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बढ़ रहे हैं गर्मी व उमस भरे दिन, 2100 तक प्रभावित हो सकते हैं 1.2 अरब लोग

ग्लोबल वार्मिंग की वजह से गर्म व उमस के दिनों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है

By Dayanidhi

On: Monday 16 March 2020
 

अमेरिका के रटगर्स विश्वविद्यालय के अध्ययन के अनुसार, यदि वर्तमान ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन ऐसे ही चलता रहा तो अत्यधिक गर्मी और उमस से होने वाले तनाव के कारण सालाना सन 2100 तक 1.2 अरब लोग प्रभावित होंगे। यह शोध एनवायरनमेंटल रिसर्च लेटर्स नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।

बढ़ता वैश्विक तापमान गर्मी से होने वाले तनाव में वृद्धि कर रहा हैं, जो मानव स्वास्थ्य, कृषि, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है। अभी तक गर्मी से होने वाले तनाव पर अधिकांश जलवायु अध्ययनों ने चरम गर्मी (एक्सट्रीम हीट) पर ध्यान केंद्रित किया है, लेकिन एक अन्य प्रमुख कारण उमस की भूमिका पर विचार नहीं किया गया है।

रटगर्स इंस्टिट्यूट ऑफ़ अर्थ के डायरेक्टर और अध्ययनकर्ता रॉबर्ट . कोप्प ने कहा कि जब हम एक गर्म ग्रह के खतरों को देखते हैं, तो हमें गर्मी और उमस को एक साथ जोड़ कर देखना चाहिए तथा इनकी चरम सीमाओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

मैसाचुसेट्स विश्वविद्यालय के प्रमुख अध्ययनकर्ता डाएवी ली ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग गर्म, उमस के दिनों की संख्या में लगातार वृद्धि कर रहा है। उदाहरण के लिए न्यूयॉर्क सिटी में एक विशेष वर्ष में सबसे गर्म व सबसे उमस वाले दिन पहले से लगभग 11 गुना अधिक बार होते हैं।

पसीने के माध्यम से शरीर का ठीक से ठंडा हो पाने की वजह से गर्मी से तनाव (हीट स्ट्रेस) होता है। इससे शरीर का तापमान तेजी से बढ़ सकता है और उच्च तापमान मस्तिष्क और अन्य महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है। हीट स्ट्रेस, गर्मी से ऐंठन से लेकर थकावट ये सभी गर्म स्थितियों में होता है। रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र के अनुसार, हीट स्ट्रोक, सबसे गंभीर गर्मी से संबंधित बीमारी है, आपातकालीन उपचार मिलने पर स्थायी विकलांगता हो सकती है या जान भी जा सकती है।

इस अध्ययन में देखा गया कि किस तरह गर्म हो रही पृथ्वी पर गर्मी और उमस दोनों चरम सीमाओं पर पहुंच रहे हैं। इन घटनाओं पर आंकड़े प्राप्त करने के लिए 40 जलवायु सिमुलेशन का उपयोग किया गया है। अध्ययन में गर्मी से होने वाले तनाव की माप पर ध्यान केंद्रित किया गया है जो तापमान, उमस और अन्य पर्यावरणीय कारकों के लिए जिम्मेदार है, जिसमें हवा की गति, सूर्य का कोण और सौर और इन्फ्ररेड विकिरण शामिल हैं।

सुरक्षा दिशा-निर्देशों के तहत अत्यधिक गर्मी और उमस के लिए वार्षिक खतरे का अनुमान लगाया है, जिसमें यदि तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस हो तो लगभग 50 करोड़ लोगों के घर प्रभावित होने का अनुमान है। यदि तापमान 2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है तो  लगभग 80 करोड़ करोड़ लोगों के घर प्रभावित होंगे। अनुमानित 1.2 अरब लोग तापमान के 3 डिग्री सेल्सियस से प्रभावित होंगे, जैसा कि वर्तमान वैश्विक नीतियों के तहत इस सदी के अंत तक माना गया था।