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पंजाब ने बनाई पुआल से बिजली बनाने की योजना, प्रदूषण में आएगी कमी

यहां पढ़िए पर्यावरण सम्बन्धी मामलों के विषय में अदालती आदेशों का सार

By Susan Chacko, Lalit Maurya

On: Friday 07 August 2020
 

पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) ने पुआल से बिजली बनाने के सन्दर्भ में अपनी रिपोर्ट एनजीटी के समक्ष प्रस्तुत कर दी है| मामला पंजाब के बठिंडा जिले का है, जहां थर्मल पावर प्लांट को पुआल से चलने की योजना है| जिससे पुआल को जलाने से होने वाले प्रदूषण में कमी आएगी|

 पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के सेवानिवृत्त इंजीनियर दर्शन सिंह ने इस परियोजना पर एनजीटी के समक्ष आवेदन किया था। अदालत ने दर्शन सिंह के उस आवेदन को 2019 के ओऐ नंबर 1039 में दर्शन सिंह बनाम पंजाब और अन्य राज्य के रूप में परिवर्तित कर दिया था| जिसपर कोर्ट ने 27 जनवरी को एक आदेश पारित किया| जिसमें पीपीसीबी और पीएसपीसीएल और पंजाब एनर्जी एजेंसी को निर्देश दिया गया कि इस मामले पर अपनी राय पेश करे।

इस मामले में दर्शन सिंह के प्रस्ताव की जांच करने के लिए कोर्ट ने एक समिति गठित की थी| प्रस्ताव के अनुसार भटिंडा में थर्मल पॉवर प्लांट को कोयले की जगह पुआल से चलाने की योजना है| इसके संबंध में निम्नलिखित तथ्यों का उल्लेख किया गया है:

अ)  नए बायोमास संयंत्र की स्थापना की तुलना में थर्मल पावर प्लांट में परिवर्तन करना सस्ता है| साथ ही इससे बिजली उत्पादन की लागत में भी कमी आएगी, जिससे उपभोक्ताओं पर कम बोझ पड़ेगा।

ब) विशेषज्ञों ने इस संयंत्र को विशेष रूप से पुआल पर चलाने के लिए पंजाब राज्य विद्युत निगम (पीएसपीसीएल) को एक रिपोर्ट सौंपी है।

इस मामले पर पीएसपीसीएल ने 21 नवंबर 2018 को एक बैठक की थी| जिसमें उसने 120 मेगावाट थर्मल पावर प्लांट में से 60 मेगावाट को परिवर्तित करने के प्रस्ताव पर मंजूरी दे दी थी। नवंबर 2018 से यह प्रस्ताव राज्य सरकार के पास है जिसपर कोई फैसला नहीं लिया गया है।


काली नाड़ी, कृष्णा और हिंडन नदियों में छोड़ा जा रहा है उद्योगों से निकला गंदा पानी: रिपोर्ट

एस.वी.एस राठौड़ की अध्यक्षता वाली समिति ने अपनी रिपोर्ट एनजीटी के समक्ष सौंप दी है| मामला पश्चिमी उत्तर प्रदेश का है जहां उद्योगों से निकलने वाले गंदे पानी की नदियों में बहाया जा रहा था| रिपोर्ट के अनुसार इससे काली नाड़ी, कृष्णा और हिंडन नदी का जल दूषित हो रहा है साथ ही भूजल पर भी असर पड़ रहा है| जिसके कारण वहां रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है|

कोर्ट द्वारा गठित समिति ने 11 फरवरी, 2019 को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है| जिसके अनुसार मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर जिलों में उधोगों से निकले गंदे पानी और सीवेज से वहां का जल प्रदूषित हो रहा है| इसके साथ ही इन इलाकों में हैंड पंप से जो पानी प्रयोग किया जा रहा है वो दूषित हो चुका है जिसका अभी भी उपयोग हो रहा है| 

इन प्रभावित क्षेत्रों में अधिकारियों द्वारा साफ़ पानी की आपूर्ति का कोई उपाय नहीं किया गया है| साथ ही गंदे पानी के कारण बीमार पड़े लोगों की पहचान और पीड़ितों को मुआवजा देने का कोई प्रयास किया है|

रिपोर्ट में जानकारी दी है कि एनजीटी और समिति के बार-बार निर्देश देने के बावजूद उत्तर प्रदेश जल निगम ने अब तक 148 प्रभावित गांवों में पाइप वाटर नहीं पहुंचाया है| अब तक केवल 45 गांवों में पाइप वाटर देने की व्यवस्था की गई है जबकि जुलाई 2019 में यह आंकड़ा 41 गांवों का था।

इस तरह पिछले एक साल में केवल 4 गांवों तक पाइप के जरिए पानी पहुंचा है। वहीं पिछले एक साल में प्रस्तावित तीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों (एसटीपी) के निर्माण में कोई प्रगति नहीं हुई है।


पर्यावरण मंजूरी के बिना हानिकारक रसायन 'फॉर्मलडीहाइड' के निर्माण में लगा था मेसर्स ओम रसायन

हरियाणा में द स्टेट एनवायरनमेंट इम्पैक्ट एस्सेसमेंट अथॉरिटी (एसईआईएए) ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को तुरंत फॉर्मलडीहाइड के निर्माण पर रोक लगाने के लिए कहा है| मामला हरियाणा के यमुनानगर की तहसील बिलासपुर के कुराली गांव का है| जहां मेसर्स ओम रसायन फॉर्मलडीहाइड नामक इस खतरनाक रसायन के निर्माण में लगा हुआ था|

इस मामले में एसईआईएए ने एनजीटी में अपनी रिपोर्ट सबमिट की है, जिसके अनुसार इस यूनिट ने इस काम के लिए पर्यावरण मंजूरी नहीं ली है|