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जानें, क्यों कीटों ने अपने पसंदीदा फूलों पर मंडराना बंद किया?

शोधकर्ताओं की एक टीम ने फूलों और परागणकर्ताओं के बीच रासायनिक संचार पर ओजोन वायु प्रदूषण के प्रभाव का अध्ययन किया है

By Dayanidhi

On: Tuesday 08 September 2020
 
Photo: wikimedia commons
Photo: wikimedia commons Photo: wikimedia commons

वायु प्रदूषण केवल लोगों के लिए घातक हो रहा है बल्कि परागणकर्ता भी इसकी चपेट में गए हैं। इसी को लेकर जर्मनी के मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर केमिकल इकोलॉजी और अमेरिका के वर्जीनिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की एक टीम ने फूलों और परागणकर्ताओं के बीच रासायनिक संचार पर ओजोन वायु प्रदूषण के प्रभाव का अध्ययन किया है। उन्होंने दिखाया कि तंबाकू के फूलों पर मंडराने वाले कीट ने अपने पसंदीदा फूलों की खुशबू की ओर आकर्षित होना बंद कर दिया है। क्योंकि खुशबू वायु प्रदूषण के प्रभाव से बदल गई थी।

यह ऑक्सीकरण प्रदूषक इस प्रकार एक पौधे और उसके परागणकर्ता के बीच के संबंध में गड़बड़ी फैलाता है। प्रदूषण उस रिश्ते को जो लाखों वर्षों में विकसित हुआ है, उसमें बाधा डालता है। हालांकि जब मौका मिलता है, तो कीट (हॉक्मोथ्स) जल्दी सीखते हैं, एक अप्रिय प्रदूषित गंध वाले फूलों से भी पोषक रस चूस लते हैं। यह अध्ययन केमिकल इकोलॉजी जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

परागण

परागण एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र सेवा है, जो मुख्य रूप से कीड़ों द्वारा किया जाता है। पौधे फूलों की गंध का उपयोग करके कीड़ों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं, जो कि एक रासायनिक संकेत हैं, यह परागणकर्ताओं के लिए एक सहज पसंद हो सकती है। यह सहजता फूलों और उनके परागणकर्ताओं के बीच सह-विकास संबंध का परिणाम है जो लाखों वर्षों में विकसित हुआ है।

लगभग 20 वर्षों से, वैज्ञानिक समुदाय में 'एन्थ्रोपोसीन' शब्द का उपयोग भूवैज्ञानिक युग का उल्लेख करने के लिए किया गया है। जिसमें मानव जैविक और वायुमंडलीय प्रक्रियाओं में कई बदलावों के लिए जिम्मेदार है। हालांकि कुछ समय पहले तक, पर्यावरण के प्राकृतिक गंधों पर एन्थ्रोपोजेनिक जलवायु परिवर्तन और वायुमंडलीय प्रदूषण के प्रभावों के बारे में बहुत कम जानकारी थी। इन गंधों की मदद से जीवों के बीच रासायनिक संचार होता है।

मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर केमिकल इकोलॉजी और वर्जीनिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की एक टीम ने जांच की है कि मनुष्य द्वारा किया जाने वाला वायु प्रदूषण उनके पसंदीदा फूलों में से पराग कीट के आकर्षण को प्रभावित करता है या नहीं। ओजोन एक ऑक्सीडेंट है, जो एक अत्यधिक प्रतिक्रियाशील रसायन और प्रदूषक है जिसकी वजह से लोगों में श्वसन संबंधी बीमारियां होती हैं। अब ओजोन प्रदूषण को फूलों की गंध को बदलने के तौर पर देखा गया है। इस गंध को फूल अपने परागणकर्ताओं को आकर्षित करने के लिए उत्सर्जित करते हैं।

अध्ययनकर्ता मार्कस नादेन कहते हैं अपने प्रयोगों के लिए, वैज्ञानिकों ने तंबाकू के कीट हॉकमॉथ, मांडुका सेक्स्टा का उपयोग किया। हॉकमॉथ, मंडुका सेक्स्टा हमारे अध्ययन के लिए एकदम सही मॉडल है। हालांकि यह फूल की गंध द्वारा अत्यधिक आकर्षित किया जाता है। यह फूलों का पता लगाने के लिए अपनी दृश्य प्रणाली का भी उपयोग करता है। फूल जो आमतौर पर कीट (हॉकमॉथ) को आकर्षित करते हैं वे अक्सर अपने मिश्रण में विशिष्ट यौगिकों को साझा करते हैं।

