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नदियों पर बढ़ते दबाव और जलवायु परिवर्तन के कारण हो रहा है नुकसान

बाढ़ या सूखे के बार-बार होने और इनकी तीव्रता के संदर्भ में जलवायु परिवर्तन का बहुत बड़ा महत्व है

By Dayanidhi

On: Tuesday 23 June 2020
 
फोटो: विकास चौधरी
फोटो: विकास चौधरी फोटो: विकास चौधरी

इस नए शोध में कहा गया है कि दुनिया की सबसे बड़ी नदी प्रणालियों के साथ रहने वाले लाखों लोगों की आजीविका खतरे में है। लोगों की दैनिक आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक गतिविधि के कारण तनाव बढ़ रहे हैं। इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन के दीर्घकालिक प्रभावों के कारण भी नदी प्रणालियां प्रभावित हो रहीं हैं, जिसका सीधा असर लोगों पर पड़ता है। 

प्रोफेसर स्टीफन डार्बी और प्रोफेसर जिम बेस्ट ने दुनिया की बड़ी नदी प्रणालियों के स्वास्थ्य और लचीलेपन (रिजिल्यन्सी), उनके डेल्टा पर चरम मौसम की घटनाओं के कारण पड़ने वाले प्रभावों, खतरों की समीक्षा की है। जिम बेस्ट अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनोइस उरबाना-शैंपेन में भूविज्ञान और भूगोल के प्रोफेसर है। प्रोफेसर डार्बी यूनिवर्सिटी ऑफ साउथेम्प्टन से जुड़े है। यह शोध वन अर्थ नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

बाढ़ या सूखे के बार-बार होने और इनकी तीव्रता के संदर्भ में जलवायु परिवर्तन का बहुत बड़ा महत्व है। हालांकि, बड़ी नदियों को रेत खनन, प्रदूषण, भूजल का दोहन प्रभावित करते हैं, कई बार इसके नतीजे तत्काल दिखाई देते हैं।

उदाहरण के लिए, टीम ने दक्षिण पूर्व एशिया में मेकांग नदी डेल्टा में बाढ़ के कारणों पर पिछले शोध की समीक्षा की, यह क्षेत्र लगभग 1.8 करोड़ लोगों के लिए धान की खेती के रूप में मदद करता है। इन अध्ययनों से पता चलता है कि डेल्टा के नीचे से भूजल को निकालने के कारण, या इनके पानी में डूबना अब एक आम समस्या है।  क्योंकि क्षेत्र में बांधों के बनने से तलछट (गाद) का पानी के साथ बहना बहुत कम हो गया है। डेल्टा के चैनलों में बड़े पैमाने पर रेत के खनन से गाद समाप्त हो रही है।

बढ़ते बाढ़ के खतरे से तलछट (गाद) की कमी हो रही है साथ ही वैश्विक जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न समुद्र-स्तर की वृद्धि से यह समस्या कहीं अधिक बढ़ गई है। लेकिन जब इन सभी समस्यों को जोड़ दिया जाएं, तो अब एक वास्तविक खतरा सामने दिखता है कि हम अगले 10-20 वर्षों में एक प्रमुख टिपिंग प्वाइंट को पार कर सकते हैं।

पेपर में कहा गया कि राजनीति, दुनिया की प्रमुख नदी प्रणालियों के स्वास्थ्य और रिजिल्यन्सी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

जिम बेस्ट ने कहा, हमने अतीत में नदी प्रणालियों पर राजनीतिक और सामाजिक सुधार के प्रभाव के प्रमाण देखे हैं। दूसरी ओर खाड़ी युद्ध के तनावों से टाइग्रिस-यूफ्रेट्स नदी के बेसिन में नदी के प्रदूषण में वृद्धि हुई है।

शोधकर्ता ने इन मुद्दों के प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर, स्थानीय स्तर पर नदी प्रणालियों की सुरक्षा के लिए कदम उठाने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया हैं।

बेस्ट ने कहा कुछ चीजें हैं जो हम इस मुद्दे की निगरानी के अंत में कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए राष्ट्रों के बीच सहयोग और विश्वास की जरुरत पड़ेगी। हमें जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ इन अधिक लगातार होने वाले छोटे-छोटे तनावों पर ध्यान देना होगा।