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स्वस्थ और रोगग्रस्त त्वचा और अंगों के बीच अंतर कर सकती है यह तकनीक

सिस्टमिक स्क्लेरोसिस से ग्रसित रोगियों की प्रारंभिक जांच महत्वपूर्ण है, लेकिन अक्सर इनकी पहचान नहीं हो पाती है। अब यह नई तकनीक इस बीमारी से पीछा छुड़ाने में अहम भूमिका निभाएगी।

By Dayanidhi

On: Wednesday 07 April 2021
 
This technique can differentiate between fast, healthy and diseased skin, organs
Photo : Wikimedia Commons, Systemic sclerosis finger Photo : Wikimedia Commons, Systemic sclerosis finger

ह्यूस्टन विश्वविद्यालय में बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग की संस्थापक एक ऐसी तकनीक के बारे में बता रही हैं जो स्वस्थ और रोगग्रस्त त्वचा और आंतरिक अंगों की जांच कर स्वप्रतिरक्षी सिस्टमिक स्क्लेरोसिस (एसएससी) बीमारी के शीघ्र उपचार में मदद करती है।

सिस्टमिक स्क्लेरोसिस (एसएससी) एक चिकित्सा स्थिति है जिसमें शरीर के अंदर का एक हिस्सा मोटा, कठोर हो जाता है, जबकि ऐसा आमतौर पर चोट लगने के बाद होता है। इस तकनीक का उपयोग एक लैपटॉप कंप्यूटर से किया जा सकता है। यह तकनीक स्वस्थ त्वचा और सिस्टमिक स्क्लेरोसिस से ग्रसित, रोगग्रस्त त्वचा की छवियों के बीच तुरंत अंतर कर सकती है।

बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर जॉन एस ने बताया कि यह हमारा प्रारंभिक अध्ययन है जो नेटवर्क डिज़ाइन के तहत काफी प्रभावशाली तरीके से काम करता है। यह शोध जर्नल ऑफ़ इंजीनियरिंग इन मेडिसिन एंड बायोलॉजी में प्रकाशित हुआ है।

शोधकर्ताओं का मानना है कि नेटवर्क आर्किटेक्चर तकनीक को आसानी से रोगों की जांच करने में लागू किया जा सकता है, जो सिस्टमिक स्क्लेरोसिस (एसएससी) के लिए एक सरल, सस्ती और सटीक स्क्रीनिंग उपकरण प्रदान करता है।

ऐसे रोगी जो सिस्टमिक स्क्लेरोसिस से ग्रसित है, उनकी प्रारंभिक जांच महत्वपूर्ण है, लेकिन अक्सर इनकी पहचान नहीं हो पाती है। कई अध्ययनों से पता चला है कि बीमारी के शुरुआती चरण में ही इसके काफी अंगों तक फैलने की आशंका होती है, लेकिन विशेषज्ञ केंद्रों पर भी चिकित्सकों के लिए रोग किस हद तक फैल रहा है उसका निदान और सही तरीके से निर्धारण करपाना कठिन होता है, जिसके परिणामस्वरूप इलाज और इसके प्रबंधन में देरी होती है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का उपयोग कर एक गहन अध्ययन एल्गोरिदम को कृत्रिम तंत्रिका नेटवर्क में लगा दिया जाता है जो अपने आप समझदारी से निर्णय ले सकता है। सीखने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए, नया नेटवर्क मोबाइलनेटभी2 के मापदंडों का उपयोग करके इसे प्रशिक्षित किया गया था, एक मोबाइल दृष्टि (विजन) एप्लिकेशन, इसे 1.4 लाख छवियों के साथ इमेजनेट डेटासेट पर पहले से ही प्रशिक्षित किया गया है।

आकय ने कहा कि छवियों को स्कैन करके, नेटवर्क मौजूदा छवियों से सीखता है और यह तय करता है कि कौन सी नई छवि सामान्य है या बीमारी के शुरुआती चरण या बीमारी कितनी फैली हुई है, इस बारे में पता लगाता है।

कई गहन अध्ययन (डीप लर्निंग) नेटवर्कों में, संवादी तंत्रिका (कन्वेंशनल न्यूरल) नेटवर्क (सीएनएन) का इस्तेमाल आमतौर पर इंजीनियरिंग, मेडिसिन और बायोलॉजी में किया जाता है, लेकिन उपलब्ध प्रशिक्षण सेट और नेटवर्क के आकार के कारण बायोमेडिकल एप्लिकेशन में उनकी सफलता सीमित है।

इन कठिनाइयों को दूर करने के लिए, आकय और साथी यासमीन ने यूनेट को परतों के साथ जोड़ा जो कि एक संशोधित संवादी तंत्रिका (कन्वेंशनल न्यूरल) नेटवर्क (सीएनएन) है और उन्होंने इसके बाद एक मोबाइल प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित किया। परिणामों से पता चला कि प्रस्तावित गहन तरीके से सीखने के आर्किटेक्चर सिस्टमिक स्क्लेरोसिस (एसएससी) छवियों की अलग-अलग पहचान करने के लिए सीएनएन से बेहतर है।

बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के यूएच अनुदेशक सहयोगी प्रोफेसर यास्मीन ने कहा एक बार ठीक तरीके से व्यवस्थित करने के बाद, नेटवर्क प्रशिक्षण छवियों की 100 फीसदी सटीकता, छवियों के सत्यापन के मामले में इसकी सटीकता 96.8 फीसदी है, और छवियों के परीक्षण के मामले में यह 95.2 फीसदी तक पहुंच गया है।