जंगली पक्षियों की करीब 14 फीसदी आबादी को प्रभावित कर रहा है एवियन मलेरिया

अध्ययन के अनुसार पक्षियों को प्रभावित करने वाला यह एवियन मलेरिया इसके प्रसार के लिए हॉटस्पॉट बन चुके क्षेत्रों में बड़ी तेजी से फैल रहा है   

By Lalit Maurya

On: Tuesday 14 September 2021
 
पाईड बूचरबर्ड; फोटो: डॉ निकोलस क्लार्क
पाईड बूचरबर्ड; फोटो: डॉ निकोलस क्लार्क पाईड बूचरबर्ड; फोटो: डॉ निकोलस क्लार्क

दुनिया भर में जंगली पक्षियों की करीब 13 से 14 फीसदी आबादी को पक्षियों में होने वाला मलेरिया प्रभावित कर रहा है। हालांकि वैश्विक स्तर पर पक्षियों की बीमारी और मृत्यु का कारण बन रहे इस मलेरिया की मनुष्यों में फैलने की सम्भावना न के बराबर है। यही वजह है इन पर उतना ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जिस वजह से यह वैश्विक स्तर पर इसके प्रसार के हॉटस्पॉट बन चुके क्षेत्रों से बड़ी तेजी से फैल रहा है।

यह जानकारी हाल ही में क्वींसलैंड विश्वविद्यालय के डॉ निकोलस क्लार्क सहित अंतराष्ट्रीय शोधकर्ताओं द्वारा किए एक अध्ययन में सामने आई है। यह अध्ययन ग्लोबल इकोलॉजी एंड बायोजियोग्राफी जर्नल में प्रकाशित हुआ है। 

इस बारे में डॉ निकोलस क्लार्क ने जानकारी देते हुए बताया कि यह मलेरिया दुनिया भर में जंगली पक्षियों की करीब 13 से 14 फीसदी आबादी को प्रभावित कर रहा है। पक्षियों में फैलने वाली यह बीमारी रक्त में मौजूद हेमोस्पोरिडियन परजीवियों के एक समूह के कारण फैलती है। यह इंसानों में फैलने वाले मलेरिया की तरह ही मच्छरों जैसे खून चूसने वाले जीवों की मदद से दूसरे जीवों में फैलता है।

हालांकि यह इंसानों के लिए हानिकारक नहीं है, लेकिन पक्षियों की आबादी को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। उदाहरण के लिए 19वीं सदी के अंत में जब हवाई में एवियन मलेरिया के फैलने की शुरुवात हुई थी, तो वो वहां हवाई हनीक्रिपर्स पक्षियों की 55 ज्ञात प्रजातियों में से करीब एक-तिहाई के विलुप्त होने के प्रमुख कारणों में से एक यह एवियन मलेरिया भी था।    

सहारा-अरब क्षेत्र है इस बीमारी का सबसे प्रमुख हॉटस्पॉट

शोध के अनुसार दुनिया भर में कई क्षेत्र इन परजीवियों के प्रसार के लिए हॉटस्पॉट बन चुके हैं। इसमें सबसे प्रमुख हॉटस्पॉट सहारा-अरब क्षेत्र में है। वहीं  उत्तरी अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में जहां इसके अलग-अलग वैरिएंटस स्थानीय स्तर पर तेजी से फैल रहे हैं। वहीं ऑस्ट्रेलिया में भी इनमें से कुछ परजीवी सांगबर्ड, सिल्वरआई (ज़ोस्टेरॉप्स लेटरलिस) और हनीईटर्स जैसे पक्षियों की कई प्रजातियों में तेजी से फैल रहे हैं। 

अपने इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने अब तक पक्षियों में फैलने वाले मलेरिया का सबसे बड़ा डेटा सेट तैयार किया है, जिसमें 53, 000 से अधिक जंगली पक्षियों की जांच की गई है। इसके साथ ही उन्होंने पक्षियों और उनके आवास के संबंध में भी आंकड़े जमा किए हैं जैसे कि उनके आवास, जलवायु, पक्षियों का जीवन इतिहास, उनके शरीर का आकार, प्रवास का पैटर्न आदि आंकड़ों को कंप्यूटर मॉडल की मदद से विश्लेषित कर यह जानने का प्रयास किया है कि किन कारणों से एवियन मलेरिया के परजीवियों के फैलने का जोखिम सबसे ज्यादा होता है। 

इस बारे में डॉ कोंस्टन्स वेल्स ने बताया कि संक्रामक रोगों के खतरों को समझने के लिए यह जानना जरुरी है कि कौन सी स्थितियां जंगली पक्षियों में मलेरिया संक्रमण के फैलने का कारण बनती हैं। उन्होंने आगे बताया कि चूंकि पक्षी की प्रत्येक प्रजाति अपने इकोसिस्टम के लिए अनोखी है। प्रजनन और प्रवास के समय वो अलग-अलग तरह से रोग फैलाने वाले कीड़ों के संपर्क में आती हैं, इसलिए पक्षियों की अलग-अलग प्रजातियों में सक्रमण फैलने का जोखिम एक समान नहीं होता है।

दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में संक्रमण का फैलना पूरी तरह वहां की परिस्थितियों और पक्षियों पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए लम्बी दूरी को प्रवास करने वाले पक्षियों में अन्य की तुलना में संक्रमित होने की सम्भावना अधिक होती है। 

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