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पर्यावरण मुकदमों की डायरी: सोनभद्र में चल रहा था अवैध खनन का कारोबार, एनजीटी ने दिए कार्रवाई के आदेश

पर्यावरण से संबंधित मामलों में सुनवाई के दौरान क्या कुछ हुआ, यहां पढ़ें-

By Susan Chacko, Lalit Maurya

On: Thursday 15 October 2020
 

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 13 अक्टूबर, 2020 को उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के लिए निर्देश जारी किया है| जिसमें कहा है कि बोर्ड स्टोन क्रशर और अवैध खनन के चलते पर्यावरण को जो नुकसान पहुंचा है, उसकी भरपाई के लिए जरुरी कदम उठाए| पूरा मामला उत्तरप्रदेश के सोनभद्र जिले का है| गौरतलब है कि यहां मैसर्स मैहर स्टोन, मैसर्स जय मां भंडारी, मेसर्स ज्योति स्टोन, मेसर्स वैष्णो स्टोन और मैसर्स गुरु कृपा एसोसिएट्स अवैध खनन का काम कर रहे थे|

इस बारे में यूपीपीसीबी और सोनभद्र के जिला मजिस्ट्रेट की संयुक्त जांच रिपोर्ट में जानकारी दी गई है कि वहां पर पर्यावरण नियमों की अनदेखी कर अवैध खनन का कारोबार चल रहा था|

गौरतलब है कि इससे पहले एनजीटी ने 19 दिसंबर, 2019 को एक आदेश जारी किया था, जिसमें पर्यावरण नियमों की अनदेखी करने पर इन खनन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया था| साथ ही इनको दी गई पर्यावरण मंजूरी को रद्द करने का निर्देश दिया था| इसके साथ ही कोर्ट ने कहा है कि इससे जुड़े जुर्माने की भरपाई अवैध खनन करने वालों से की जाए| साथ ही कोर्ट ने पर्यावरण की बहाली के लिए भी योजना तैयार करने को कहा है जिसके लिए मुआवजे की राशि का उपयोग करने को कहा है|

इस मामले में एनजीटी के आदेश पर कार्रवाई करते हुए यूपीपीसीबी द्वारा 9 अक्टूबर को एक रिपोर्ट दायर की गई थी| इस रिपोर्ट में कोर्ट को सूचित किया गया था कि मुआवजे के मुद्दे को अंतिम रूप दे दिया गया है|


बांका में रेत खनन मामले पर एनजीटी ने दिए जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश

एनजीटी ने 14 अक्टूबर को बिहार के बांका में रेत खनन पर एक ताजा जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया है। इस बाबत एनजीटी में दायर एक आवेदन के अनुसार बांका में रेत खनन के मामले पर 2018 में अंतरिम जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट (डीएसआर) तैयार की गई थी, लेकिन उसे आज तक अंतिम रूप नहीं दिया गया है|

इस नई डीएसआर रिपोर्ट को तैयार करने के लिए एनजीटी ने निर्देश दिया है कि इस डीएसआर को राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग या क्वालिटी कंट्रोल काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा मान्यता प्राप्त सलाहकारों के माध्यम से ही तैयार किया जाना चाहिए।

एनजीटी ने निर्देश दिया है कि इस डीएसआर को जिला मजिस्ट्रेट के पास प्रस्तुत करना होगा, जो डीएसआर का जिले के भौतिक और भौगोलिक विशेषताओं से संबंधित तथ्यों के संबंध में सत्यापन करेंगे। सत्यापन के बाद जिला मजिस्ट्रेट इस रिपोर्ट को जांच के लिए राज्य विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (एसईएसी) के पास भेजेंगे| यदि यह रिपोर्ट सभी वैज्ञानिक और तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा करती है तो एसईएसी उसे राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (एसईआईएए) के पास विचार और अनुमोदन के लिए भेजेंगे|

साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए पर्यावरण मंत्रालय द्वारा मान्यता प्राप्त सलाहकार या एजेंसी की भी मदद ली जाए| जिसे एसएसएमएमजी 2016 और इएमजीएसएम 2020 के तहत निर्धारित मानकों और प्रक्रियाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया जाना चाहिए|    


अवैध खनन मामले में 31 जनवरी तक रिपोर्ट प्रस्तुत करे राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड: एनजीटी

एनजीटी ने अवैध विस्फोट और खनन के खिलाफ कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (आरएसपीसीबी) को 31 जनवरी, 2021 तक का समय दिया है| मामला राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के पुर गांव का है| जहां मेसर्स जिंदल सॉ लिमिटेड द्वारा अवैध विस्फोट और खनन किया गया था|

इस मामले में राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 19 अगस्त, 2019 को एक रिपोर्ट प्रस्तुत की थी, जिसमें खनन के चलते आसपास की इमारतों में कंपन की बात को स्वीकार किया गया था। साथ ही रिपोर्ट में भवनों और अन्य जगहों पर पड़ने वाले असर की बात को स्वीकार किया था। इस रिपोर्ट में वहां पर 'टेल-टेल्स' (दरारों पर नजर रखने के लिए उपकरण) को लगाने की सलाह दी गई थी। इसके साथ ही खनन क्षेत्र को गांव से पहले ही अलग कर दिया गया है। साथ ही इस बाबत विशेषज्ञों की एक टीम को नियुक्त किया गया है।

इस मामले में 10 अक्टूबर, 2019 को एनजीटी ने भीलवाड़ा के जिला मजिस्ट्रेट को एक और रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। 

1 अक्टूबर 2020 को राज्य के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी एक रिपोर्ट से पता चला है कि इस मामले में भीलवाड़ा के जिला अध्यक्ष से एक और रिपोर्ट मिली है, जिसे सीएसआईआर - सीआईएमएफआर, बिलासपुर (सीजी), सीएसआईआर-सीबीआरआई, रुड़की और जल विज्ञान विभाग, आईआईटी, रुड़की द्वारा तैयार किया गया है।

वर्तमान में, सीएसआईआर-सीबीआरआई, रुड़की की टीम ने 28 सितंबर से गांव पुर के घरों में भू-तकनीकी जांच और दरार की निगरानी का काम फिर से शुरू किया है जिसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। रिपोर्ट में अनुरोध किया गया कि इस मामले में जारी अंतरिम रिपोर्ट को भी ध्यान में रखा जाए। साथ ही यह भी कहा है कि वर्तमान में महामारी के चलते अंतिम रिपोर्ट को प्रस्तुत करने करने में देरी हो रही है।