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वैज्ञानिकों ने बनाया डीएनए बायोसेंसर, पहले चरण में लग जाएगा कैंसर का पता

यह नया सेंसर कैंसर और आनुवांशिक रोगों के शुरुआती चरण का पता लगाने के लिए डीएनए-आधारित जीन का पता लगा सकता है

By Dayanidhi

On: Monday 13 April 2020
 
Cancer cases are on the rise in many parts of the continent. CI concept: Shutterstock / The Conversation

 

शुरूआती चरण में किसी भी रोग का पता लगाना सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक होती है। अब जैव रसायनविद और सामग्री वैज्ञानिक इस चुनौती को हल करने की कोशिश कर रहे हैं। मिसौरी यूनिवर्सिटी ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (मिसौरी एसएंडटी) के शोधकर्ताओं ने बायोमेडिकल डायग्नोस्टिक्स में नैनोटेक्नोलॉजी का उपयोग किया है, यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसे नैनोडायग्नोस्टिक्स कहा जाता है। इसकी मदद से एक नया अल्ट्रासोनिक डीएनए बायोसेंसर बनाया है। यह नया सेंसर कैंसर और आनुवांशिक रोगों के शुरुआती चरण का पता लगाने के लिए डीएनए-आधारित जीन का पता लगा सकता है। साथ ही उनके उपचार करने में बेहतर तरीके से मदद कर सकता है।

एक बुनियादी इलेक्ट्रोकेमिकल बायोसेंसर में एक जैविक पहचान तत्व, एक सिग्नल कनवर्टर और एक प्रोसेसर होता है। ये बायोसेंसर जैविक पदार्थों, जैसे न्यूक्लिक एसिड (डीएनए और आरएनए), प्रोटीन, एंटीबॉडी, एंटीजन और ग्लूकोज जैसे अन्य जैविक तत्त्वों के बारे में जानकारी का पता लगाते हैं, और उन्हें रिकॉर्ड करते हैं। यह अध्ययन एनालिटिकल केमिस्ट्री नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

मिसौरी यूनिवर्सिटी ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (मिसौरी एसएंडटी) में रसायन विज्ञान के सहायक प्रोफेसर और प्रमुख अध्ययनकर्ता डॉ. रिशेंग वांग कहते हैं कि नैनोमटेरियल्स से बने बायोसेंसर पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक तेजी से काम करते हैं। 

शोधकर्ताओं ने कार्बन नैनोट्यूब और सोने के नैनोकणों से नया बायोसेंसर बनाया है, जो इसे 3-डी रेडियल आकार देता है। वांग कहते हैं कि बायोसेंसर में एक अनुठे विद्युत रासायनिक प्रतिक्रिया होती है जिससे यह काम करने के लिए सक्रिय होता है।

मिसौरी एसएंडटी में रसायन विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. वेन्यान लियू कहते हैं कि कार्बन नैनोट्यूब और सोने के नैनोकणों से बना यह बायोसेंसर बहुत कम न्यूक्लिक एसिड का भी पता लगा सकता है। यह एक समान डीएनए और अलग-अलग डीएनए की पहचान कर सकता है। इस प्रकार के नैनोडायग्नॉस्टिक प्रणाली चिकित्सा के लिए महत्वपूर्ण है।

शोधकर्ताओं के पिछले दो वर्षों के शोध ने कैंसर से लड़ने वाली दवा के लिए डीएनए-आधारित ओरिगेमी नैनोस्ट्रक्चर विकसित किया है। यह कैंसर और अन्य बीमारियों के शुरुआती जांच के लिए सूक्ष्मतम जीन के रूप में उपयोग के लिए माइक्रो-आरएनए की पहचान करता है।