गंगा प्रदूषण : यूपीपीसीबी ने टैनरीज पर लगाया 3.5 करोड़ जुर्माना, वसूला सिर्फ 95 लाख

यूपीपीसीबी ने जानकारी दी है कि कानपुर में जाजमऊ स्थित 210 टैनरी यूनिट्स से अब तक 95 लाख रुपए वसूले गए हैं और अब तक सिर्फ 34 यूनिट को ही रिकवरी सर्टिफिकेट जारी किया गया है।

By Vivek Mishra

On: Friday 01 July 2022
 
फाइल फोटो: विकास चौधरी
फाइल फोटो: विकास चौधरी फाइल फोटो: विकास चौधरी

 पर्यावरणीय जुर्माना लगाना और फिर न वसूला जाना एक रिवाज बन चुका है। डाउन टू अर्थ ने एक आरटीआई के हवाले से सीपीसीबी के जुर्माना न वसूलने का खुलासा किया था। इसके बाद एनजीटी की एक रिपोर्ट में पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जरिए जुर्माना न वसूलने का मामला भी रिपोर्ट के हवाले से उजागर किया था।

अब अब उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) की भी पोल नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में दाखिल की गई एक रिपोर्ट में खुल रही है।

गंगा प्रदूषण के एमसी मेहता के मामले में उत्तर प्रदेश पर्यावरण विभाग की ओर से दाखिल एक रिपोर्ट में बताया गया है कि समय-समय पर कुल 259 डिफॉल्टर टैनरी यूनिट्स पर कुल 3.58 करोड़ रुपए का जुर्माना प्रदूषण फैलाने वाली टैनरीज पर लगाया गया। हालांकि, इन टैनरीज से अब तक सिर्फ 95.55 लाख रुपए ही वसूला जा सका है।

यह गौर किया गया है कि पर्यावरण को क्षति पहुंचाने वाले कभी समय पर पर्यावरणीय जुर्माना भरने में सक्रियता नहीं दिखाते हैं। हालांकि टैनरीज के लिए यूपी में तो यह शर्त भी जोड़ी गई कि जब तक वह पर्यावरणीय जुर्माना नहीं भर देते हैं तब तक उन्हें कंसेट टू ऑपरेट (सीटीओ) का प्रमाणपत्र नहीं जारी किया जाएगा।

यूपीपीसीबी ने जानकारी दी है कि कानपुर में जाजमऊ स्थित 210 टैनरी यूनिट्स से अब तक 95 लाख रुपए वसूले गए हैं और अब तक सिर्फ 34 यूनिट को ही रिकवरी सर्टिफिकेट जारी किया गया है।

यूपीपीसीबी ने बताया कि वजीदपुर यानी पंपिंग स्टेशन 3 पर 92 यूनिट्स, बुधियाघाट यानी पंपिंग स्टेशन 4 पर 19 टैनरीज, पंपिंग स्टेशन पर 12 टैनरी यूनिट्स के एक्सेस फ्लो को रोकने के लिए कार्रवाई की गई थी। इन सभी टैनरीज के बिजली कनेक्शन को भी 13 दिसंबर, 2021 को काट दिया गया है।

एनजीटी में दाखिल रिपोर्ट में बताया गया है कि सीईटीपी और एसटीपी के संचालकों पर भी 2019 से 2021 के बीच अलग-अलग समय पर 19.5 लाख रुपए का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया गया है। हालांकि, यूपीपीसीबी ने यह छुपाया है कि इस जुर्माने में वसूला कितना गया है। यानी रिकवरी की स्थिति स्पष्ट नहीं की है।  

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