मानसून के महीनों के दौरान चक्रवात क्यों नहीं आते हैं? आइए जानते हैं इसके बारे में

तिब्बती हाई एक गर्म प्रतिचक्रवात (एंटीसाइक्लोन) है, इसमें हवा उत्तरी गोलार्ध से दक्षिण दिशा की ओर बहती है

By Dayanidhi

On: Thursday 03 June 2021
 
मानसून के महीनों के दौरान चक्रवात क्यों नहीं आते हैं? आइए जानते है इसके बारे में
Photo : Wikimedia Commons Photo : Wikimedia Commons

मानसून की जानकारी के पहले भाग में हमने इससे संबंधित कुछ बातों के बारे में जानकारी प्राप्त की थी और अधिक जानने के लिए निम्नलिखित को पढ़ना भूलें।

मानसून में कमी आना क्या है, यह मानसून को कैसे प्रभावित करता है?

उत्तरी गोलार्ध के दक्षिण दिशा में चलने वाली हवाओं के साथ केंद्र में सबसे कम दबाव वाला क्षेत्र (एलपीए) बन जाता है। कम दबाव वाले क्षेत्र की हवा के गोल-गोल घूमने की गति और हवा के ऊपर की ओर बहने की गति के साथ जुड़ा हुआ है। कम दबाव के क्षेत्र में आमतौर पर बादल और वर्षा मौजूद होते हैं। मानसून के दौरान देखा गया कम दबाव वाले क्षेत्र में मानसून में कमी के रूप में जाना जाता है।  

मानसून का निम्न स्तर मानसूनी दबावों में तीव्र हो सकते हैं। भारत में दक्षिण पश्चिम मानसून की अवधि के लिए मानसून कम और प्रमुख वर्षा प्रणाली पर असर डालते हैं। बंगाल की खाड़ी में बनने वाले मानसून के पश्चिम की ओर जाने से पर्याप्त मात्रा में वर्षा होती है। ये कम दबाव वाले क्षेत्र हैं, जिनके प्रसार में हवा की गति 17 से 33 मील के बीच होती है।

तिब्बती हाई क्या है? यह मानसूनी वर्षा से किस प्रकार संबंधित है?

तिब्बती हाई एक गर्म प्रतिचक्रवात (एंटीसाइक्लोन) है, इसमें हवा में उत्तरी गोलार्ध से दक्षिणावर्त दिशा में परिवर्तन होता है और इसमें हमेशा हवाओं का बहाव घड़ी की दिशा में होता है। मानसून अवधि के दौरान मध्य और ऊपरी ट्रोपोस्फेरिक स्तरों में तिब्बती पठार पर स्थित होता है।

पूर्वी प्रवाह के रूप में तिब्बती हाई से हवाओं का बहाव घड़ी की दिशा में होता है, जो जुलाई में 150 किमी प्रति घंटे की दर तक हो सकता है। यह चेन्नई के अक्षांश के पास केंद्रित जेट स्ट्रीम में केंद्रित होता है। जेट स्ट्रीम वियतनाम के पूर्वी तट से अफ्रीका के पश्चिमी तट तक जाती है।

Photo : Wikimedia Commons

इस प्रकार पूर्वी जेटस्ट्रीम का स्थान मानसून वर्षा के पैटर्न को प्रभावित करता प्रतीत होता है। अपनी स्थिति को पूर्व या पश्चिम में स्थानांतरित करने से भारत में मानसून की गतिविधि में भिन्नता होती है।

ऐसी स्थिति में, मानसून आगे पश्चिम की ओर पाकिस्तान में और चरम मामलों में उत्तरी ईरान में फैल सकता है, हालांकि तिब्बती 'हाई' की स्थिति में तिब्बती पठार के ताप प्रभाव में इसके पैदा होने के कम ही अवसर होते हैं।

सोमाली जेट क्या है?

