वैज्ञानिकों ने खोजा, पौधे कैसे लेते हैं सांस और हमें कैसे हो सकता है फायदा

वैज्ञानिकों ने पाया कि पत्तों में छेद होते हैं, जिन्हें स्टोमेटा कहा जाता है। यह सांस की नली की तरह काम करता है

By DTE Staff

On: Thursday 27 June 2019
 
Photo: Creative Commons 12jav.net12jav.net

19 वीं सदी से माना जाता है कि पौधे सांस लेते हैं । लेकिन अब, इसके पीछे के तंत्र को भी खोज लिया गया है, जो सूखा प्रतिरोधी फसलों के विकसित होने का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

पत्तों में छेद होते हैं, जिन्हें स्टोमेटा कहा जाता है। जो हवा का एक आंतरिक नेटवर्क होता है। यह सांस की नली की तरह काम करता है। ऐसा छोटा मार्ग, जो हवा को इंसान और पशुओं के फेफड़ों की सतहों तक ले जाते हैं।

ब्रिटेन के शेफ़ील्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने आनुवंशिक हेरफेर तकनीकों का उपयोग किया और पाया कि इन छिद्रों के माध्यम से कार्बन डाइऑक्साइड का संचलन होता है। उन्होंने यह भी पाया कि जितना अधिक रंध्र एक पत्ता होता है, उतना ही अधिक वायु स्थान बनता है।

यह नई खोज वैज्ञानिकों के लिए गेहूं जैसी प्रधान फसलों को उनके पत्तों की आंतरिक संरचना में परिवर्तन करके और भी अधिक जल-कुशल बनाने की क्षमता प्रदान करती है। ताकि गेहूं को कम से कम पानी में उगाया जा सके। अध्ययन से यह भी पता चला है कि गेहूं के पौधों को इस तरह उगाहा जाना चाहिए कि जिससे उनके पत्ते सघन रहें और उन्हें उगाने के लिए कम पानी की जरूरत पड़े।

शेफ़ील्ड विश्वविद्यालय के सस्टेनेबल फूड इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक पहले से ही जलवायु-तैयार चावल और गेहूं विकसित कर चुके हैं जो अत्यधिक सूखे की स्थिति से भी बच सकते हैं।

नॉटिंघम विश्वविद्यालय और लैंकेस्टर विश्वविद्यालय के सहयोगियों के साथ वैज्ञानिकों ने एक्स-रे सीटी छवि विश्लेषण से जुड़े प्रयोगों का एक सेट का उपयोग किया। कुछ समय पहले, पौधे की विज्ञान में एक्स-रे सीटी, या कैट स्कैनिंग, का अनुप्रयोग मुख्य रूप से पौधे के छिपे हुए आधे हिस्से को देखने पर केंद्रित किया गया था।

वैज्ञानिकों ने अलग-अलग पत्तियों के साथ यह प्रयोग किया है।

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