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लाइव ग्राउंड रिपोर्ट : किसानों की गणतंत्र परेड

 देश में 72वां गणतंत्र दिवस एक उथल-पुथल वाला इतिहास बन गया है। दिल्ली में तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों की परेड का स्वागत जनता के फूल और पुलिस की लाठी दोनों से हुआ है। 

By Vivek Mishra

On: Tuesday 26 January 2021
 
Photo : डाउन टू अर्थ, गणतंत्र दिवस के दिन किसानों की परेड।
Photo : डाउन टू अर्थ, गणतंत्र दिवस के दिन किसानों की परेड। Photo : डाउन टू अर्थ, गणतंत्र दिवस के दिन किसानों की परेड।

राष्ट्रीय राजधानी में में 72वें गणतंत्र दिवस की आधिकारिक परेड संपन्न हुई लेकिन किसानों की परेड दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में जारी है। दिल्ली की जिन तीन सीमाओं से प्रवेश करके तय रूट पर किसानों को परेड के लिए निकलना था उस नियम को कुछ जगहों पर तोड़ दिया गया है।  बैरिकेडिंग तोड़कर सेंट्रल दिल्ली में प्रवेश करने वाले किसानों ने दिल्ली के लाल किले तक पहुंचने की इच्छा जताई है। वहीं, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ किसान दिल्ली लाल किले तक पहुंच भी गए हैं। जबकि एक फरवरी, 2021 यानी बजट वाले दिन पहले ही संसद के घेराव की चेतावनी किसान यूनियनों ने दे रखी है। कृषि कानूनों के खिलाफ गणतंत्र दिवस की किसान परेड को शांतिपूर्ण आयोजित होना था लेकिन दोपहर होते-होते यह कुछ जगहों पर हिंसक भी हुई। यह परेड और हमारी रिपोर्ट लगातार जारी है...

सुबह से ही डाउन टू अर्थ की टीम प्रमुख बॉर्डर से ताजा स्थितियों को साझा कर रही है। सुबह से अब तक की स्थिति - 

सुबह 7 बजे गाजीपुर, टिकरी, सिंघु और दिल्ली के बाहरी सीमाओ पर डाउन टू अर्थ की टीम लाइव के लिए पहुंची। 

ग्राउंड से राजू सजवान  ः सुबह 08 : 22 मिनट पर पलवल से रिपोर्ट आई कि वहां के किसानों को दोपहर 12 बजे के बाद इंट्री की इजाजत मिल गई है इसलिए वे 11 बजे वहां से दिल्ली की सीमा में प्रवेश करेंगे। 

ग्राउंड से अनिल अश्विनी शर्मा :  सुबह 09: 20 मिनट पर गाजीपुर बॉर्डर से मोबाइल फोन के नेटवर्क ठीक से काम नहीं कर रहे थे। 

ग्राउंड से सन्नी : सुबह 09 :24 पर सूचना मिली की पलवल से दिल्ली की तरफ कंटेनर्स रख दिए गए हैं , पूरा रोड ब्लॉक था। 

ग्राउंड से भगीरथ: सुबह 10 बजे दक्षिणी दिल्ली (टिकड़ी बॉर्डर) के झरौंदा कला से सूचना दी कि बीते दो घंटों से ट्रैक्टर रैली निकल रही थी, इसी बीच वहां मौजूद लोगों ने कहा कि गणतंत्र दिवस की आधिकारिक परेड से बेहतर यह किसानों की ट्रैक्टर परेड है। किसानों ने कहा कि यह परेड किसानों और मजदूरों की है और यह शाम और देर रात तक जारी है। गांव वालों को इन किसानों को दिक्कत नहीं है। 

सुबह 10 से 11 बजे के बीच किसानों की ट्रैक्टर रैली की तय रूट से अलग जाने की सूचना भी अलग-अलग हिस्सों से रिपोर्टर्स ने भेजी। 

सुबह 10 :55 पर शगुन कपिल और आदित्यन ने ग्राउंड रिपोर्ट में बताया कि सिंघु बॉर्डर पर हालात ठीक नहीं है। कुछ किसानों ने बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की वहीं, पुलिस ने आसू गैस के गोले भी छोड़े। 

photo : डाउन टू अर्थ

11 बजकर 34 मिनट पर ग्राउंड से भगीरथ का वीडियो लाइव पर बोले नजफगढ़, झरौंदा कला के किसान : 

लोगों ने कहा कि वे किसानों के साथ है और कृषि कानूनों से भी उन्हें परेशानी है। इसलिए वे इस किसान रैली का समर्थन करते हैं।  

लाइव वीडियो में मौके पर एक किसान ने कहा कि यूरिया की बोरी में पांच किलो कम आता है लेकिन उसका दाम नहीं घटाया गया। न ही यूरिया के रेट फिक्स किया जा रहा है। खाद भी महंगी मिल रही है। किसान ने कहा कि मंडी व्यवस्था चौपट हो गई है। बाजरा प्रति क्विंतल 2200 रुपये तक था लेकिन उसे 1500-1600 रुपये के बीच ही दाम मिल पाया। हरियाणा में बहादुरगढ़ में 1975 रुपए और दिल्ली में 1750 से 1650 रुपये तक गेहूं बिक रहा है। किसान ने सवाल किया कहां गई सरकार की गारंटी? आखिर कोई भाव तय होना चाहिए या नहीं। जब आपके मोबाइल का भाव तय है तो फिर हमारे अनाज का क्यों नहीं?

