Sign up for our weekly newsletter

वैज्ञानिकों ने बनाई नई प्रणाली, आधे घंटे पहले बता देगी कब और कहां गिरेगी बिजली

वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आधारित एक सरल और सस्ती प्रणाली विकसित करने में सफलता हासिल की है, जो 30 किलोमीटर के दायरे में कहीं भी बिजली गिरने का पूर्वानुमान आधा घंटा पहले ही लगा सकती है

By Lalit Maurya

On: Saturday 30 November 2019
 
Photo: Creative commons

आकाशीय बिजली प्रकृति की सबसे अप्रत्याशित घटनाओं में से एक है। जिसके चलते हर वर्ष हजारो लोगों और मवेशियों को अपनी जान गंवानी पड़ती है । साथ ही यह बड़े पैमाने पर घरों और जंगलों में लगने वाली आग के लिए जिम्मेदार होती है। इससे ने केवल बिजली की लाइनोंबल्कि सौर और पवन ऊर्जा संयंत्रों एवं अन्य संरचनाओं को भी नुकसान पहुंचता है । इसके चलते अनेकों बार विमानों को अकस्मात् जमीन पर उतरना पड़ता है। हालांकि, बिजली क्यों गिरती है इसके बारे में बहुत ही कम लोग जानते हैं और बिजली कब और कहां गिरेगी इसका पूर्वानुमान करने की कोई सटीक और सरल तकनीक अब तक उपलब्ध नहीं है।

स्विट्जरलैंड में इकोल पॉलीटेक्निक फेडरल डि लौसाने (ईपीएफएल) के शोधकर्ताओं ने फरहाद रशीदी के नेतृत्व में एक ऐसी सरल और सस्ती प्रणाली विकसित करने का दावा किया है, जो 30 किलोमीटर के दायरे में करीब आधा घंटा पहले ही इस बात का पूर्वानुमान कर सकती है कि बिजली कहां गिरने वाली है। उनकी यह प्रणाली मौसम संबंधी डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर आधारित है। इस सन्दर्भ में व्यापक शोध अंतराष्ट्रीय जर्नल क्लाइमेट एंड एटमॉस्फियरिक साइंस में प्रकाशित हुआ है।इस तकनीक को विकसित करने वाले शोधकर्ताओं में से एक आमिर हुसैन मुस्तजाबी ने बताया कि, ‘‘बिजली को मापने की मौजूदा प्रणालियां  धीमी और बहुत जटिल है तथा उनके लिए रडार या उपग्रह से आंकड़े लेने होते हैं, जो महंगा पड़ता है। जबकि हमारी यह प्रणाली किसी भी मौसम स्टेशन से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर काम करती है । जिसकी वजह से हम ऐसे दूरदराज के क्षेत्रों की भी निगरानी कर सकते हैं जो रडार और सैटेलाइट की रेंज से बाहर हैं और जहां संचार सम्बन्धी नेटवर्क उपलब्ध नहीं है।"महत्वपूर्ण है कि इसमें डेटा आसानी से रियल टाइम में प्राप्त किया जा सकता है, जिससे बहुत तेजी से पूर्वानुमान किए जा सकते हैं और तूफान के बनने से पहले ही अलर्ट जारी किया जा सकता है।

कैसे काम करती है यह प्रणाली

ईपीएफएल की यह तकनीक मशीन-लर्निंग एल्गोरिथ्म की सहायता से बिजली गिरने का पूर्वानुमान करती है । जिसके लिए यह चार प्रकार के मापदंडों वायुमंडलीय दबाव, हवा के तापमान, सापेक्ष आर्द्रता और हवा की गति पर निर्भर करती है । जब बिजली गिरने की परिस्थियों सम्बन्धी शर्तों का इन मापदंडों के आंकड़ों से मिलान किया जाता है तो उसके विश्लेषण से बिजली के बनने और गिरने के स्थान का पता लगाया जा सकता है । अध्ययन के अनुसार एक बार सिस्टम जब इन सबका विश्लेषण कर लेता है तो इसके जरिये लगाया गया पूर्वानुमान 80 फीसदी तक सही पाया गया ।वैज्ञानिकों के अनुसार यह पहली बार है जब एक सरल मौसम संबंधी आंकड़ों पर आधारित प्रणाली रियल टाइम में गणना करके बिजली गिरने की भविष्यवाणी करने में सक्षम है। यह प्रणाली एक जटिल और अप्रत्याशित घटना की भविष्यवाणी करने का एक सरल तरीका प्रदान करती है।