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2019 में 41 लाख मौतों के लिए जिम्मेदार थे पीएम 2.5 कण

दुनिया भर में, 2017 में जीवाश्म ईंधन के जलने से दस लाख से अधिक मौतें हुईं। इनमें से आधे से अधिक मौतें कोयले के जलने के कारण हुईं।

By Dayanidhi

On: Thursday 17 June 2021
 
पीएम 2.5 कण जिम्मेदार थे 2019 में 41 लाख मौतों के लिए: अध्ययन

शोधकर्ताओं के एक समूह ने दुनिया भर में वायु प्रदूषण के स्रोतों और स्वास्थ्य पर इसके असर को लेकर जांच की है। इस जांच में दुनिया भर के 200 से अधिक देशों को शामिल किया गया था। उन्होंने पाया कि दुनिया भर में, 2017 में जीवाश्म ईंधन के जलने से दस लाख से अधिक मौतें हुईं। इनमें से आधे से अधिक मौतें कोयले के जलने के कारण हुईं।

प्रदूषण दुनिया भर के लिए एक बहुत बड़ी समस्या है और व्यक्तिगत स्तर पर यह स्वास्थ्य को सबसे अधिक प्रभावित कर रहा है। उपग्रहो द्वारा प्रदूषण का विश्लेषण किया जाता है, लेकिन पीएम2.5 से छोटे कण किसी भी इंसान के फेफड़ों में प्रवेश कर सकते हैं। ये कण उन लोगों को भी बीमार कर सकते हैं जो खाना चूल्हे पर पकाते हैं। 

इंसान के 2.5 माइक्रोन व्यास (पीएम2.5) के सूक्ष्म कणों के लंबे समय तक संपर्क में रहने से स्वास्थ्य को सबसे अधिक खतरा होता है। इसके चलते 2019 में दुनिया भर में लगभग 41 लाख मौतें हुई।

प्रोफेसर रान्डेल मार्टिन ने कहा दुनिया भर में पीएम2.5 मृत्यु दर के खतरे को बढ़ाने के लिए जाना जाता है। हमारा मुख्य उद्देश्य इसके स्रोतों को समझना है। मार्टिन की लैब में एरिन मैकडफी ने आंकड़ों को एक साथ जोड़ने के लिए विभिन्न कम्प्यूटेशनल टूलों का इस्तेमाल किया। उन्होंने वायु प्रदूषण उत्सर्जन का एक नया वैश्विक डेटासेट विकसित किया, जो उस समय के उत्सर्जन का सबसे व्यापक डेटासेट बन गया था।

उत्सर्जन और मॉडलिंग के इस संयोजन के साथ, टीम वायु प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों का पता लगाने में सक्षम थी। इसमें ऊर्जा उत्पादन से लेकर तेल और गैस के जलने से लेकर धूल भरी आंधी तक सब कुछ शामिल है।

इस अध्ययन ने दुनिया भर में पीएम2.5 के संपर्क का आकलन करने के लिए उपग्रहों से रिमोट सेंसिंग के लिए नई तकनीकों का भी इस्तेमाल किया। इसके बाद टीम ने स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर को लेकर 20 से अधिक विभिन्न प्रदूषण स्रोतों में से प्रत्येक के बीच संबंधों को निर्धारित किया। इनके प्रदूषण से होने वाले रोगों को लेकर पीएम2.5 और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर के बारे में जानकारी शामिल की।

मैकडफी ने कहा कि कितनी मौतें विशिष्ट स्रोतों से होने वाले वायु प्रदूषण के संपर्क में आने के कारण होती हैं? आंकड़ों ने शोधकर्ताओं को जिसका उन्हें पहले से ही संदेह था, विशेष रूप से वैश्विक स्तर पर बहुत अधिक प्रभावित किय। हालांकि, इसने दुनिया के विभिन्न हिस्सों में मात्रात्मक जानकारी के बारे में बताया, जिसमें इस बात का पता चला कि विभिन्न क्षेत्रों में गंभीर प्रदूषण के लिए कौन से स्रोत जिम्मेदार हैं।

मैकडफी ने कहा उदाहरण के लिए, कुकस्टोव और चूल्हा जलाना अभी भी पूरे एशिया में कई क्षेत्रों में कणों को वातावण में छोड़ने के लिए जिम्मेदार हैं और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा उत्पादन एक बहुता बड़ा प्रदूषक बना हुआ है।

कणों को बढ़ाने में प्राकृतिक स्रोत भी अहम भूमिका निभाते हैं। उदाहरण के लिए, 2017 में पश्चिम उप-सहारा अफ्रीका में, हवा से उड़ने वाली धूल ने वातावरण में लगभग तीन चौथाई पार्टिकुलेट मैटर को बढ़ाया, जबकि वैश्विक दर केवल 16 प्रतिशत थी। जब इसको कम करने की बात आती है तो इस अध्ययन में उसकी तुलना महत्वपूर्ण होती है।

मैकडफी ने कहा आखिर में जब वायु प्रदूषण को कम करने के लिए रणनीति बनाने की बात आती है तो उस समय राष्ट्रीय स्तर पर प्रदूषण के स्रोतों पर विचार करना महत्वपूर्ण है। यह अध्ययन नेचर कम्युनिकेशंस पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
हालांकि दुनिया भर में प्रदूषण की निगरानी बढ़ रही है, फिर भी कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां इसे रोकने की क्षमता नहीं है। जिनके पास यह निर्धारित करने के लिए आवश्यक उपकरण नहीं हैं, उदाहरण के लिए, स्थानीय यातायात, कृषि पद्धतियों, बनाम जंगल की आग का प्रदूषण में कितना हिस्सा है।

मैकडफी ने कहा अच्छी खबर यह है कि हम उन्हें कुछ शुरुआती जानकारी प्रदान कर सकते हैं जो इन स्थानों पर प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों के बारे में है। अन्यथा उनके पास यह जानकारी आसानी से उपलब्ध नहीं हो सकती है।

इस शोध का एक सबसे अनूठा पहलू यह है कि विभिन्न जगहों के पैमानों के आधार पर प्रदूषण का विश्लेषण करने के लिए एक ही डेटासेट और कार्यप्रणाली का उपयोग किया गया है। मैकडफी ने कहा हम सीधे अधिक से अधिक देशों के बीच परिणामों की तुलना कर सकते हैं। हम उन जगहों पर प्रदूषण के स्रोतों को भी देख सकते हैं जिन्होंने कम करने के उपायों को भी लागू किया है।