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फसलों की उपज में हो सकती है 50 फीसदी अधिक वृद्धि: अध्ययन

आरएनए में बदलाव किए गए धान के पौधों में उपज बढ़ने के साथ-साथ बेहतर प्रकाश संश्लेषण और सूखे को सहन करने की क्षमता देखी गई।

By Dayanidhi

On: Friday 23 July 2021
 
आरएनए में बदलाव कर फसलों की उपज में हो सकती है 50 फीसदी अधिक वृद्धि: अध्ययन
फोटो: विकिमीडिया कॉमन्स, धान का खेत फोटो: विकिमीडिया कॉमन्स, धान का खेत

वैज्ञानिकों की एक टीम ने इस बात का खुलासा किया है कि पौधों के आरएनए में बदलाव करके अधिक उपज पैदा की जा सकती है। साथ ही फसलों के सूखे को सहने की क्षमता में भी वृद्धि हो सकती है। यह शोध शिकागो विश्वविद्यालय, पेकिंग विश्वविद्यालय और गुइजहौ विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने मिलकर किया है।    

वैज्ञानिकों ने शुरुआती परीक्षणों में, धान और आलू दोनों के पौधों में एफटीओ नामक प्रोटीन के लिए जीन एन्कोडिंग को जोड़ा। जहां क्षेत्र में किए गए परीक्षणों में उनकी उपज में 50 फीसदी की वृद्धि देखी गई। बताया गया कि पौधे काफी बड़े हो गए थे, उनकी जड़ प्रणाली लंबी हो गई थी। यह लंबी जड़ प्रणाली सूखे के तनाव को सहन करने में सक्षम थे। विश्लेषण से यह भी पता चला कि पौधों में प्रकाश संश्लेषण की दर में वृद्धि हुई थी।    

शिकागो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर चुआन हे ने कहा परिवर्तन वास्तव में नाटकीय है। उन्होंने कहा यह लगभग हर प्रकार के पौधे के साथ काम करता है जिसे हमने अब तक आजमाया है और यह एक बहुत सरल बदलाव है। शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि यह जलवायु परिवर्तन और दुनिया भर में फसल प्रणालियों पर आने वाले अन्य दबावों का सामना करेंगे।

प्रोफेसर जॉन टी. विल्सन ने कहा यह वास्तव में बढ़ते तापमान के दौर में पारिस्थितिकी तंत्र में संभावित रूप से सुधार करने के की संभावना को अग्रसर करता है। हम कई चीजों के लिए पौधों पर भरोसा करते हैं जिनमें लकड़ी, भोजन, दवा से लेकर फूलों और तेल तक सब कुछ शामिल है। यह संभावित रूप से सामग्री को बढ़ाने का एक तरीका प्रदान करता है जो हम अधिकांश पौधों से प्राप्त किया जा सकता है।

दशकों से वैज्ञानिक तेजी से अस्थिर होती जलवायु और बढ़ती वैश्विक आबादी के सामने फसल की उपज को बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं। लेकिन ऐसी प्रक्रियाएं आमतौर पर जटिल होती हैं और अक्सर इसके परिणामस्वरूप केवल कुछ ही चीजों में परिवर्तन होते हैं। लेकिन इस खोज का तरीका काफी अलग है।

हम में से बहुत से लोग स्कूल में आरएनए के बारे में पढ़ते हैं, जहां हमें सिखाया गया था कि आरएनए के अणु डीएनए को पढ़ते हैं या इससे पहचाने जाते हैं, फिर कार्यों को पूरा करने के लिए प्रोटीन बनाता है। लेकिन 2011 में, हेज लैब ने स्तनधारियों में जीन को एक अलग तरीके से व्यक्त करने वाली खोज कर करके अनुसंधान का एक नया क्षेत्र खोला।