सोमाली जेट निम्न स्तर (1 से 1.5 किमी) हवा के अंतर-गोलार्ध क्रॉस इक्वेटोरियल प्रवाह है, अफ्रीका के पूर्वी तट के साथ मानसून के दौरान पश्चिमी छोर पर जेट गति प्राप्त करता है। यह जेट दक्षिणी गोलार्ध में मॉरीशस और मेडागास्कर के उत्तरी भाग के पास से निकलती है। यह जेट केन्या तट तक पहुचता है। केन्या, इथियोपिया के मैदानी इलाकों से सोमाली तट तक पहुंचता है।

Photo: Wikimedia Commons

मई के दौरान, यह पूर्वी अफ्रीका में आगे बढ़ता है, फिर अरब सागर में और जून में भारत के पश्चिमी तट पर पहुंचता है। जुलाई में इसको अधिकतम शक्ति प्राप्त होती है। लो लेवल जेट स्ट्रीम में कम समय के लिए (8-10 दिन) का उतार-चढ़ाव देखा जाता है। इसके मजबूत होने से भारत के प्रायद्वीप)पर मजबूत मानसून का जन्म होता है।

जुलाई और अगस्त जैसे मुख्य मानसून के महीनों के दौरान चक्रवात क्यों नहीं आते हैं?

उष्णकटिबंधीय साइक्लोजेनेसिस के लिए कई अनुकूल पहले से तैयार (पूर्ववर्ती) पर्यावरणीय परिस्थितियों की आवश्यकता होती है। गर्म समुद्र का पानी (कम से कम 26.5 डिग्री सेल्सियस और गहराई में कम से कम 50 मीटर तक)5 किमी की ऊंचाई के करीब नम परतें बनती है। सतह की गड़बड़ी के पास पहले से मौजूद कोरिओलिसफोर्स बहुत कम होता है। सतह और ऊपरी ट्रोपोस्फेरिक स्तरों के बीच ऊर्ध्वाधर हवा का दबाव कम होता है।

जुलाई और अगस्त में सतह पर हवाएं मानसून की ट्रफ के दक्षिण में पश्चिम, दक्षिण-पश्चिम में और इसके उत्तर में दक्षिण पूर्व की ओर होती हैं और आमतौर पर भूमि क्षेत्रों की तुलना में समुद्र के ऊपर अधिक मजबूत होती हैं। इस ट्रफ क्षेत्र के उत्तर में ऊपरी हवाएं पश्चिम, दक्षिण-पश्चिम से दक्षिण और दक्षिण पूर्व में होती हैं।

पश्चिमी हवाएं ऊंचाई के साथ बढ़ती हैं और समुद्र में 20-25 मील की अधिकतम गति तक पहुंचती हैं। हवा की गति दक्षिणी अक्षांश में या उससे भी कम ऊंचाई और प्रायद्वीप पर समुद्र में 60 से 80 मील के बीच की गति होती है। इसके परिणामस्वरूप ऊर्ध्वाधर चलने वाली हवा अधिक तेज होती है जो उष्णकटिबंधीय चक्रवात के लिए प्रतिकूल है। इसलिए, हमें मुख्य मानसून के महीनों जैसे जुलाई और अगस्त के दौरान चक्रवात देखने को नहीं मिलते हैं।

संयुक्त प्रणाली परिवर्तन क्या है? यह वर्षा को कैसे प्रभावित करता है?

कम आवृत्ति वाली गतिविधियां भारत के विभिन्न भागों में होने वाली वर्षा को काफी हद तक बदल देते हैं। संयुक्त प्रणाली के अंतर में 3-7 दिनों का समय चक्र होता है। यह मुख्य रूप से निम्न दबाव वाली प्रणालियों के गठन से होता है और ऐसा भारत की धरती के द्रव्यमान पर इसकी गतिविधि के कारण है। इसके प्रभाव से मध्य भारतीय क्षेत्र में अच्छी मात्रा में वर्षा होती है।

अगले अंक में मैडेन जूलियन ऑसिलेशन क्या है? यह वर्षा को कैसे प्रभावित करता है? इसके बारे में जानें

Subscribe to our daily hindi newsletter