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इंसान की बढ़ती लालसा का शिकार हुईं 85 फीसदी प्रजातियां

पर्यावरण पर इंसान के बढ़ते हस्तक्षेप के कारण खतरे में हैं, जमीन पर रहने वाले रीढ़दार जीवों की 17,500 से अधिक प्रजातियां

By Lalit Maurya

On: Tuesday 14 January 2020
 
Photo: Anil Agarwal
Photo: Anil Agarwal Photo: Anil Agarwal

यह अध्ययन जमीन पर रहने वाली 20,529 से अधिक रीढ़दार जीवों की प्रजातियों पर किया गया है। जिसके अनुसार पर्यावरण पर बढ़ता मानवीय हस्तक्षेप इन जीवों के जीवन को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। अध्ययन के अनुसार इन जीवों की करीब 85 फीसदी प्रजातियों पर खतरा बढ़ता जा रहा है। यह शोध वाइल्डलाइफ कंज़र्वेशन सोसाइटी और यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड द्वारा किया गया है। जिसके लिए उन्होंने मानव हस्तक्षेप के सबसे व्यापक डाटासेट का उपयोग किया है।

शोध से प्राप्त आंकड़े दर्शाते हैं कि 20,529 में से करीब 85 फीसदी (17,517) प्रजातियां और उनका आवास मानव हस्तक्षेप का भारी दबाव झेल रहा है। जबकि 16 फीसदी (3,328 ) प्रजातियों पर यह असर साफ देखा जा सकता है।

विश्लेषण के अनुसार जमीन पर रहने वाले रीढ़दार जीवों की प्रजातियों पर यह खतरा कहीं अधिक बढ़ गया है। साथ ही छोटे-छोटे समूह में रहने वाली प्रजातियों पर यह खतरा स्थान के अनुसार कहीं कम तो कहीं ज्यादा है। इसमें 2,478 ऐसी प्रजातियां हैं जिनको 'बहुत ज्यादा चिंता न करने' की श्रेणी में रखा गया है, पर शोध दिखता है, कि उनमें से कई खतरे वाली श्रेणी में पड़ने वाली प्रजातियों के साथ आवास साझा करती हैं। जिसका साफ मतलब है कि मानव हस्तक्षेप के चलते उनकी संख्या में भी गिरावट आ सकती है।

जीवों के विनाश के लिए, विकास की बढ़ती भूख है जिम्मेदार

वैज्ञानिकों ने मानव हस्तक्षेप के अंतर्गत आबादी और उसके आवास के घनत्व, यातायात (जैसे सड़क, रेल), भूमि-उपयोग (जैसे शहरीकरण, कृषि, वानिकी, खनन, बड़े बांध), ऊर्जा सम्बन्धी संरचना के प्रभावों का अध्ययन किया है। यह कारक मौजूदा प्रजातियों के विलुप्त होने के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार माने जाते हैं।

वैज्ञानिकों के अनुसार हालांकि अध्ययन के नतीजे चिंताजनक हैं। पर इसकी मदद से खतरे में पड़ी प्रजातियों को बचाने के नए रास्ते तलाशे जा सकते हैं।  उदाहरण के लिए इससे प्राप्त आंकड़ें जैव विवधता को बचाने के लिए अपनाये गए 2020 एची टार्गेट्स को हासिल करने में मदद कर सकते हैं। साथ इसकी मदद से वर्तमान में जीवों को बचाने की दिशा में हो रही प्रगति का भी आंकलन किया जा सकता है। यह लक्ष्य 12, जोकि जीवों को विलुप्त होने से बचाने और लक्ष्य 5, जो उनके प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित रखने से संबंधित है, को हासिल करने में विशेष रूप से मदद कर सकता है।

इस शोध के प्रमुख अध्ययनकर्ता और क्वींसलैंड विश्वविद्यालय के क्रिस्टोफर ओ' ब्रायन ने बताया कि "इस शोध से पता चलता है कि आज जमीन पर रहने वाले रीढ़दार जीव बड़े पैमाने पर मानवीय हस्तक्षेप का शिकार बन रहें हैं। आज कृषि से लेकर बढ़ते शहरीकरण के चलते धरती पर कोई भी स्थान उनके लिए सुरक्षित नहीं है।"