुकसान होता है। वायु प्रदूषण का श्रमिकों के मस्तिष्क और शरीर पर गहरा प्रभाव पड़ता है, जिससे उनकी उत्पादकता कम हो जाती है और इससे व्यापार राजस्व 24 बिलियन अमरीकी डालर तक घटता है।
 
इसका प्रभाव राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। रिपोर्ट में पाया गया है कि वायु की निम्न गुणवत्ता भी उपभोक्ताओं की अपने घरों से बाहर निकलने की इच्छा को कम करती है, जिससे बाज़ार में उपभोक्ताओं की पहुँच घटती है और अंततः सीधे उपभोक्ता से जुड़े व्यवसायों को 22 बिलियन अमरीकी डालर के राजस्व का घाटा होता है।
 
2019 में भारत में वायु प्रदूषण से 17 लाख लोगों की अकाल मृत्यु हुई जो कि उस वर्ष भारत में हुई सभी मौतों का 18 प्रतिशत थी। 2030 तक इस आंकड़े के और बढ़ने की आशंका है, जिससे भारत उन प्रमुख देशों में शामिल हो जायेगा जहाँ समय पूर्व मृत्यु दर से वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान होता है। आर्थिक रूप से देखें तो कार्य-दिवसों के नुकसान के कारण 2019 में भारतीय अर्थव्यवस्था को 44 बिलियन अमरीकी डॉलर का नुकसान हुआ।
 
इस रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि भारत का आईटी क्षेत्र, जो देश के जीडीपी में 9% का योगदान देता है और विदेशी निवेश आकर्षित करने का अहम क्षेत्र है, प्रदूषण के कारण उत्पादकता कम होने के कारण प्रति वर्ष 1।3 बिलियन अमरीकी डालर का नुकसान उठाता है। यदि वर्तमान में अनुमानित दरों पर वायु प्रदूषण में वृद्धि जारी रहती है, तो यह आंकड़ा 2030 तक लगभग दोगुना हो सकता है
 
भारत पिछले दशक में दुनिया का पांचवां सबसे प्रदूषित देश बन गया है और दुनिया के 30 सबसे प्रदूषित शहरों में से 21 भारत में हैं। भारत का मीडीअन ऐज 2019 के 27 वर्ष से बढ़कर 2030 हो जाएगा, इससे वायु प्रदूषण के खतरे बढ़ेंगे क्योंकि वायु प्रदूषण से जुड़ी फेफड़ों संबंधी समस्याएं और फेफड़ों का कैंसर, जो बीमारियां बुजुर्गों को अधिक प्रभावित करती हैं, तेजी से बढ़ने के कारण मृत्यु दर में वृद्धि होगी।
 
रिपोर्ट जारी करते हुए श्री गौरव गुप्ता, पार्टनर, एशिया डायरेक्टर, डलबर्ग ने कहा, “यह रिपोर्ट बताती है कि वायु प्रदूषण व्यवसाय और अर्थव्यवस्था को समग्रता में कैसे प्रभावित करता है। हालांकि सरकार ने इस समस्या के हल के लिए आक्रामक उपाय किए हैं, लेकिन दुनिया भर में वायु प्रदूषण पर जोर इसके सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों के संबंध में दिया जा रहा है। भारतीय व्यापार जगत के लिए अब यह महत्वपूर्ण हो गया है कि वे अपने लाभ और हानि के विवरणों में वायु उत्सर्जन को शामिल करें। स्वच्छ वायु व्यवसायों के फलने-फूलने और 2025 तक भारत के 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की परिकल्पना के सच होने की एक पूर्व शर्त है। इस लक्ष्य को पाने के लिए अग्रणी उद्योगपतियों को स्वच्छ वायु आंदोलन से खुद को और ज्यादा जोड़ना होगा और इसकी पैरवी करनी होगी।"
 
सीआईआई की डिप्टी डायरेक्टर जनरल सुश्री सीमा अरोड़ा ने कहा, “इस रिपोर्ट को तैयार करने में इस्तेमाल किए गए सर्वेक्षण अंतर्दृष्टि, साक्षात्कार और आंकड़ों के विश्लेषण से यह स्पष्ट है कि विशिष्ट व्यवसायों और उनके कर्मचारियों की वायु गुणवत्ता सुधारने में प्रत्यक्ष भूमिका है। हालाँकि इस सिलसिले में बहुत कुछ विचार करने की आवश्यकता है, हमारे निष्कर्षों के अनुसार इस व्यावसायिक संकट के व्यापारिक समाधान में व्यवसाय संचालन और आपूर्ति श्रृंखला का ऐसा कायाकल्प करना जो प्रदूषण को ख़त्म करे, नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकी अपनाना, सीएसआर गतिविधियों के माध्यम से उत्सर्जन कम करना और ज्यादा महत्वाकांक्षी प्रदूषण नीतियों के लिए अभियान चलाना शामिल है। हमारा मानना है कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के बीच सक्रिय और निरंतर सहयोग से, साफ़ नीला आसमान और पहले से ज्यादा सेहतमंद अर्थव्यवस्था जल्द ही भारत की वास्तविकता बन सकती है।”
 
रिपोर्ट के मुताबिक स्वास्थ्य और पर्यावरणीय प्रभाव के साथ-साथ वायु प्रदूषण का भारत की अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ता है, और वायु गुणवत्ता में सुधार से भारत न केवल स्वस्थ होगा, बल्कि समृद्ध भी बनेगा।