Sign up for our weekly newsletter

क्या हवा में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड की अधिकता से बढ़ सकती हैं कोरोनावायरस से होने वाली मौतें?

एनओ2 लंबे समय से मनुष्यों में कई प्रकार के श्वसन और हृदय रोगों के लिए जिम्मेदार माना जाता है

By Dayanidhi

On: Wednesday 22 April 2020
 
Photo: Pixabay
Photo: Pixabay Photo: Pixabay

हवा में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड का ऊंचा स्तर कोविड-19 से अधिक संख्या में होने वाली मौतों से जुड़ा हो सकता है। जर्मनी की मार्टिन लूथर यूनिवर्सिटी हाले-विटनबर्ग (एमएलयू) के एक नए अध्ययन के आंकड़ों द्वारा इस धारणा को सिद्ध किया गया है। इसके परिणाम जर्नल साइंस ऑफ टोटल एनवायरनमेंट में प्रकाशित हुए हैं। 

नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (एनओ2) एक वायु प्रदूषक है जो मनुष्य के सांस लेने वाले मार्ग को नुकसान पहुंचाता है। एनओ2 लंबे समय से मनुष्यों में कई प्रकार के श्वसन और हृदय रोगों के लिए जिम्मेदार माना जाता है। एमएलयू के इंस्टीट्यूट ऑफ जियोसाइंसेज के डॉ. यारोन ओगेन कहते हैं कि चूंकि नोवल कोरोनावायरस सांस लेने वाले मार्ग को भी प्रभावित करता है, इसलिए माना जा सकता है कि वायु प्रदूषण और कोविड-19 से होने वाली मौतों की संख्या बढ़ सकती है। हालांकि अब तक इसकी जांच करने के लिए विश्वसनीय डेटा का अभाव रहा है।

अपने नवीनतम अध्ययन में, भूवैज्ञानिक ने डेटा के तीन सेटों को एक साथ जोड़ा है। इसमें यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) प्रहरी 5 पी उपग्रह द्वारा मापा गया क्षेत्रीय नाइट्रोजन डाइऑक्साइड प्रदूषण का स्तर शामिल था, जो लगातार पृथ्वी पर वायु प्रदूषण की निगरानी करता है।

इस डेटा के आधार पर, उन्होंने दुनिया भर में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड प्रदूषण की अधिकता और लंबे समय तक इसका अवलोकन किया। ओगेन ने बताया कि मैंने यूरोप में कोरोना का प्रकोप शुरू होने से पहले इस साल जनवरी और फरवरी में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड के आंकड़े देखे।

उन्होंने अमेरिकी वेदर एजेंसीनोआ’ के आंकड़ों के साथ अपने वायु प्रवाह के आंकड़ों को जोड़कर देखा। उन्होंने बताया कि यदि हवा का बहाव अधिक होगा, तो जमीन के पास प्रदूषक भी अधिक प्रसारित होते हैं।

हालांकि अगर हवा जमीन के पास ठहरने लगती है, तो हवा में प्रदूषक अधिक होते हैं, इस तरह की स्थिति में जब मनुष्यों द्वारा सांस ली जाती है, तो स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ जाती हैं। इन आंकड़ों का उपयोग करते हुए, शोधकर्ता दुनिया भर में वायु प्रदूषण के उच्च स्तर और साथ ही साथ वायु के बहाव की गति के निम्न स्तर वाले हॉटस्पॉट की पहचान करने में सक्षम थे।

इसके बाद उन्होंने कोविड-19 से संबंधित मौतों के आंकड़ों की तुलना की, विशेष रूप से इटली, फ्रांस, स्पेन और जर्मनी के आंकड़ों का विश्लेषण किया। इससे पता चला कि जहां अधिक मौतें हुई थी उन क्षेत्रों में विशेष रूप से नाइट्रोजन डाइऑक्साइड का उच्च स्तर और ऊर्ध्वाधर हवा के अदला-बदली (वर्टीकल एयर एक्सचेंज) की मात्रा भी कम पाई गई थी। जब हम उत्तरी इटली, मैड्रिड और चीन में हुबेई प्रांत के आसपास के क्षेत्र को देखते हैं, इन सभी में कुछ समानताएं है- ये पहाड़ों से घिरे हैं।

ओगेन ने बताया कि इसकी और भी अधिक आशंका है कि इन क्षेत्रों में हवा की गति स्थिर रही हो और प्रदूषण का स्तर भी अधिक रहा हो। उनका विश्लेषण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह व्यक्तिगत क्षेत्रों पर आधारित है और साथ ही अलग-अलग देशों की तुलना भी करता है। ओगेन कहते हैं कि भले ही हम वायु प्रदूषण के लिए एक देश के औसत आंकड़े प्राप्त कर सकते हैं, यह आंकड़े अलग-अलग क्षेत्रों में बहुत भिन्न हो सकते हैं और इसलिए यह एक विश्वसनीय इन्डकेटर नहीं हो सकता है।

भूविज्ञानियों ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में वायु प्रदूषण से वहां रहने वाले लोगों का समग्र स्वास्थ्य खराब हो सकता है, जिससे उन्हें विशेष रूप से वायरस से अत्यधिक खतरा हो सकता है। ओगेन ने कहा कि यह शोध केवल एक शुरुआती संकेत है जो वायु प्रदूषण के स्तर, वायु की गति और कोरोना के प्रकोपों की गंभीरता के बीच एक संबंध होने की ओर इशारा करता है।