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पैदा होंगे बड़े व पौष्टिक पौधे, वैज्ञानिकों ने खोजा नया प्रोटीन

अमेरिका की मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसे प्रोटीन की पहचान की है, जो इस तरह के पौधों को उगाने में मदद कर सकता है, जो आकार में बड़े होंगे तथा जिनमें पोषण की मात्रा भी अधिक होगी।

By Dayanidhi

On: Tuesday 24 December 2019
 

अब हम ऐसे पौधों को उगा सकते हैं जो आकार में बड़े होंगे तथा जिनमें पोषण की मात्रा भी अधिक होगी। अमेरिका की मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसे प्रोटीन की पहचान की है, जो इस तरह के पौधों को उगाने में मदद कर सकता है। चाहे मानव शरीर हो या पौधे इन सब में प्रोटीन सबसे अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रोटीन विकास को बढ़ावा देते हैं, शरीर के ऊतकों की मरम्मत करते है तथा मांसपेशियों का निर्माण करते हैं। यदि प्रोटीनशब्द” हैं, तो अमीनो एसिडअक्षर” हैं। हमारा शरीर विभिन्न प्रोटीनों के उत्पादन के लिए लगभग 20 अमीनो एसिड का उपयोग करता है।

हमारे शरीर में कुछ अमीनो एसिड का उत्पादन होता है। लेकिन 9 ऐसे आवश्यक अमीनो एसिड हैं जो हम और अन्य जानवर नहीं बना सकते हैं। हम इसे मीट, डेयरी और अंततः पौधों जैसे खाद्य पदार्थों के माध्यम से प्राप्त करते हैं। दशकों से, वैज्ञानिक उत्पादन प्रणालियों में सुधार करने के लिए फसलों में अमीनो एसिड को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इससे फसल बीमार हो जाती है। वैज्ञानिक इस उलझन में हैं कि पौधे इन अमीनो एसिड की कमी से ग्रस्त क्यों हैं।

नए अध्ययन से पता चला है कि अधिक पौष्टिक फसलों को पैदा करने में रेपामाइसिन या टीओआर प्रोटीन की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह शोध ईलाइफ नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। फेडेरिका ब्रैंडज़ी लैब के पेंगफेई काओ ने कहा टीओआर प्रोटीन पौधों की कोशिकाओं में चयापचय (मेटाबोलिज्म) की प्रक्रिया को संचालित करता है। यह पोषक तत्वों की उपलब्धता, ऊर्जा के स्तर, वृद्धि के संकेतों का पता लगाता है। टीओआर प्रोटीन इस जानकारी का उपयोग कोशिका वृद्धि और चयापचय कार्यों को नियंत्रित करने के लिए भी करता है।

जब टीओआर पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्वों की अनुभूति करता है, तो यह विकास को बढ़ावा देता है। टीओआर कई बायोसिंथेटिक प्रक्रियाओं और कोशिकओं की संरचनाओं को नियंत्रित करने में इतना शक्तिशाली है, कि अगर यह अच्छी तरह से नियंत्रित नहीं है तो यह समस्या पैदा कर सकता है। टीओआर तीन अमीनो एसिड के नमूनों से पोषक तत्वों की उपलब्धता का पता लगाता है। यदि आप पौधे को इनमें से बहुत कुछ देते हैं, तो टीओआर मानता है कि पोषक तत्व भरपूर मात्रा में हैं,  तो यह अत्यधिक सक्रिय हो जाते हैं। वास्तविकता यह है कि, पोषक तत्वों की उपलब्धता पर्याप्त नहीं होती है।

इस तरह के अति सक्रिय टीओआर कोशिकओं की संरचना को बदल सकता है। टीओआर का एक अन्य कार्य थोड़ा सेलुलर तंतुओं के साथ जुड़ना है, जिसे एक्टिन कहा जाता है। काओ ने कहा, फसलें अपनी कोशिकाओं के अंदर छोटी संरचनाओं पर दुष्प्रभाव के कारण बीमार पड़ती हैं।

एक्टिन फिलामेंट्स कोशिका के 'कंकाल' का निर्माण करते हैं जो कोशिका के एंडोमेम्ब्रेन सिस्टम को बढ़ाता है। काओ ने कहा बाद में कोशिकओं के कई ब्लॉक्स बनाते हैं। ये तंतु कोशिका के आकार को निर्धारित करने में भी मदद करते हैं। पौधों में एक अत्यधिक सक्रिय टीओआर उच्च प्रोटीन उत्पादन और बड़े आकार, पौष्टिक, और अधिक पैदावार करने में सक्षम है।