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पर्यावरण मुकदमों की डायरी: जानें, यूपी के मुख्य सचिव से क्यों नाराज हुआ एनजीटी

पर्यावरण संबंधी मामलों में अदालतों में क्या हुआ, यहां पढ़ें सार

By Susan Chacko, Dayanidhi

On: Friday 10 July 2020
 
Brick kiln,
फोटो का इस्तेमाल सांकेतिक रूप से किया गया है। फाइल फोटो: विकास पाराशर फोटो का इस्तेमाल सांकेतिक रूप से किया गया है। फाइल फोटो: विकास पाराशर

जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सोनम फेंटसो वांगडी की दो सदस्यीय पीठ ने 9 जुलाई, 2020 को उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव द्वारा राज्य में ईंट भट्टों को संचालित करने की अनुमति देने के लिए पारित आदेश को, व्यर्थ और अदालत के आदेश का उल्लंघन बताया।

यह मामला उत्तर प्रदेश के जिला बागपत, में ईंट भट्टों के अवैध संचालन से संबंधित है, जहां 600 ईंट भट्टे अवैध रूप से चल रहे हैं। आवेदक - विकास सिंह ने कहा कि ईंट भट्टे गांव की बस्तियों से 50 से 500 मीटर पूर्व या पश्चिम में स्थित है, जिसके कारण 40% निवासियों को कैंसर और अस्थमा हो गया है।

एनजीटी ने 15 नवंबर, 2019 को प्रदूषणकारी ईट भट्टों को बंद करने का आदेश दिया था, लेकिन उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव (जीओ. नं. 227 / पी.एस.एम.एस. / 2020 दिनांक 29 मार्च, 2020) ने यूपी के सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किया कि वे राज्य में ईंट भट्टों को संचालित करने की अनुमति दें।

लॉकडाउन की अवधि के दौरान कई ईंट भट्टों को बंद कर दिया गया था क्योंकि अधिकांश मजदूर अपने-अपने क्षेत्रों में वापस चले गए थे, लेकिन यह भी देखा गया कि मुख्य सचिव द्वारा पारित निर्देशों के अनुपालन में लॉकडाउन अवधि के दौरान कुछ ईंट भट्टे चल रहे थे।

एनजीटी ने मुख्य सचिव को फटकार लगाई और कहा कि विशेषज्ञों की रिपोर्ट के अलावा क्षेत्र में क्षमता से अधिक ईंट भट्टों का संचालन करने से वायु प्रदूषण हो रहा है, जो नियमों और कानून का उल्लंघन है।

ट्रिब्यूनल ने यूपी के मुख्य सचिव को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आदेश का पालन नहीं हुआ तो कठोर कार्रवाई की जाएगी।

दिल्ली में गिरते भूजल स्तर को रोकने के उपायों को लेकर सीजीडब्ल्यूए ने एनजीटी को सौंपी रिपोर्ट

केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए) ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में गिरते भूजल स्तर को रोकने के लिए उठाएं गए कदमों की रिपोर्ट सौंपी।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 15 मई, 2020 के अपने आदेश में, सीजीडब्ल्यूए को अनधिकृत ट्यूबवेलों के माध्यम से भूजल निकालने को रोकने के लिए उपयुक्त प्रभावी तंत्र तैयार करने का निर्देश दिया था। जहां कहीं भी ऐसी अवैधता पाई जाने पर, शीघ्र कठोर उपाय किए जाने के लिए निर्देशित किया गया।

सीजीडब्ल्यूए ने ट्रिब्यूनल को बताया कि उसने 25 मई को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के सभी नौ जिलों के उपायुक्तों को निर्देश देते हुए एक आदेश पारित किया था। इस आदेश में सीजीडब्ल्यूए द्वारा 'भूजल पुनर्भरण' (ग्राउंडवाटर रिचार्ज) और 'वर्षा जल के संचयन' की योजना के कार्यान्वयन के लिए निर्देश जारी किए गए हैं। साथ ही दिल्ली में भूजल के दोहन और बिक्री के संबंध में सीजीडब्ल्यूए द्वारा जारी दिशा-निर्देश बिना किसी देरी के लागू किए गए हैं।

उपायुक्त पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के प्रावधानों के तहत उल्लंघन की शिकायत मिलने पर जांच अधिकारियों की पहचान करेंगे और उन्हें उल्लंघन के जांच का कार्य सौंपेंगे। उल्लंघन होने पर, अपराधियों के खिलाफ अदालत में अभियोजन शुरू करेंगे, आपराधिक शिकायत दर्ज करने के लिए स्थानीय पुलिस स्टेशन में उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करेंगे। रिपोर्ट 9 जुलाई को एनजीटी की साइट पर अपलोड की गई थी।

जोधपुर में प्रदूषणकारी औद्योगिक इकाइयों पर कानूनी कार्रवाई

जोधपुर में प्रदूषण फैलाने वाली टेक्सटाइल इकाइयों के खिलाफ पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई पर 8 जुलाई को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, स्पेशल टास्क फोर्स नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) जोधपुर, ने रिपोर्ट सोंपी।

13 वीं प्रगति रिपोर्ट में 27 जून तक की स्थिति को प्रस्तुत किया गया है। इसमें बताया गया कि जोधपुर में प्रदूषण फैलाने और मौजूदा प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले टेक्सटाइल इकाइयों के खिलाफ कुल 43 प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की गई हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इलाके में गहन जांच के बाद कानूनी कार्रवाई के लिए अदालतों में कुल 33 चार्जशीट दाखिल की गई हैं।