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इस साल मानसून के दौरान सामान्य वर्षा होने का अनुमान: आईएमडी

भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने पूर्वानुमान लगाया है कि पूरे देश में, दक्षिण-पश्चिम मानसून वर्षा “सामान्य” रूप से होने की संभावना है।

By Dayanidhi

On: Friday 16 April 2021
 
इस साल मानसून के दौरान वर्षा के सामान्य होने का अनुमान है: आईएमडी
Photo : Wikimedia Commons Photo : Wikimedia Commons

भारत में जून से सितंबर तक मानसून का मौसम होता है, भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, इस साल देश भर में दक्षिण-पश्चिम मानसूनी मौसम के दोरान बारिश सामान्य रूप से लंबी अवधि के औसत से 96 से 104 फीसदी सामान्य होने की संभावना है।

प्रशांत महासागर के उपर अल नीनो-दक्षिणी दोलन (ईएनएसओ) की निष्क्रियता के चलते इसकी स्थिति हिंद महासागर में प्रबल होने का अनुमान है। नए वैश्विक मॉडल द्वारा लगाया गया पूर्वानुमान बताता है कि निष्क्रिय ईएनएसओ की स्थिति भूमध्यरेखीय प्रशांत में बनी रहने का अनुमान है और आगामी मानसून के मौसम के दौरान हिंद महासागर में नकारात्मक (आईओडी) की स्थिति विकसित होने का अनुमान लगाया गया है।

प्रशांत और हिंद महासागरों के समुद्र की सतह के तापमान का भारतीय मानसून पर गहरा प्रभाव पड़ता है। आईएमडी ने बताया है कि, वह इन समुद्र की सतह की स्थिति पर होने वाले बदलावों पर पैनी नजर बनाए हुए है।

आईएमडी ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में बताया है कि वह मई 2021 के अंतिम सप्ताह में मौसम में होने वाले बदलाओं पर पूर्वानुमान जारी करेगा। इसी तरह अप्रैल में तथा जून से सितंबर तक चलने वाले मानसून के मौसम में देश के अलग-अलग हिस्सों में होने वाली वर्षा का पूर्वानुमान जारी करेगा।

आईएमडी ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि विभिन्न उपयोगकर्ताओं ने इस बात की मांग की थी कि, क्षेत्रीय आधार पर औसतन बारिश के पूर्वानुमान के साथ-साथ मौसमी बारिश किसी विशेष जगह पर कितनी होगी, इसके बारे में पूर्वानुमान लगाया जाए, ताकि वे स्थानीय स्तर पर बेहतर योजना बना सकें।

इसको ध्यान में रखते हुए आईएमडी, पुणे के ऑफिस ऑफ क्लाइमेट रिसर्च एंड सर्विसेज ने अब मॉनसून मिशन सीएफएस (एमएमसीएफ) का उपयोग करते हुए अलग-अलग जलवायु पूर्वानुमानों से लेकर ग्लोबल क्लाइमेट मॉडल (सीजीसीएम) के आधार पर एक मल्टी-मॉडल एनसेंबल (एमएमई) पूर्वानुमान प्रणाली विकसित की है। इससे मौसम के बारे में बेहतर पूर्वानुमान लगाकर लोगों को सटीक जानकारी दी जाएगी।

आईएमडी ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि पहले चरण के पूर्वानुमान के लिए, मौजूदा सांख्यिकीय पूर्वानुमान प्रणाली और पूर्वानुमान लगाने के लिए नए मल्टी-मॉडल एनसेंबल (एमएमई) आधारित पूर्वानुमान प्रणाली का उपयोग किया जाता है।

आईएमडी ने कहा है कि वह खासकर मानसून के मौसम का एक अलग पूर्वानुमान विकसित करने के लिए, मानसून कोर ज़ोन (एमसीजेड) का भी प्रयास कर रहा है, जो देश के अधिकांश वर्षा आधारित कृषि क्षेत्र के लिए काफी लाभदायक होगा। एमसीजेड एक अलग पूर्वानुमान कृषि योजना और फसल उपज आकलन आदि के लिए अधिक उपयोगी होगी।

देश भर में जून से सितंबर- मानसूनी मौसमी के दौरान होने वाली बारिश का 5 श्रेणियों के तहत पूर्वानुमान लगाया गया है।

वर्ग

बारिश की सीमा

(एलपीए का %)

पूर्वानुमान संभावना

(%)

जलवायु संभाव्यता

(%)

बारिश का कम होना < 90 14 16
सामान्य से नीचे 90-96 25 17
सामान्य 96-104 40 33
सामान्य से ऊपर 104-110 16 17
अधिक >110 5 17

 Source : IMD