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आवासीय क्षेत्र में संचालित न हो प्रदूषण फैलाने वाला पीतल उद्योग

देश के विभिन्न अदालतों में विचाराधीन पर्यावरण से संबंधित मामलों में क्या कुछ हुआ, यहां पढ़ें –  

By Susan Chacko, Dayanidhi

On: Wednesday 26 August 2020
 

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को सौंपी अपनी रिपोर्ट में कहा कि मेसर्स भवानी रोलिंग जॉब वर्क्स, बहेलिया की गली, गणेशगंज शहर, मिर्जापुर में स्थापित करने और संचालित करने के लिए इकाई के पास आवश्यक सहमति नहीं थी।

निरीक्षण के दौरान पाया गया गया कि उद्योग 'तप्पई भट्टी' के लिए ईंधन के रूप में लकड़ी का उपयोग कर रहा था। यहां प्रतिदिन लगभग 600 किलो लकड़ी का उपयोग किया जाता था। उद्योग ने फ्ल्यू गैस उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए तप्पई भट्टी पर वायु प्रदूषण नियंत्रण प्रणाली और स्टैक भी नहीं लगाया था। इसके अलावा, उद्योग मिर्जापुर शहर के घनी आबादी वाले क्षेत्र में स्थापित किया गया है और इसके दक्षिण दिशा में एक स्कूल भी है।

समिति ने सिफारिश की कि उद्योग को यूपीपीसीबी के आदेश का पालन करना चाहिए और जिला प्रशासन, मिर्जापुर को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उद्योग घनी आबादी वाले क्षेत्र में संचालित हो।

कृष्णागिरि जिले में अब अवैध तरीके से नहीं पाली जा रही है अफ्रीकी कैटफ़िश

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को कृष्णागिरि जिले के कलेक्टर द्वारा रिपोर्ट सौंपी गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि तमिलनाडु के कृष्णागिरि जिले में अफ्रीकी कैटफ़िश पालन नहीं किया जा रहा है। यदि भविष्य में इस तरह के मामले सामने आते है तो जिला प्रशासन द्वारा उन्हें नष्ट करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।

एनजीटी में एक याचिका दायर की गई थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि अफ्रीकी कैटफ़िश जिसे 'अफ्रीकी मैगुर' भी कहा जाता है, इसे कृष्णागिरी जिले में अवैध तरीके से पाला जा रहा है। इस गतिविधि को जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के तहत प्रतिबंधित कर दिया गया था। इस गतिविधि में चिकन के कचरे, अंडे के अपशिष्टों को अफ्रीकी कैटफ़िश को खिलाने से दुर्गंध और जल प्रदूषण होता है।

22 अक्टूबर, 2019 के एनजीटी के आदेश के अनुपालन में, जिला प्रशासन ने 5 दिसंबर, 2019 को 9 निरीक्षण टीमों का गठन किया था। जिसमें मत्स्य, पुलिस, ग्रामीण विकास और राजस्व विभागों के अधिकारियों को शामिल किया गया था। टीमों को निर्देश दिया गया था कि निषिद्ध अफ्रीकी कैटफ़िश पालन की पहचान करके इन्हें हाथोंहाथ नष्ट कर दिया जाए।

24 दिसंबर 2019 को कृष्णागिरि जिले के मत्स्य पालन के सहायक निदेशक द्वारा रिपोर्ट के माध्यम से बताया कि 9 निरीक्षण  टीमों ने 7 से 23 दिसंबर, 2019 तक पूरे कृष्णागिरि जिले में सभी मछली के तालाबों का निरीक्षण किया। टीमों ने 259 अफ्रीकी कैटफ़िश पालन केंद्रों को प्रतिबंधित किया और जिले के सभी कैटफ़िश भण्डारों को नष्ट कर दिया गया।

रिपोर्ट 25 अगस्त, 2020 को एनजीटी की साइट पर अपलोड की गई।

अरावली पहाड़ी पर सड़क बनाने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारियों को उचित कार्रवाई करने का दिया निर्देश

सुप्रीम कोर्ट (एससी) ने 25 अगस्त को अरावली पहाड़ी के मामले में उचित कार्रवाई किए जाने और इस पर एक व्यापक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। यह मामला अरावली पहाड़ी से फार्महाउस के लिए एक संपर्क सड़क बनाने का है। सड़क ग्राम बन्धवारी में बनाई जा रही है, जो गुड़गांव-फरीदाबाद सड़क से लगभग 1.5 किलोमीटर दूर है।

हरियाणा राज्य की ओर से पेश हुए एडिशनल एडवोकेट जनरल अनिल ग्रोवर ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया है कि आगे कोई भी नुकसान नहीं होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारियों को इस मुद्दे पर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

एनजीटी ने डीपीसीसी को दिल्ली में चल रहे अवैध स्क्रैपिंग इकाइयों पर 6 जनवरी 2021 से पहले रिपोर्ट प्रस्तुत करने का दिया निर्देश

एनजीटी ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को अवैध तरीके से चल रहे स्क्रैपिंग इकाइयों के आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया। ये ऐसे स्क्रैपिंग इकाइयां हैं जिन्हें पहले ट्रिब्यूनल के आदेश के अनुपालन में सील कर दिया गया था।

दिल्ली में मायापुरी इंडस्ट्रियल एरिया में अवैध रूप से संचालित हो रही स्क्रैपिंग इकाइयों को डी-सील करने के खिलाफ एनजीटी के समक्ष सोसाइटी फॉर अल्टरनेटिव फ्यूल एंड एनवायरनमेंट (एसएएफई) द्वारा एक याचिका दायर की गई।

याचिकाकर्ता ने बताया कि ट्रिब्यूनल ने मायापुरी में वाहन स्क्रैपिंग इकाइयों के अवैध संचालन के खिलाफ सुधारात्मक कार्रवाई के लिए मूल आवेदन 807/2018 में निर्देश जारी किए थे, जिसके कारण कुछ इकाइयों को सील कर दिया गया था।

बाद में उक्त इकाइयों को पुन: खोल (डी-सील) दिया गया है। याचिकाकर्ता ने अन्य साइटों के बारे में बताया जहां अवैध स्क्रैपिंग इकाइयां अभी भी काम कर रही थीं। याचिका में उसी का जियो टैग स्थान दिया गया है, जिसने बताया था कि स्क्रैपिंग इकाइयां निलोठी, मंगोल पुरी, बुरारी और टिकरी सीमा में भी चल रही हैं।

एनजीटी ने डीपीसीसी को कानून के अनुसार सुधारात्मक कार्रवाई करने और 6 जनवरी 2021 से पहले एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।