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वायु प्रदूषण से भारत पर पड़ रहा है सालाना 1 लाख करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ: स्टडी

एक नए अध्ययन में कहा गया है कि हर साल देश में होने वाली करीब 10 लाख असमय मौतों के लिए भी वायु प्रदूषण जिम्मेवार है

By Lalit Maurya

On: Thursday 13 February 2020
 

देश भर में वायु प्रदूषण की स्थिति किसी से छुपी नहीं है। दिल्ली में तो लोगों का प्रदूषित हवा के चलते लोगों का जीना मुहाल हो गया है। अर्थव्यवस्था पर भी इसका बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर और ग्रीनपीस द्वारा जारी नयी रिपोर्ट के अनुसार इसके चलते हर साल भारतीय अर्थव्यवस्था को 15,000 करोड़ डॉलर (1.05 लाख करोड़ रुपए) का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ रहा है। यदि सकल घरेलु उत्पाद के रूप में देखें तो यह नुकसान कुल जीडीपी के 5.4 फीसदी के बराबर है।

दूसरी ओर हर साल वायु प्रदूषण देश में होने वाली करीब 9 लाख 80 हजार असमय मौतों के लिए जिम्मेवार है। वहीं इसके चलते हर साल 350,000 बच्चे अस्थमा का शिकार हो जाते हैं। वहीं 24 लाख लोगों को हर साल इसके कारण होने वाली सांस की बीमारी के चलते हॉस्पिटल जाना पड़ता है। साथ ही इसके कारण देश में हर साल 49 करोड़ काम के दिनों का नुकसान हो जाता है। 

चीन को भी हो रहा है नुकसान

ऐसा नहीं है कि अकेले भारत को ही वायु प्रदूषण का दंश झेलना पड़ रहा है। दुनिया के अनेक देशों पर भी इसका गंभीर असर पड़ रहा है। जहां इसके चलते चीन की अर्थव्यवस्था को 90,000 करोड़ डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा था। वहीं अमेरिका को होने वाला नुकसान करीब 60,000 करोड़ डॉलर का था। यदि वैश्विक स्तर पर देखें तो जीवाश्म ईंधन से होने वाले इस वायु प्रदूषण से दुनिया भर में हर साल 40 लाख लोग काल के गाल में समां जाते हैं। वहीं वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका असर देखें तो यह करीब 2 लाख 92 हजार करोड़ डॉलर के बराबर होता है।

मूलतः इन सबके लिए दिन प्रतिदिन फॉसिल फ्यूल का बढ़ता उपयोग है। वायु प्रदूषण के 2.5 माइक्रोमीटर से छोटे कण जिन्हें पीएम 2.5 के नाम से जाना जाता है। उसके कारण होने वाली बीमारी के चलते हर साल कामगार अपने कामों पर नहीं जा पाते। जिससे लगभग 180 करोड़ दिनों के बराबर काम का नुकसान हो जाता है।

आंकड़े दिखाते हैं कि वैश्विक स्तर पर फॉसिल फ्यूल के चलते सड़क दुर्घटनाओं की तुलना में तीन गुना अधिक मौतें होती हैं। साथ ही यह मुख्य रूप से निम्न आय वाले देशों में हर साल 5 वर्ष या उससे कम आयु वाले 40,000 बच्चों की मौतों के लिए जिम्मेवार है। बिजली संयंत्रों, कारखानों और पेट्रोल एवं डीजल वाहनों से निकला नाइट्रोजन डाइऑक्साइड हर वर्ष 40 लाख बच्चों को अस्थमा का मरीज बना रहा है। दूसरी ओर जीवाश्म ईंधन से होने वाले प्रदूषण के चलते लगभग 1 करोड़ 60 लाख बच्चे बिगड़ते स्वास्थ्य का सामना कर रहे हैं। हाल ही में छपी रिपोर्ट स्टेट ऑफ़ ग्लोबल एयर 2019 ने भी इस बात की पुष्टि की है।

इस रिपोर्ट के अनुसार अकेले भारत में 12.4 लाख लोग हर वर्ष वायु प्रदूषण शिकार बन जाते हैं । हमें यदि अपने भविष्य को वायु प्रदूषण के खतरे से बचाना है तो इससे  निपटने के लिए ठोस नीति बनाने की जरुरत है, जिससे अपनी आने वाली नस्लों को इस प्रदूषण के जहर से बचाया जा सके । रिपोर्ट के अनुसार स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन प्रणाली के उपयोग से न केवल आर्थिक बोझ को कम किया जा सकता है बल्कि यह स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी लाभदायक है।