भगीरथ लाइव वीडियो : कृषि कानून के कारण मंडी पर पड़ने वाले प्रभाव पर बोले किसान  

पंजाब के फरीदकोट से आए चरणजीत सिंह ने लाइव वीडियो में कहा कि कृषि कानूनों के कारण सरकारी मंडी खत्म हो जाएगी। प्राइवेट मंडी की व्यवस्था सरकार करना चाहती है, जबकि किसान इससे बाहर बेचने पर मजबूर होगा। वहीं हमारी फसलें खराब होंगी और एफसीआई आदि का कोई काम नहीं बचेगा। सरकार इसे बंद करना चाहेगी और फिर अगर सरकार हमें एमएसपी देगी तो क्या फायदा होगा। हमारे पास तो कोई खरीददार नहीं बचेगा। सरकार के पास कोई अनाज नहीं होगा तो सब कुछ बहुत ही महंगा मिलेगा। इसलिए दो से तीन वर्ष में सब बदल जाएगा। हमारे पास छह महीने का राशन है हम सरकार के सामने मांगों को लेकर डटे रहेंगे। 

11 बजकर 34 मिनट पर ग्राउंड से राजू सजवान का दिल्ली-आगरा एनएच से लाइव वीडियो  :

राजू ने लाइव वीडियो में बताया कि दिल्ली आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर पलवल के पास रुके हुए किसानों को आगे बढ़ने की इजाजत नहीं दी गई। इसके चलते किसान वहां के बेरिकेड्स तोड़ कर आगे बढ़ चुके हैं। 27 नवंबर, 2020 से ही किसान वहां डटे हुए थे। किसानों का कहना था कि सरिता विहार, दिल्ली जाने के लिए उन्हें पुलिस ने इजाजत नहीं दी गई थी। लेकिन पुलिस का कहना था कि उनकी ओर से इजाजत नहीं दी गई थी। वहीं, एक नाका तोड़कर किसान आगे बढ़ गए लेकिन बदरपुर बॉर्डर की तरफ पुलिस की नाकाबंदी ज्यादा थी। कई ऐसे ट्रक भी फंस गए जो दवा या अन्य जरूरी समान लेकर पटना, बिहार जा रहे थे।

12 बजे दोपहर विनीत और अनिल अश्वनी शर्मा का लाइव : 

गाजीपुर बॉर्डर से ट्रैक्टर्स पर किसानों की रैली झांकी के साथ निकलती रही। विनीत ने कहा कि कुछ ट्रैक्टर्स रागिनी जो कि हरियाणा में गीत और कहावतों को कहने की एक शैली है, वह बजाए जा रहे थे। अनिल ने बताया कि लोगों ने इस बार आधिकारिक परेड देखने के बजाए किसानों की रैली को देखने का मन बनाया। सुबह से ही गाजीपुर बॉर्डर पर किसान जुटने लगे। बुलंदशहर से आए शाहरुख ने बताया कि सुबह कुछ ट्रैक्टर तय रूट से अलग दिल्ली के अक्षरधाम और आनंद विहार की तरफ भी बढ़ गए क्योंकि उस वक्त बैरिकेडिंग हो पाई थी।  

किसानों पर बरसाए स्थानीय लोगों ने फूल 

Photo : डाउन टू अर्थ

विनोद नगर मेट्रो स्टेशन के पास स्थानीय लोगों ने किसानों के मार्च पर फूलों की वर्षा कराई। यह सुबह 11 बजे के बाद से दोपहर 12 बजे तक चलता रहा। वहीं, इसके बाद रैली के भटकने और छिटपुट झड़प की खबरें भी आने लगीं। 

लाठी चार्ज और झड़प 

दोपहर 12 बजकर 50 मिनट पर दिल्ली-आगरा एनएच से राजू सजवान ने लाइव वीडियो में बताया कि वहां पर भी लाठी चार्ज हुआ है। 

वहीं, अन्य सूचनाओं के मुताबिक 1 बजे दोपहर से किसानों की रैली सेंट्रल दिल्ली में प्रवेश करने लगी। कई बैरिकेडिंग भी तोड़े गए। कुछ किसान दलों की रैली हिंसक भी हुई।

अनिल अश्वनी शर्मा ने ग्राउंट रिपोर्ट में कहा कि राकेश सिंह टिकैत के साथ के किसान जो गाजीपुर से आईटीओ की तरफ लौट रहे हैं। सुबह के वक्त भारतीय किसान यूनियन के किसान अक्षरधाम की तरफ बढ़ गए थे, बाद में रैली जब 10 बजे शुरू हुई तो किसानों का जत्था आईटीओ की तरफ बढ़ गया। कुछ की मांग इंडिया गेट की थी तो कुछ राजघाट जाना चाहते थे। पुलिस की बैरिकेडिंग की वजह से किसानों को वहीं रोक लिया गया और सेंट्रल दिल्ली में नहीं जाने दिया गया। वहां थोड़ी-बहुत पुलिस से झड़प भी हुई। 

2: 43 मिनट पर आईटीओ पर अब भी किसान लाल किले की जिद के लिए अड़े हैं।