वृक्षारोपण से कई गुना ठंडी हो सकती है धरती: अध्ययन

घास के मैदानों और छोटी वनस्पति वाले क्षेत्रों की तुलना में बड़े जंगली इलाकों में बादल अधिक बार बनते हैं और बादल बनने की इस बढ़ती प्रक्रिया से पृथ्वी का वातावरण ठंडा होता है

By Dayanidhi

On: Wednesday 18 August 2021
 
वृक्षारोपण से धरती कई गुना ठंडी हो सकती है: अध्ययन
फोटो : विकिमीडिया कॉमन्स फोटो : विकिमीडिया कॉमन्स

जलवायु में हो रहे बदलाव को कम करने या इससे निपटने के लिए पेड़ लगाना और जंगलों को फिर से बढ़ाना सबसे आसान तरीकों में से एक है। लेकिन वायुमंडलीय तापमान पर पेड़ों का किस तरह असर होता है यह आंखों से जैसा दिखाई देता है उसकी तुलना में कहीं अधिक जटिल है।

वैज्ञानिकों के बीच एक सवाल यह उभर कर सामने आ रहा है कि, क्या उत्तरी अमेरिका या यूरोप जैसे मध्य अक्षांश के हिस्सों में पेड़ों को फिर से लगाने से वास्तव में धरती गर्म हो सकती है। कम सफेदी (अल्बेडो) होने के परिणामस्वरूप वन बड़ी मात्रा में सौर विकिरण को अवशोषित करते हैं, जो सूर्य के प्रकाश को सतह से दूर कर देता है।

उष्णकटिबंधीय इलाकों में साल भर घने वनस्पतियों द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड के बहुत अधिक अवशोषण से कम सफेदी वाले हिस्से की भरपाई हो जाती है। लेकिन समशीतोष्ण जलवायु में चिंता इस बात की है कि सूर्य की गर्मी वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को हटाकर वनों द्वारा प्रदान किए जाने वाले किसी भी ठंड के प्रभाव को दूर कर सकती है।

लेकिन प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक नए अध्ययन में पाया कि इन महत्वपूर्ण घटकों में से बादलों की अनदेखी हो सकती हैं। वन क्षेत्रों से जुड़े घने बादलों की संरचनाओं का मतलब है कि पहले की तुलना में पृथ्वी के वातावरण को ठंडा करने के लिए पेड़ों को फिर से लगाना ज्यादा असरदार होगा।

प्रोफेसर प्रिंसटन के. थॉमस कहते हैं कि मुख्य बात यह है कि कोई भी यह नहीं जानता है कि सफेदी (एल्बिडो) की समस्या के कारण मध्य अक्षांशों पर पेड़ लगाना अच्छा है या बुरा। यह माना जाता है कि जंगलों वाले इलाकों में बादल अधिक बार बनते हैं। बड़े इलाकों में पेड़ लगाना फायदेमंद होता है और इसे जलवायु उद्देश्यों को हासिल करने के लिए किया जाना चाहिए।

जैसा कि हम महसूस करते हैं, एक गर्म दिन में जब बादल सूरज के नीचे से गुजरते हैं, बादलों का पृथ्वी पर कुछ क्षण के लिए ठंड का असर होता है। सूर्य को सीधे अवरुद्ध करने के अलावा, बादलों में बर्फ और बर्फ के समान एक बहुत बड़ा एल्बीडो होता है।

हालांकि, बादलों का अध्ययन करना बेहद मुश्किल है और प्राकृतिक जलवायु परिवर्तन को कम करने की प्रभावशीलता की जांच करने वाले कई अध्ययनों से बड़े पैमाने पर छूट दी गई है, जिसमें वनों की कटाई भी शामिल है।

बादलों के कवरेज के संदर्भ में पेड़ों की कटाई पर विचार करने के लिए, पोरपोराटो ने प्रमुख अध्ययनकर्ता सारा सेरासोली के साथ काम किया, जो सिविल और पर्यावरण इंजीनियरिंग में स्नातक के छात्र हैं और जून यिंग, नानजिंग यूनिवर्सिटी ऑफ इंफॉर्मेशन साइंस एंड टेक्नोलॉजी में एक सहायक प्रोफेसर हैं।

पोरपोराटो और यिन ने पहले बताया था कि जलवायु मॉडल दैनिक बादल चक्र के ठंडा करने के प्रभाव को कमतर आंकते हैं। उन्होंने पिछले साल यह भी बताया कि जलवायु परिवर्तन के परिणामस्वरूप अमेरिकी दक्षिण पश्चिम जैसे शुष्क क्षेत्रों में हर दिन बादलों के कवरेज में वृद्धि हो सकती है जो वर्तमान में सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए बहुत अच्छा है।

