Sign up for our weekly newsletter

ला नीना के बाद भी गर्म रही फरवरी, भारत में भी सामान्य से ज्यादा रहा तापमान

यदि इस महीने के वैश्विक औसत तापमान की बात करें तो वो 20 वीं सदी के औसत से करीब 0.65 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था| इस हिसाब से फरवरी 2021 इतिहास का 16वां सबसे गर्म फरवरी था 

By Lalit Maurya

On: Monday 15 March 2021
 

उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में बनी ला नीना के बावजूद 2021 में फरवरी का महीने में वैश्विक औसत तापमान 20वीें सदी के औस्त से लगभग 0.65 डिग्री अधिक रिकॉर्ड किया गया। हालांकि 2014 के बाद यह पहला मौका है जब फरवरी 2021 का औसत तापमान कम रहा है। नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (एनओएए) द्वारा जारी विज्ञप्ति के मुताबिक इस वर्ष फरवरी का महीना इतिहास का 16वां सबसे गर्म फरवरी था।

एनओएए के मुताबिक, इस वर्ष फरवरी के मौसम में काफी विविधता देखी गई। उत्तरी गोलार्ध में इस बार सर्दियों का मौसम (दिसंबर से फरवरी) इतिहास का 8वां सबसे गर्म सर्दियों का मौसम था। इसी तरह यदि सिर्फ फरवरी के महीने को देखें तो इस बार फरवरी का महीना उत्तरी गोलार्ध के लिए 14वां सबसे गर्म फरवरी था जबकि दक्षिणी गोलार्ध के लिए यह 19वां सबसे गर्म फरवरी था। उत्तरी अमेरिका में 1994 के बाद सबसे ज्यादा ठंडा फरवरी दर्ज किया गया है। इसी तरह ओशिनिया में भी 2012 के बाद सबसे ज्यादा ठंडा फरवरी था।

पूर्वी कनाडा, अधिकांश यूरोप और दक्षिण और पूर्वोत्तर एशिया में इस बार फरवरी का महीना सामान्य से कुछ ज्यादा ही गर्म था। वहीं इसके विपरीत उत्तरी एशिया, स्कैंडिनेविया और उत्तरी अमेरिका के अधिकांश हिस्सों में तापमान औसत से काफी कम रिकॉर्ड किया गया था। गौरतलब है कि इन हिस्सों में इस बार तापमान औसत से 3 डिग्री सेल्सियस कम दर्ज किया गया है। 

उत्तरी अमेरिका में यह चौथा मौका है जब इस बार फरवरी में इतनी ज्यादा बर्फ रिकॉर्ड की गई है जबकि यूरेशिया में यह 14वां ऐसा मौका है जब सबसे कम बर्फ दर्ज की गई है। आर्कटिक में भी सातवीं बार ऐसा हुआ है जब इतनी कम बर्फ रिकॉर्ड हुई है। इसी तरह अंटार्कटिका में भी यह 11 वां मौका है जब बर्फ की चादर इतनी पतली है। 

0.72 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा जनवरी और फरवरी का औसत तापमान

वैश्विक स्तर पर इस बार दिसंबर से फरवरी के बीच सर्दियों का मौसम अब तक का 8 वां सबसे गर्म सर्दियों का मौसम था। इसी तरह उत्तरी गोलार्ध के लिए भी यह 8वां सबसे गर्म सर्दियों का मौसम था। वहीं दक्षिणी गोलार्ध के लिए यह 19वां सबसे गर्म, गर्मियों का मौसम था, जब तापमान 1973 और 2009 के बराबर था। यदि 2021 में जनवरी और फरवरी के तापमान को देखें तो इस वर्ष का औसत तापमान, 20 वीं सदी के औसत तापमान से  0.72 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था। जो इसे अब तक का 11वां सबसे गर्म वर्ष बनाता है।

हाल ही में एनओएए के नेशनल सेंटर्स फॉर एनवायर्नमेंटल इनफार्मेशन द्वारा जारी रिपोर्ट से पता चला है कि जनवरी 2021 इतिहास की 7वीं सबसे गर्म जनवरी थी। आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष जनवरी का औसत तापमान सदी के औसत तापमान से 0.8 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था। जबकि यदि अफ्रीका को देखें तो उसके लिए जनवरी 2021, इतिहास की सबसे गर्म जनवरी थी।

तापमान में हो रही इस वृद्धि से भारत भी अछूता नहीं है। इस बार भारत में भी सर्दियों का मौसम सामान्य से ज्यादा गर्म था| भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के राष्ट्रीय मौसम पूर्वानुमान केंद्र द्वारा जारी रिपोर्ट से पता चला है कि सर्दी के मौसम का औसत तापमान सामान्य से करीब 0.78 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था| इस बार जनवरी और फरवरी का औसत तापमान 21.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है| यह पिछले सौ वर्षों में तीसरा ऐसा मौका है जब तापमान में इतनी ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है| इससे पहले 2016 में सर्दियों का अब तक का सबसे ज्यादा तापमान 21.8 दर्ज किया गया था, तब तापमान में बढ़ोतरी सामान्य से 1.15 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज की गई थी| वहीं यह 2009 में 21.6 रिकॉर्ड किया गया था|

विशेषतौर पर उत्तर पश्चिमी भारत में फरवरी के दौरान अधिकतम और औसत तापमान सामान्य से कहीं ज्यादा दर्ज किया गया है| जहां फरवरी में औसत तापमान सामान्य से 2.11 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था| इसी तरह देश के इस हिस्से में अधिकतम तापमान सामान्य से 2.94 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया| गौरतलब है कि सर्दियों के मौसम में यह देश के इस हिस्से में 1901 के बाद से दूसरा सबसे अधिक तापमान है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा जारी रिपोर्ट से पता चला है कि 2020 भारतीय इतिहास का आठवां सबसे गर्म वर्ष था। इस वर्ष तापमान सामान्य से 0.29 डिग्री सेल्सियस अधिक रिकॉर्ड किया गया था। गौरतलब है कि 2016 में अब तक का सबसे अधिक तापमान रिकॉर्ड किया गया था। जब तापमान 1980 से 2010 के औसत की तुलना में  0.71 डिग्री सेल्सियस अधिक था।