यह पता चला है कि आरएनए केवल डीएनए ब्लूप्रिंट को ही नहीं पढ़ता है और इसे आंख बंद करके पूरा करता है। कोशिका स्वयं यह भी नियंत्रित कर सकती है कि ब्लूप्रिंट के कौन से हिस्से उजागर होंगे। यह आरएनए पर रासायनिक निशान लगाकर यह निर्धारित करता है कि कौन से प्रोटीन, कितनी मात्रा में बनते हैं।  

वैज्ञानिकों और उनके सहयोगियों ने तुरंत महसूस किया कि जीव विज्ञान के लिए इसका बड़ा महत्व था। तब से, उनकी टीम और दुनिया भर के अन्य लोग प्रक्रिया संबंधी हमारी समझ को समझने की कोशिश कर रहे हैं। यह जानवरों, पौधों और विभिन्न मानव रोगों को किस तरह प्रभावित करता है। उदाहरण के लिए, वह एक बायोटेक कंपनी के सह-संस्थापक हैं जो अब आरएनए संशोधन प्रोटीन को निशाना बना कर नई कैंसर रोधी दवाएं विकसित कर रहे हैं।

उन्होंने एफटीओ नामक प्रोटीन पर गौर किया, पहला जाना पहचाना प्रोटीन जो आरएनए पर रासायनिक निशान मिटा देता है, जिसे जिया ने यूचिकागो में हेज ग्रुप में पोस्ट डॉक्टरल के शोध के दौरान पाया। वैज्ञानिकों को पता था कि यह मनुष्यों और अन्य जानवरों में कोशिका वृद्धि को प्रभावित करने के लिए आरएनए पर काम करता है। इसलिए उन्होंने चावल के पौधों में इसके जीन डालने की कोशिश की और फिर पौधों में भारी बदलाव देखा गया। यह अध्ययन नेचर बायोटेक्नोलॉजी में प्रकाशित हुआ है।

प्रयोगशाला की परिस्थितियों में देखा गया कि धान के पौधों ने तीन गुना अधिक धान की उपज की। जब उन्होंने इसे वास्तविक क्षेत्र परीक्षणों में आजमाया, तो पौधों में 50 फीसदी अधिक द्रव्यमान और 50 फीसदी अधिक धान उत्पन्न हुए। वे लंबी जड़ें उगाते हैं, अधिक कुशलता से प्रकाश संश्लेषण करते हैं और सूखे से तनाव का बेहतर ढंग से सहन कर सकते हैं।  

वैज्ञानिकों ने आलू के पौधों के साथ प्रयोगों को दोहराया, जो पूरी तरह से अलग परिवार का हिस्सा हैं, परिणाम वही थे। वैज्ञानिकों को यह समझने में अधिक समय लगा कि यह सब कैसे हो रहा है। आगे के प्रयोगों से पता चला कि एफटीओ ने पौधों के विकास की शुरुआत में ही काम करना शुरू कर दिया, जिससे उसके द्वारा उत्पादित बायोमास की कुल मात्रा में वृद्धि हुई।

वैज्ञानिकों का मानना है कि एफटीओ एम6ए नामक एक प्रक्रिया को नियंत्रित करता है, जो आरएनए का एक प्रमुख संशोधन है। इस परिदृश्य में, एफटीओ कुछ संकेतों को हटाने के लिए एम6ए आरएनए को मिटाकर काम करता है जो पौधों को धीमा और विकास को कम करने के लिए जाने जाते हैं। उदाहरण के लिए बहुत सारी लाल बत्ती वाली सड़क की कल्पना करें, यदि वैज्ञानिक लाल बत्ती को ढक दें और हरी बत्ती को जला छोड़ दें, तो अधिक से अधिक कारें सड़क पर चल सकती हैं। कुल मिलाकर, पौधों में किए गए बदलाव ने नियंत्रण वाले पौधों की तुलना में काफी अधिक आरएनए का उत्पादन किया।   

वैज्ञानिकों ने कहा उनका अगला कदम यह पता लगाना होगा कि पौधों के मौजूदा आनुवंशिकी का उपयोग करके इसे कैसे किया जा सकता है।