इस नवीनतम अध्ययन के लिए, सेरासोली, पोरपोराटो और यिन ने 2001-10 से बादलों के कवरेज के उपग्रह आंकड़ों को पौधों और वातावरण के बीच प्रभाव से संबंधित मॉडल के साथ जोड़कर मध्य अक्षांश क्षेत्रों में बादल बनने से वनस्पति पर पड़ने वाले प्रभाव का पता लगाया।

शोधकर्ताओं ने विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों और वायुमंडलीय सीमा की परत के परस्पर प्रभाव का मॉडल तैयार किया। जो कि वायुमंडल की सबसे निचली परत है और पृथ्वी की सतह के साथ सीधे संपर्क करती है। यह निर्धारित करने के लिए कि क्या बादल बनने से अलग-अलग तरह की वनस्पति प्रभावित होती है।

उन्होंने 30 से 45 डिग्री अक्षांशीय सीमा के इलाकों में गौर किया, मोटे तौर पर उपोष्णकटिबंधीय से लेकर उत्तरी मध्यपश्चिमी संयुक्त राज्य जैसे हेमीबोरियल क्षेत्रों तक। उन्होंने पेड़ों की कटाई के प्रभावों पर विचार किया, काटे गए पेड़ों के आवरण को बहाल करना और वनीकरण, जिसमें उन क्षेत्रों में वनों को लगाना शामिल है जो पहले बेजान थे।

टीम ने पाया कि मध्य अक्षांश के इलाकों के लिए, बादलों के ठंडा करने के प्रभाव, कार्बन अनुक्रम सौर विकिरण से अधिक है जो जंगलों के द्वारा अवशोषित करते हैं।

मॉडलों ने दिखाया कि घास के मैदानों और छोटी वनस्पति वाले क्षेत्रों की तुलना में बड़े जंगली इलाकों में बादल अधिक बार बनते हैं। इन बढ़े हुए बादलों के बनने से पृथ्वी का वातावरण ठंडा होता है। शोधकर्ताओं ने उपग्रह के आंकड़ों से पता लगाया कि बादल दोपहर के समय से पहले जंगल वाले इलाकों में बनते हैं, जिसके परिणामस्वरूप बादलों की लंबी अवधि होती है। बादलों को पृथ्वी से दूर सौर विकिरण को प्रतिबिंबित करने में अधिक समय लगता है।

अध्ययनकर्ताओं के निष्कर्ष वनीकरण और कृषि के लिए भूमि आवंटित करने की नीतियों को विकसित करने में मदद कर सकते हैं। पूर्वी संयुक्त राज्य या दक्षिण पूर्वी चीन जैसे नमी वाले मध्य अक्षांशीय इलाकों में पुनर्वनीकरण और वनीकरण के लिए उपयुक्त हैं। लेकिन यह क्षेत्र कृषि के लिए भी आकर्षक हैं।

अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि एक दृष्टिकोण मध्य अक्षांशीय पुनर्वनीकरण को उन क्षेत्रों के लिए सूखे को सहन करने वाली (सूखा-सहिष्णु) फसलों के वितरण के साथ जोड़ना होगा जो पुनर्वनीकरण के लिए कम अनुकूल हैं।

अध्ययनकर्ताओं ने आग्रह किया कि नीति में बदलाव करते समय हमें सतर्क रहना चाहिए। हम न केवल जलवायु परिवर्तन पर बल्कि अन्य कारकों पर भी विचार कर सकते है, जैसे कि जैव विविधता और खाद्य उत्पादन के लिए भूमि की आवश्यकता आदि। भविष्य के अध्ययनों को बादलों की भूमिका पर विचार करना जारी रखना चाहिए, लेकिन अधिक विशिष्ट क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाना चाहिए और उनकी अर्थव्यवस्थाओं को ध्यान में रखना चाहिए।

पोरपोराटो ने कहा कि पहली बात यह है कि चीजों को बदतर नहीं बनाना है। पृथ्वी प्रणाली में बहुत सी चीजें जुड़ी हुई हैं। उदाहरण के लिए, जल चक्र और जलवायु के बीच परस्पर प्रभाव की प्रकृति का मतलब है कि यदि आप एक चीज बदलते हैं, तो यह अनुमान लगाना बहुत मुश्किल है कि प्रणाली के अन्य हिस्सों पर इसका किस तरह का असर होगा।