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एंटीबायोटिक प्रतिरोध का मुकाबला करने के लिए वैज्ञानिकों ने खोजा नया तरीका  

बैक्टीरिया को एंटीबायोटिक दवाओं, रोगाणुनाशको या इम्यून सिस्टम द्वारा आसानी से मारा जा सकता है

By Dayanidhi

On: Wednesday 15 January 2020
 
Photo: creative commons
Photo: creative commons Photo: creative commons

बेल्जियम के केयू ल्यूवेन के बायोसाइंस इंजीनियरों ने एक नया जीवाणुरोधी तरीका विकसित किया है। यह बैक्टीरिया के प्रभाव को रोककर कमजोर करता है। पारंपरिक एंटीबायोटिक्स किसी विशेष बैक्टीरिया के प्रभाव को समाप्त या कम कर सकते हैं। और इन बैक्टीरिया पर एंटीबायोटिक दवाओं का असर समाप्त हो जाता है। ये विकसित होकर अधिक ताकतवर हो जाते हैं। इसलिए एंटीबायोटिक दवाओं के अधिक उपयोग से अधिकतर बैक्टीरिया एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो जाते हैं। यह अध्ययन नेचर कम्युनिकेशन्स पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

गौरतलब है कि बैक्टीरिया समूह में रहते हैं, वे एक सुरक्षात्मक परत स्लाइम या बायोफिल्म बना सकते हैं, जो उनके सभी जीवाणु समूह को कवर करता है। उदाहरण के लिए दांतों पर बैक्टीरिया का एक रंगहीन और चिपचिपा बायोफिल्म जमा हो जाता है। बायोफिल्म अक्सर बैक्टीरिया के संक्रमण के स्रोत होते हैं। 

शोधकर्ताओं ने दिखाया कि साल्मोनेला बैक्टीरिया का चिपचिपा पदार्थ (स्लाइम) के उत्पादन को रोककर बैक्टीरिया समूह को कमजोर किया जा सकता है। उन्होंने बैक्टीरिया समूह को कमजोर करने के लिए, केयू लेवेन द्वारा विकसित एक रासायनिक जीवाणुरोधी पदार्थ का इस्तेमाल किया।

माइका लैब के प्रोफेसर स्टीनैकर्स और प्रमुख अध्ययनकर्ता ने कहा कि बैक्टीरिया को उनकी सुरक्षात्मक स्लाइम की परत के बिना, मशीन से धोया जा सकता है। बैक्टीरिया को एंटीबायोटिक दवाओं, रोगाणुनाशको या इम्यून सिस्टम द्वारा आसानी से मारा जा सकता है।

वैज्ञानिकों ने प्रयोग के द्वारा पुराने एंटीबायोटिक दवाओं के साथ नए पदार्थ के जीवाणु प्रतिरोध के विकास की तुलना की। इन प्रयोगों को यह देखने के लिए किया जाता है कि सूक्ष्मजीव किस तरह अपने आप को एक विशेष परिस्थिति के अनुकूल बनाते हैं। स्टैनैकर ने बताया कि उन्होंने प्रयोग के दौरान देखा कि बैक्टीरिया एक समूह के रूप में हमारे जीवाणुरोधी पदार्थ के लिए प्रतिरोधी नहीं बने, जबकि एंटीबायोटिक दवाओं के लिए प्रतिरोधी बन गए। इसके अलावा, हमने उन जीवाणुओं को दिखाया, जो नए जीवाणुरोधी पदार्थ के प्रतिरोधी थे, और जो गैर-प्रतिरोधियों से अलग हो गए थे।

एक प्रतिरोधी जीवाणु स्लाइम का उत्पादन करने और समूह में गैर-प्रतिरोधी बैक्टीरिया के साथ उसे साझा करने में सक्षम होता है। हालांकि प्रतिरोधी जीवाणु बिना ऊर्जा के काम नहीं कर पाते, जबकि गैर-प्रतिरोधी बैक्टीरिया ऊर्जा के बिना काम कर सकते हैं। नतीजतन, गैर-प्रतिरोधी बैक्टीरिया प्रतिरोधी की तुलना में तेजी से बढ़ सकते हैं, जिससे कि प्रतिरोधी बैक्टीरिया की तुलना में उनकी हिस्सेदारी बढ़ जाती है। पारंपरिक एंटीबायोटिक दवाओं के विपरीत, इस पदार्थ को इसलिए चुना गया क्योंकि यह प्रतिरोध के खिलाफ है। रोगाणुरोधी उपचार जो बैक्टीरिया को एक साथ काम करने से रोकते हैं, जिससे एंटीबायोटिक प्रतिरोध की वर्तमान समस्या का एक व्यावहारिक समाधान हो सकता है।

स्टीनैकर बताते हैं कि, हमारा उद्देश्य इन नए रोगाणुरोधकों (ऐन्टीमाइक्रोबीअल) को क्लिनकल प्रैक्टिस में शामिल करना है। उन्हें एक निवारक दवा के रूप में संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इस पदार्थ का उपयोग एंटीबायोटिक दवाओं के साथ भी किया जा सकता है।