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अनिल अग्रवाल डायलॉग 2020: बच्चों को जलवायु परिवर्तन के मायने समझाएगी यह किताब

यह किताब आसान शब्दों में जलवायु परिवर्तन की वजह और इससे पृथ्वी पर होने वाले दुष्प्रभावों को बताती है

By Manish Chandra Mishra

On: Monday 10 February 2020
 
फोटो: भागीरथ
फोटो: भागीरथ फोटो: भागीरथ

राजस्थान के अलवर जिले स्थित अनिल अग्रवाल एनवायरमेंट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (एएईटीआई) में चल रहे तीन दिवसीय अनिल अग्रवाल डायलॉग 2020 के दौरान सीएसई की नई किताब जलवायु परिवर्तन, 21वीं सदी की सबसे बड़ी चुनौती का विमोचन किया गया। यह किताब बच्चों को युवाओं को पर्यावरण के प्रति जागरुकता फैलाने के उद्देश्य से तैयार की गई है। किताब बताती है कि जलवायु प्रदूषण इस वक्त की सबसे बड़ी समस्या कैसे है और इसका कैसा दुष्प्रभाव पृथ्वी पर देखने को मिल रहा है। जलवायु परिवर्तन में विश्व और भारत की भूमिका को भी किताब में दिखाया गया है। इसमें विकसित और विकासशील देशों की जिम्मेदारी पर भी विस्तार से लिखा गया है।

इस किताब का विमोचन पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण (ईपीसीए) के अध्यक्ष भूरे लाल ने किया। किताब के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “मैं सीएसई जैसी साइंटिफिक संस्था का धन्यवाद देना चाहता हूं जिसकी वजह से हमें सतत कार्य करने के लिए मार्गदर्शन मिलता रहता है।“ वह कहते हैं कि उनकी संस्था का सामान्य उद्देश्य है अच्छी हवा, साफ पानी और अच्छा वातावरण जो सबके लिए जरूरी है। इस उद्देश्य को पाने के लिए उन्हें सही रास्ता दिखाने वाली संस्थाओं का भी बड़ा योगदान है।

प्रदूषण की समस्या पर भूरे लाल का मानना है कि आज के समय में कचरे का जलाना और कचरा प्रबंधन सबसे बड़ी समस्या के रूप में सामने है। अगर प्रदूषण से लड़ना है तो कचरा प्रबंधन को ठीक करना होगा। किसी भी जंगल, खाली स्थान को देखते हैं तो दिखता है कि वह कचरा जलाने का स्थान या कचरा फेकने का स्थान बनता जा रहा है। वह कहते हैं कि दिल्ली में इंडस्ट्रियल इलाकों में कचरा प्रबंधन को लेकर बड़े उपाय किए जा रहे हैं।

प्रदूषण नियंत्रण को लेकर किए प्रयासों को लेकर वह कहते हैं कि दिल्ली में 30 इंडस्ट्रियल एसोशिएशन ने कचरा प्रबंधन के लिए करार किया है जिसका असर देखने को मिलेगा और आने वाले समय में पूरे एनसीआर में ऐसी कोशिश की जाएगी। चुनौतियों की बात करते हुए वे कहते हैं कि 2004 में गाड़ियों की संख्या देश भर में महज 5 करोड़ थी जो कि बढ़कर 2016 में 23 करोड़ हो गई। दिल्ली में ऑटोमोबिल की संख्या 70 के दशक में लगभग 8 लाख थी जो कि जो कि आज के समय में एक करोड़ से अधिक है। हमें सार्वजनिक यातायात को बढ़ावा देने की जरूरत है।