Sign up for our weekly newsletter

पर्यावरण मुकदमों की डायरी: चीनी मिल के प्रदूषण से संकट में है बच्चों का जीवन

पर्यावरण संबंधी मामलों पर विभिन्न अदालतों में हुई सुनवाई का सार

By Susan Chacko, Dayanidhi

On: Wednesday 24 June 2020
 
Photo: Getty Images

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) और जिला मजिस्ट्रेट, बिजनौर ने अपनी एक रिपोर्ट दर्ज की। रिपोर्ट के अनुसार जिला बिजनौर, उत्तर प्रदेश में मेसर्स धामपुर शुगर मिल्स की डिस्टिलरी यूनिट के बॉयलरों के संचालन से, वहां चल रहे प्रियंका मॉडर्न सीनियर सेकेंडरी स्कूल के छात्रों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। 

समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उद्योग से होने वाले बैगास कणों के उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए, कारखाने ने प्रियंका मॉडर्न स्कूल की ओर एक हरे रंग का जाल लगाया गया था और पानी के छिड़काव के लिए 3 पानी स्प्रे करने वाली गनें भी लगाई गई थीं। निरीक्षण के दौरान, पानी स्प्रे करने वाली गनें भी कारखाने में लगी हुई पाई गई थी।  

समिति को प्रियंका मॉडर्न स्कूल, धामपुर, बिजनौर के छात्रों और उद्योग के आस-पास रहने वाले ग्रामीणों के स्वास्थ्य को लेकर, सीएमओ बिजनौर से 14 जनवरी, 2020 को एक पत्र प्राप्त हुआ था। पत्र के अनुसार, प्रियंका कॉलेज ऑफ प्रोफेशनल एजुकेशन के 75 छात्रों, प्रियंका सीनियर सेकेंडरी स्कूल के 3010 छात्रों, प्रियंका कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च सेंटर के 155 छात्रों और सभी ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया था।

स्टैक निगरानी रिपोर्ट के अनुसार, स्टैक्स के एसपीएम द्वारा निर्धारित मानदंडों के अंदर पाया गया था, लेकिन औद्योगिक परिसरों और प्रियंका मॉडर्न स्कूल के अंदर विभिन्न बिंदुओं पर रिसप्राएबल सस्पेंडेड पार्टिकुलेट मैटर (आरएसपीएम) की मात्रा निर्धारित मानदंडों से अधिक पाई गई। समिति की रिपोर्ट के अनुसार परिवेशी वायु गुणवत्ता में आरएसपीएम की मात्रा की अधिकतम सीमा का मुख्य कारण बैगेज, भारी वाहनों की आवाजाही, उद्योग में फ्लाई ऐश हैंडलिंग और स्कूल के नजदीग राज्य राजमार्ग -49 पर भारी वाहनों के यातायात के कारण था। समिति ने अन्य बातों के साथ-साथ, स्कूल की ओर धूल नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए एक स्थायी दीवार / संरचना का निर्माण करने, पर्याप्त ऊंचाई से धूल को रोकने के लिए स्वचालित पानी के छिड़काव करने वाले फव्वारे लगाने और स्कूल की सीमा के अंदर अधिकतम पेड़ों को लगाने की सिफारिश की।

2-एनजीटी ने जल निकायों की बहाली का निर्देश दिया

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 23 जून, 2020 को उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) को जल निकायों की बहाली के लिए दिशानिर्देश तैयार करने और इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए गांव वालों को भी शामिल करने का निर्देश दिया। अदालत कदौरा शहर, जिला जालौन के मुख्य तालाब (सदर बाजार) नामक एक जल निकाय की बहाली के लिए आवेदन पर सुनवाई कर रही थी।

 

जिला मजिस्ट्रेट, जालौन, उरई और यूपीपीसीबी की कार्रवाई रिपोर्ट में कहा गया है कि कदौरा नगर पंचायत के सीवर को सदर तालाब में डाला जा रहा था, जिसके कारण सदर तालाब की जल गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

एनजीटी ने निर्देश दिया कि मामले पर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जाए। आदेश में कहा गया, जल निकायों की बहाली पर्यावरण की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, पीने के पानी की उपलब्धता, भूजल रिचार्ज करना, वर्षा जल को बचाने को कहा गया।

3-शकूरबस्ती रेलवे स्टेशन पर अवैज्ञानिक तरीके से सीमेंट की लोडिंग और अनलोडिंग पर एनजीटी गठित समिति ने लगाया जुर्माना

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने 22 जून की अपनी रिपोर्ट में दिल्ली के शकूरबस्ती रेलवे स्टेशन पर सीमेंट लोडिंग / अनलोडिंग गतिविधियों के कारण वायु प्रदूषण पर एनजीटी को बताया है कि उत्तर रेलवे ने उचित कदम नहीं उठाए हैं। विशेषज्ञ समिति, (जिसे एनजीटी के आदेशों पर गठित किया गया था) की सिफारिशों को लागू करना- जिसमें प्रदूषण नियंत्रण उपायों को लागू करना और श्रमिकों का स्वास्थ्य परीक्षण करना शामिल था। 

शकूरबस्ती सीमेंट लोडिंग / अनलोडिंग के संचालन में शामिल सीमेंट कंपनियों (एसीसी लिमिटेड, अंबुजा सीमेंट्स, वंडर सीमेंट्स, मंगलम सीमेंट्स, अल्ट्राटेक सीमेंट) में से किसी ने भी सीमेंट की गतिविधि में लगे श्रमिकों के स्वास्थ्य को संरक्षित करने उन्हें शिक्षित करने की संशोधित योजना प्रस्तुत नहीं की। जिसे विशेषज्ञ समिति ने अपनी सिफ़ारिश रिपोर्ट में शामिल किया गया था। इसके अलावा, सीमेंट गतिविधि में शामिल श्रमिकों का स्वास्थ्य परीक्षण (एक्स-रे) का भी कोई रिकॉर्ड नहीं दिखाया गया।

विशेषज्ञ समिति ने पर्यावरण और स्वास्थ्य क्षतिपूर्ति के मुद्दे पर चर्चा की। सुझाव दिया गया कि अंतरिम पर्यावरण मुआवजा आवेदन पत्र भरने की तिथि 27 मई, 2019 से सीपीसीबी द्वारा सत्यापन की तारीख 11 जून, 2020 तक की अवधि के लिए लगाया जा सकता है।

उक्त अवधि के लिए अंतरिम पर्यावरण मुआवजे की गणना रु.71,62,500 और उत्तरी रेलवे और सेंट्रल रेलसाइड वेयरहाउस कंपनी पर 28,65,000 मुआवजा देने को कहा गया। स्वास्थ्य क्षतिपूर्ति के संबंध में, विशेषज्ञ समिति ने सिफारिश की कि इस मामले को श्रम विभाग, दिल्ली सरकार को भेजा जाए।