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इंजीनियरिंग के छात्रों ने बनाया कम लागत वाला वेंटिलेटर

छात्र इस प्रोटोटाइप का मेडिकल परीक्षण कराएंगे और स्वीकृति मिलते ही बड़े पैमाने पर वेंटिलेटर्स का निर्माण किया जाएगा

By DTE Staff

On: Sunday 26 April 2020
 
आईआईटी, बॉम्बे के छात्रों द्वारा तैयार किए गए वेंटिलेटर का मॉडल। फोटो: पीआईबी
आईआईटी, बॉम्बे के छात्रों द्वारा तैयार किए गए वेंटिलेटर का मॉडल। फोटो: पीआईबी आईआईटी, बॉम्बे के छात्रों द्वारा तैयार किए गए वेंटिलेटर का मॉडल। फोटो: पीआईबी

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टैक्नोलॉजी (आईआईटी) बॉम्बे, एनआईटी श्रीनगर और इस्लामिक यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (आईयूएसटी), अवंतीपोरा, पुलवामा के इंजीनियरिंग छात्रों ने मिलकर कम लागत वाला एक वेंटिलेटर बनाया है। इसकी लागत लगभग 10 हजार रुपए आई है। टीम ने इसको रूहदार वेंटिलेटर नाम दिया है।

पीआईबी (प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो) द्वारा जारी विज्ञप्ति के मुताबिक इस वेंटिलेटर का आइडिया आईआईटी बॉम्बे के इंडस्ट्रियल डिजाइन सेंटर के प्रथम वर्ष के छात्र जुल्कारनैन को उस समय आया, जब वह कोरोनावायरस की वजह से संस्थान बंद होने के बाद अपने गृहनगर कश्मीर हुए थे। वहां उन्हें  मालूम हुआ कि कश्मीर घाटी में केवल 97 वेंटिलेटर हैं। जबकि आवश्यकता इससे कहीं अधिक थी। 

इसलिए जुल्कारनैन ने आईयूएसटी, अवंतीपोरा के अपने दोस्तों पी. एस. शोएब, आसिफ शाह और शाहकार नेहवी और एनआईटी श्रीनगर के माजिद कौल के साथ मिलकर काम किया। आईयूएसटी के डिजाइन इनोवेशन सेंटर (डीआईसी) से सहायता लेते हुए टीम स्थानीय स्तर पर उपलब्‍ध सामग्री का उपयोग करके कम लागत वाले वेंटिलेटर डिजाइन करने में सक्षम रही।

जुल्कारनैन कहते हैं, "टीम के लिए इस प्रोटोटाइप की लागत लगभग 10,000 रुपए रही, लेकिन जब हम बड़े पैमाने पर उत्पादन करेंगे, तो लागत इससे बहुत कम होगी।" उन्होंने कहा कि जहां एक ओर अस्पतालों में उपयोग किए जाने वाले कीमती वेंटिलेटरों का दाम लाखों रुपये होता है, वहीं "रूहदार" जैसे कम कीमत वाले वेंटिलेटर गंभीर रूप से बीमार कोविड-19 रोगी के जीवन को बचाने के लिए आवश्यक पर्याप्त श्वसन सहायता प्रदान कर सकते हैं।"

जुल्कारनैन ने कहा, "टीम अब प्रोटोटाइप का मेडिकल परीक्षण कराएगी। स्वीकृति मिलते ही इसका बड़े पैमाने पर निर्माण किया जाएगा। इसे लघु उद्योग द्वारा निर्माण किए जाने के लिए उत्तरदायी बनाए जाने का प्रयास है। टीम उत्पाद के लिए कोई रॉयल्टी नहीं वसूलेगी।”

जुल्कारनैन ने कहा कि टीम के समक्ष मुख्य समस्या संसाधनों की कमी थी। टीम ने मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, अमेरिका द्वारा विकसित एक डिजाइन सहित अनेक डिजाइनों को आजमाया। टीम ने अपने संसाधन संबंधी अवरोधों को देखते हुए किफायती डिजाइन प्रस्‍तुत किया। उन्होंने कहा कि डिजाइन को उन्नत सॉफ्टवेयर का उपयोग करके बनाया गया है और टीम इसके परिणामों से संतुष्ट है।

आईयूएसटी के पूर्व छात्र और सिमकोर टैक्‍नोलॉजीस के सीईओ आसिफ का कहना है, "हमारा इरादा पारंपरिक वेंटिलेटर के स्‍थान पर कम लागत वाले विकल्प को डिजाइन और विकसित करना था। हमारी टीम बुनियादी मापदंडों जैसे टाइडल वॉल्‍यूम, श्‍वास प्रति मिनट और नि:श्‍वसन : श्वास निःसारण संबंधी अनुपात और इसके संचालन के दौरान लगातार दबाव की निगरानी पर नियंत्रण करने में सक्षम रही है।"

आईयूएसटी के डीआईसी समन्वयक शाहकर अहमद नाहवी ने कहा कि युवाओं की यह टीम जरूरत की इस घड़ी में समाज के लिए उपयोगी योगदान देने की इच्छा से प्रेरित थी। उन्होंने कहा कि वेंटीलेटर इंजीनियरिंग के दृष्टिकोण से कार्यात्मक है, लेकिन इसे चिकित्सा समुदाय द्वारा मंजूरी और सत्यापन की आवश्यकता है।

आईयूएसटी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के माजिद एच. कौल ने कहा कि डीआईसी में उपलब्ध घटकों का उपयोग करके कम लागत वाले किफायती वेंटिलेटर का विकास किया गया। प्रोटोटाइप की सफलता में 3-डी प्रिंटिंग और लेजर-कटिंग तकनीक जैसी केंद्र की सुविधाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह सेंटर भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय की एक पहल है।