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प्लास्टिक वेस्ट प्रबंधन के प्रावधानों को लागू करने लिए जिम्मेदार होंगे अधिकारी

देश के विभिन्न अदालतों में विचाराधीन पर्यावरण से संबंधित मामलों में क्या कुछ हुआ, यहां पढ़ें –  

By Susan Chacko, Dayanidhi

On: Thursday 10 September 2020
 

 

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा प्लास्टिक वेस्ट प्रबंधन को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के समक्ष 9 सितंबर को एक हलफनामा दायर किया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने प्लास्टिक वेस्ट प्रबंधन के तहत उत्पादकों की जिम्मेदारी (एक्सटेंडेड प्रोडूसर्स रिस्पांसिबिलिटी) के लिए ड्राफ्ट यूनिफॉर्म फ्रेमवर्क बनाया है।

एक्सटेंडेड प्रोडूसर्स रिस्पांसिबिलिटी (ईपीआर) दिशानिर्देश के तहत ईपीआर प्रणाली को लागू करने के लिए उत्पादकों, आयातकों और ब्रांड मालिकों के लिए 3 अलग-अलग मॉडलों का सुझाव दिया गया है। यह वेब आधारित तरीका प्लास्टिक कचरे से निपटने, हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स) के लिए कई प्रकार के नए व्यापार के अवसर लाएगा।

मंत्रालय एक वेब आधारित पोर्टल के विकास के लिए एक आईटी एजेंसी नियुक्त करने की प्रक्रिया में है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट के माध्यम से एनजीटी को सूचित किया है कि प्रत्येक प्लास्टिक कैरी बैग और बहुस्तरीय पैकेजिंग पर निर्माता का नाम और पंजीकरण नंबर अंग्रेजी के मोटे अक्षरों में मुद्रित होगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्रदूषण नियंत्रण समिति के अधिकारी इन नियमों से संबंधित पंजीकरण, प्लास्टिक उत्पादों के निर्माण और बहुस्तरीय पैकेजिंग, प्रसंस्करण और प्लास्टिक कचरे के निपटान के प्रावधानों को लागू करने के लिए जिम्मेदार होंगे।

एनजीटी ने टीएनपीसीबी को मरीना समुद्र तट तक पहुंचने वाले प्रदूषण के स्रोतों पर सख्ती से निगरानी करने का दिया निर्देश

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने तमिलनाडु राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (टीएनपीसीबी) और संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर चेन्नई के मरीना समुद्र तट तक पहुंचने वाले प्रदूषण के स्रोतों पर सख्ती से निगरानी करने का निर्देश दिया है। जिसमें सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (एसटीपी) और कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट्स (सीईटीपी) से सीवेज और अन्य अपशिष्टों को छोड़ा जाना शामिल है।

यह आदेश संयुक्त समिति की रिपोर्ट के आधार पर है। जिसमें कहा गया था कि चेन्नई के मरीना बीच में भारी मात्रा में झाग (फोम) इकट्ठा हो रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार मरीना समुद्र तट पर झाग (फोम) के इकट्ठा होने के लिए निम्नलिखित कारण हो सकते हैं:

  • भारी बारिश के कारण नदी का प्रवाह बढ़ गया होगा, जिसके कारण तल पर जमा मलबे के तेजी से पानी के साथ मिलकर मिश्रण बना गया, जिसके कारण झाग इकट्ठा हो गई।
  • समुद्री घटना के भयावह होने का एक अन्य कारण अड्यार नदी जो समुद्र में मिलती है, नदी के तलछट में (कार्बनिक युक्त पदार्थ) हो सकते हैं।
  • चेन्नई रिवर रेस्टोरेशन ट्रस्ट (सीआरआरटी) द्वारा किया गया डिसिल्टिंग समुद्र तक पहुंच गया होगा।
  • विश्लेषण रिपोर्ट में झाग बनने और सामान्य दिन के पानी की गुणवत्ता में अंतर दिखाई दिया, जो बारिश के पानी और सीवेज के मिश्रण का संकेत देती है।  चेन्नई मेट्रो जल आपूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड (सीएमडब्ल्यूएसएसबी) में समुद्री झाग की घटना की तारीख से पहले वर्षा के दौरान हो सकता है कि नदी अडयार में संचालित नेसापक्कम में स्थित क्षमता 23 एमएलडी, 54 एमएलडी विस्तार 1 और 40 एमएलडी विस्तार - 2 के कॉमन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (सीएसटीपी) से अनुपचारित / आंशिक रूप से उपचार किए गए सीवेज को मिला दिया गया हो।

टीएनपीसीबी नेसापक्कम में सीईटीपी की निगरानी करेगा ताकि अड्यार नदी के संगम पर समुद्री झाग के फिर से बनने से बचा जा सके। इसके अलावा, सीईटीपी पर स्थापित फ्लो मीटर प्रभावी निगरानी के लिए टीएनपीसीबी ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम से जुड़ा होना चाहिए।

सिगरेट और बीड़ी बट्स के निपटान के लिए दिशानिर्देश जारी करे सीपीसीबी : एनजीटी

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और सोनम फेंटसो वांग्दी की दो सदस्यीय पीठ ने 9 सितंबर, 2020 को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को पर्यावरण के हित में, तीन महीने के अंदर, सिगरेट / बीड़ी बट्स के निपटान के लिए दिशानिर्देश जारी करने के निर्देश दिए।

23 सितंबर, 2015 को सार्वजनिक स्थानों पर तंबाकू के सेवन पर प्रतिबंध लगाने के अलावा, सिगरेट और बीड़ी बट्स के निपटान के प्रत्यक्ष नियमन के लिए एक याचिका दायर की गई थी।

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय,  स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, सीपीसीबी, तंबाकू बोर्ड और अन्य प्रतिवादियों को 28 सितंबर, 2015 को नोटिस जारी किया गया था।

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की प्रतिक्रिया में सिगरेट और बीड़ी बट्स खतरनाक के रूप में सूचीबद्ध नहीं थे। सेलूलोज़ एसीटेट, जो सेलूलोज़ को एसिटिक एसिड एस्टर में परिवर्तित करके तैयार किया जाता है, अनिवार्य रूप से एक बायोडिग्रेडेबल पदार्थ है। हालांकि, सेलूलोज़ एसीटेट का उपयोग करना ठीक नहीं है।

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च (आईआईटीआर) ने 9 जुलाई, 2020 को "सिगरेट और बीड़ी के बट्स जहरीले कचरे की श्रेणी में आते हैं या नहीं" इस पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत की है।

आईआईटीआर रिपोर्ट में कहा गया है कि सिगरेट / बीड़ी बट्स के विश्लेषण से पता चलता है कि विभिन्न मापदंडों की एकाग्रता के अनुसार - वे निर्धारित सीमा से कम हैं और मनुष्यों और पर्यावरण के लिए विषाक्त नहीं होंगे। हालांकि, सेलूलोज़ एसीटेट सिगरेट / बीड़ी बट्स का एक प्रमुख घटक है और इसके क्षरण के अध्ययन से पता चलता है कि यह लंबी अवधि तक बना रह सकता है।