शोध टीम ने सबसे पहले फूलों की गंधों की सटीक रचनाओं को निर्धारित किया। इसके लिए गैस की क्रोमैटोग्राफी का उपयोग करके ओजोन सामग्री को बिना बढ़ाए और हर गंध घटक के संबंधित सांद्रता को भी बढ़ाया नहीं गया। ओजोन प्रदूषण द्वारा बदली गई गंध के लिए, शोधकर्ताओं ने ओजोन सांद्रता का उपयोग किया, जिसे तंबाकू के प्राकृतिक उगने वाले स्थान पर, गर्म दिनों में मापा जा सकता है। उन्होंने एक हवा की सुरंग बनाकर पतंगों (हॉकमॉथकी प्रतिक्रियाओं का परीक्षण किया, जिससे पतंग फूल की मूल गंध और ओजोन द्वारा बदली गई फूल की गंध दोनों की जांच कर सके।

नादेन ने कहा कि हमने प्रयोगों के दौरान जो देखा उससे हम हैरान थे। तंबाकू के फूलों की गंध हमेशा आकर्षित करने वाली होती है वह अब पूरी तरह से बढ़े हुए ओजोन स्तरों की उपस्थिति में लुप्त हो गई थी।

तंबाकू के हॉकमॉथ सीखने में सक्षम हैं

यह सवाल उठ रहा था कि क्या वायु प्रदूषण के कारण अब पतंग (हॉकमॉथ) भूखा ही रहेगा, क्या यह कीटों को अपने भोजन के स्रोत को खोजने से रोक देगा। क्या कीड़े यह पता लगाने में सक्षम होंगे कि प्रदूषित फूल की भी रस दे सकते हैं? इस सवाल के जवाब देने के लिए, शोधकर्ताओं ने परीक्षण किया। क्या तंबाकू हॉकमॉथ्स अनाकर्षक गंध को स्वीकार करना सीख सकते हैं। शोधकर्ताओं ने कई अलग-अलग तरीकों का आकलन किया, जिसमें कीट ओजोन प्रदूषण के द्वारा बदले गए पुष्प की गंध के आधार पर फूलों को पहचानना सीख गए थे। 

मंडुका सेक्स्टा की सीखने की क्षमता  

वायु प्रदूषण अभी भी परागण और परागणकर्ताओं के लिए एक गंभीर खतरा पैदा करता है। प्रदूषित वातावरण में अपने मेजबान पौधों को पहचानने वाले कीटों के लिए सीखना महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन हमारे अध्ययन से शेष प्रमुख प्रश्नों में से एक यह है कि क्या परागणकर्ता अपने फूलों के स्थान को ढूंढ पाएंगे। शुरू में जो गंध से पहचानते थे, अब प्रदूषित फूलों की गंध से पहचानना सीखेंगे। क्या अब  परागणकर्ताओं के पास मेजबान फूलों को खोजने में मदद करने के लिए केवल दृश्य संकेत होंगे? एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अन्य परागणकों के पास नई गंधों को सीखने के लिए समान सुविधा नहीं हो सकती है जो मंडुका सेक्स्टा के पास है।

वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के हमारे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए दूरगामी परिणाम हैं। इनके बारे में अभी भी हमें बहुत कम जानकारी है। उदाहरण के लिए, हम अभी भी पौधों और कीटों के बीच रासायनिक संचार पर वायुमंडलीय परिवर्तनों के प्रभाव के बारे में बहुत कम जानते हैं। केवल पौधों की गंध को बदल दिया जाता है, बल्कि नर को आकर्षित करने के लिए सेक्स फेरोमोन मादा कीट का भी उपयोग किया जाता है। वायुमंडलीय परिवर्तनों से फेरोमोन में परिवर्तन होने की संभावना है जो प्रजनन विफलता का कारण बन सकता है। हाल के वर्षों में कीट मृत्यु दर नाटकीय रूप से बढ़ी है और दुनिया भर के शोधकर्ता कारणों की खोज कर रहे हैं।