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जानिए क्या है लू या हीट वेव, इसका आपके स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है?

अप्रैल का महीना आते ही कुछ इलाकों में लू चलने की खबरें आने लगी हैं

By Dayanidhi

On: Thursday 01 April 2021
 
Manufacturing plants produce about two per cent less revenue for every one degree Celsius rise in annual temperature. Photo: Vikas Choudhary

देश के कुछ हिस्सों में इस साल मार्च के महीने से ही गर्मी कहर बरपाने लगी है, हर साल उत्तरोत्तर बढ़ती गर्मी अपना ही रिकॉर्ड तोड़ती जा रही है। यह बढ़ती गर्मी हीट वेव या लू की घटनाओं को जन्म देती है।

पिछले कुछ वर्षों से हीट वेव की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, इन घटनाओं ने हम सभी को प्रभावित किया है। हीट वेव या लू को लेकर आपके मन में भी बहुत सारे सवाल होंगे, आइए इस पहले भाग में जानते हैं उनमें से कुछ सवालों के जवाब

लू या हीट वेव क्या है?

हीट वेव अत्यधिक गर्म मौसम की अवधि है जो आमतौर पर दो या उससे अधिक दिनों तक रहती है। जब तापमान किसी दिए गए क्षेत्र के ऐतिहासिक औसत से अधिक हो जाता है तो उसे हीट वेव या लू कहते हैं।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, जब  मैदानी इलाकों का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक और पहाड़ी क्षेत्रों का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है तो लू चलने लगती है। यदि तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, तो इसे खतरनाक लू की श्रेणी में रखा जाता है। तटीय क्षेत्रों में जब तापमान 37 डिग्री सेल्सियस हो जाता है तो हीट वेव चलने लगती है।

हीट वेव कैसे बनती है?

हीट वेव आमतौर पर रुकी हुई हवा की वजह से होती है। उच्च दबाव प्रणाली हवा को नीचे की ओर ले जाती है। यह शक्ति जमीन के पास हवा को बढ़ने से रोकती है। नीचे बहती हुई हवा एक टोपी की तरह काम करती है। यह गर्म हवा को एक जगह पर जमा कर लेती है। हवा के चले बिना, बारिश नहीं हो सकती है, गर्म हवा को और गर्म होने से रोकने के लिए कोई उपाय नहीं होता है।

भारत में कब चलती है हीट वेव?

हीट वेव मुख्य रूप से मार्च से जून के दौरान और कुछ दुर्लभ मामलों में यह जुलाई में भी चल सकती है। भारत में सबसे अधिक हीट वेव मई के महीने में चलती है।

भारत में हीट वेव वाले राज्य कौन-कौन से हैं?

हीट वेव की घटना आमतौर पर मार्च से जून के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत, मध्य, पूर्व और उत्तर प्रायद्वीपीय भारत के मैदानी इलाकों में होती है। इसमें पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ हिस्से, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना शामिल हैं। कभी-कभी यह तमिलनाडु और केरल में भी चलती है। लेकिन अब कुछ हिमालयी राज्याें में भी लू अपना असर दिखाने लगी है।

हीट वेव से स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है?

हीट वेव या लू की घटनाएं मानव और पशु जीवन को नुकसान पहुंचाती हैं। हीट वेव आमतौर पर शरीर में पानी की कमी, थकावट होना, कमजोरी आना, चक्कर आना, सिरदर्द, मतली, उल्टी, मांसपेशियों में ऐंठन और पसीना होना और लू लगना या हीट स्ट्रोक आदि शामिल हैं। हीट वेव की वजह से मानसिक तनाव भी हो सकता है। लू लगने के लक्षणों में  गर्मी से शरीर में अकड़न, सूजन बेहोशी और बुखार भी आ सकता है। यदि शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या इससे अधिक होता है तो दौरे पड़ सकते हैं या इंसान कोमा में भी जा सकता है।

कैसे बचें हीट वेव से और अधिक जानकारी के लिए पढ़े अगला भाग