इलाज न मिलने पर 3 भोपाल गैस पीड़ितों की मौत

गैस पीड़ितों का अस्पताल कोरोनावायरस संक्रमितों के लिए आरक्षित किया गया है। इसके खिलाफ कोर्ट जाने वाली याचिकाकर्ता की सुनवाई से पहले मौत हो गई

By Manish Chandra Mishra

On: Thursday 09 April 2020
 

भोपाल गैस पीड़ितों के लिए बने सुपर स्पेशलिटी अस्पताल भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (बीएमएचआरसी) को सिर्फ कोविड-19 मरीजों के इलाज के लिए चिन्हित किया गया है। यहां गैस पीड़ितों का इलाज शुरू कराने के लिए कोर्ट में याचिका लगाने वाली याचिकाकर्ता मुन्नी बी (68) का सुनवाई से पहले ही निधन हो गया। वह बीएमएचआरसी की आईसीयू में गंभीर हालत में भर्ती थीं और इलाज जारी रखने के लिए कोर्ट की सहायता चाह रही थीं। भोपाल ग्रुप फोर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन संस्था की रचना ढींगरा ने डाउन टू अर्थ को बताया कि 9 अप्रैल शाम को उनका देहांत हो गया। अस्पताल प्रबंधन ने उनके बेटे को आगे की प्रक्रिया के लिए बुलाया है। 

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एवं जस्टिस नागेश्वर राव की डबल बेंच ने इस याचिका को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ले जाने के लिए आदेशित किया। अब मुन्नी बी ने गुरुवार को हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी, जिस पर सुनवाई होनी है। प्रदेश सरकार ने गैस पीड़ितों के इलाज के लिए बने एकमात्र सुपर स्पेशलिटी अस्पताल को कोविड-19 के इलाज के लिए आरक्षित कर दिया।

डाउन टू अर्थ ने आदेश जारी होने के बाद गैस पीड़ितों को इलाज में आ रही दिक्कतों को प्रकाशित किया था जिसमें पीड़ितों ने आरोप लगाया था कि वहां भर्ती मरीजों की छुट्टी किए जाने के साथ-साथ ओपीडी और डायलेसिस के लिए आने वाले मरीजों को भी इलाज देने से मना कर दिया गया। रचना ढींगरा के मुताबिक अबतक इलाज न मिलने की वजह से 3 गैस पीड़ितों की मौत हो चुकी है। भोपाल में कोविड-19 की वजह से जिस पहले व्यक्ति नरेश खटीक की मृत्यु हुई वह भी एक गैस पीड़ित थे। उन्हें गैस पीड़ितों के अस्पताल के बजाय एक निजी अस्पताल जाना पड़ा जिसके लिए उनके परिवार ने 90 हजार का कर्ज भी लिया था। मृत्यु से पहले उनके कोविड-19 संक्रमित होने की पुष्टि हुई थी। बीएमएचआरसी में सभी ओपीडी आईपीडी एवं इमरजेंसी सेवाओं को पिछले 17 दिन से बंद कर दिया गया है। 

कल सुनवाई की उम्मीद 

इस याचिका में मुन्नी बी ने कहा था कि 23 मार्च 2020 के स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव ने गैस पीड़ितों का एक मात्र बीएमएचआरसी को सिर्फ कोविड-19 के मरीजों के लिए अधिकृत कर दिया। यह आदेश गैस पीड़ितों के संवैधानिक अधिकारों का हनन करता है। कोर्ट से  अंतरिम राहत के तौर पर अस्पताल में तुरंत इमरजेंसी सुविधा, वार्डों की सुविधा, गैस पीड़ितों की दवाइयों की सुविधा तुरंत चालू करने की प्रार्थना की। याचिका में कहा गया है कि इस आदेश के बाद सभी भर्ती गैस पीड़ितों को बाहर कर दिया और अस्पताल के आईसीयू में भर्ती 4 गैस पीड़ितों के परिजनों पर मरीज को उन्हें कहीं और ले जाने को कहा गया। 

गैस पीड़ितों ने अपनी शिकायत सुप्रीम कोर्ट के द्वारा बनी निगरानी समिति से भी की है। निगरानी समिति के सदस्य पूर्णेन्दु शुक्ल ने डाउन टू अर्थ को बताया कि उनके पास लगातार पीड़ितों की तरफ से शिकायतें आ रही हैं जिसमें इलाज न मिलने की वजह से तीन लोगों की मौत के मामले भी हैं।

शुक्ल बताते हैं कि सुरेश कुमार साहू नामक मरीज को हार्ट अटैक आने की वजह से भर्ती किया गया है जिसे इलाज की सख्त जरूरत है। कैथ लैब बंद होने की वजह से उसे उचित इलाज नहीं मिल पा रहा। आईसीयू में तीन महिलाएं तुलसी बाई, रामश्री बाई और मुन्नी बी के वेंटिलेटर पर होने की सूचना है, जिसमें से मुन्नी बी की मृत्यु की सूचना मिली है।

शुक्ल बताते हैं कि सरकार से लेकर अस्पताल प्रशासन से वह गैस पीड़ितों के अस्पताल को पूर्व की तरह रखने की कई बार गुजारिश कर चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई पुख्ता निर्णय नहीं हुआ है। डायलेसिस के लिए 31 मरीजों को दूसरे सरकारी अस्पताल भेजा गया लेकिन वहां उन्हें कई समस्या आ रही है। एक और शिकायत के बारे में शुक्ल बताते हैं कि डायलेसिस न होने की वजह से शारदा खत्री नामक गैस पीड़ित महिला का एक निजी अस्पताल में हाल ही में देहांत हो गया।