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विलुप्ति के कगार पर पहुंची 100 से अधिक प्रजातियों को बचाया जा सकता है

एक नए अध्ययन में कहा गया है कि 102 प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर है, यदि समय रहते कार्रवाई की जाय तो इन प्रजातियों को बचाया जा सकता है।

By Dayanidhi

On: Monday 30 November 2020
 
More than 100 species on the verge of extinction
Sockeye Salmon Sockeye Salmon

यह मानव इतिहास में पहली बार है जब दुनिया की आधी से अधिक आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती है, जहां 2030 तक 500 करोड़ से अधिक लोगों के बसने की उम्मीद है। बढ़ती मानव आबादी जैविक विविधता वाले क्षेत्रों में रहते हैं और लगातार विस्तार के कारण जीवों के निवास स्थान को खतरे में डालते हैं, जिससे जैवविविधता विलुप्त होने के कगार पर पहुंच जाती है और इससे छठे बड़े पैमाने पर विलुप्त होने का संकेत मिलता है।

दुनिया के अधिकांश बड़े शहर तटीय क्षेत्रों में बसे हैं, जिनमें 70 फीसदी से अधिक का निर्माण नदियों, समुद्र के किनारे पर हुआ है। जिसने तटीय क्षेत्रों की जैवविविधता को प्रभावित किया है।

एक नए अध्ययन में कहा गया है कि 102 प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर है। यदि समय रहते कार्रवाई की जाय तो इन प्रजातियों को बचाया जा सकता है। यह जगह ब्रिटिश कोलंबिया में फ्रेजर नदी का मुहाना है जहां इन प्रजातियों का निवास स्थान है।

यूनिवर्सिटी ऑफ़ ब्रिटिश कोलंबिया (यूबीसी) में संरक्षण विज्ञान के एक प्रोफेसर कहते हैं कि वर्तमान में उन्हें बचाने के लिए कोई विशेष योजना नहीं है। अगर हम जल्दी से कार्रवाई नहीं करते हैं, तो सैल्मन और दक्षिण निवासी व्हेल सहित कई अन्य प्रजातियों के अगले 25 वर्षों में विलुप्त होने की आशंका है।

फ्रेजर मुहाना उत्तरी अमेरिका के प्रशांत तट पर सबसे बड़ा क्षेत्र है। ब्रिटिश कोलंबिया के निचले मुख्य भूभाग में 30 लाख से अधिक लोग फ्रेजर नदी के पास रहते हैं। उनमें से कई अपनी आजीविका, संस्कृति और कल्याण के लिए इन प्रजातियों और पारिस्थितिकी प्रणालियों पर भरोसा करते हैं।

मार्टिन और उनकी टीम द्वारा विकसित प्रायोरिटी थ्रेट मैनेजमेंट नामक संरक्षण फ्रेमवर्क को लागू करते हुए, अध्ययनकर्ताओं ने पारिस्थितिकीय और प्रजातियों के प्रबंधन के लिए 65 से अधिक विशेषज्ञों को जोड़ा है, जो संरक्षण कार्यों की पहचान करने के लिए फ्रेज़र नदी के मुहाने का उपयोग करते हैं, प्रजातियों का पुन: विकास करने में अहम भूमिका निभाते हैं। यह अध्ययन कन्सेर्वटिव साइंस एंड प्रैक्टिस में प्रकाशित हुआ है।

इस योजना में एक पर्यावरण प्रशासन निकाय का कार्यान्वयन शामिल है, जो इन रणनीतियों को लागू करने के लिए नगर पालिकाओं, गैर सरकारी संगठनों और उद्योग के साथ मिलकर काम करते हैं। शोध में पाया गया है कि सह-शासन प्रबंधन रणनीतियों को बढ़ाकर, शहरी क्षेत्रों में संरक्षण की सफलता को बढ़ाया जा सकता है।

आज लोग उच्च जैव विविधता वाले क्षेत्रों में बस गए हैं। ये क्षेत्र जैव-विविधता के साथ हमारे सबसे बड़े शहरी केंद्रों का घर हैं। जहां से जैव-विविधता के लिए अधिकतर खतरे बढ़ रहे हैं। विक्टोरिया विश्वविद्यालय और यूबीसी विश्वविद्यालय में पोस्टडॉक्टरल फेलो के रूप में काम करने वाले लौरा केहो का कहना है कि अगर हम अभी से कार्य करना शुरू करते हैं तो इन प्रजातियों को बचाने में अभी भी बहुत देर नहीं हुई है।

केवल 25 सालों तक 38.1 करोड़ (381 मिलियन) डॉलर की कमाई या इसको हमेशा बनाए रखहने के लिए 1.5 करोड़ (15 मिलियन) डॉलर जो जलीय जीवों के स्थान की बहाली और ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर और सार्वजनिक भूमि प्रबंधन के लिए परिवहन नियमन से लेकर रणनीतियों में निवेश करना हैं। 

अध्ययनकर्ता ने माना कि ऐसे क्षेत्रों के भीतर प्रजातियों के संरक्षण के लिए प्रबंधन रणनीतियों की पहचान करना, और उनके कार्यान्वयन की निगरानी के लिए प्रभावी शासन सुनिश्चित करने में भारी चुनौतियां हैं।

मार्टिन ने कहा कि केवल हम इस क्षेत्र से इन प्रजातियों को विलुप्त होने के खतरे उठाते हैं, बल्कि इन संरक्षण कार्यों में निवेश करने का लाभ बहुत बड़ा है जिसे भी हम खो सकते हैं। उदाहरण के लिए ऐतिहासिक रूप से 25 वर्षों के लिए 40 से अधिक पूर्णकालिक नौकरियां पैदा करने के साथ, एक फ्रेजर सैल्मन मछली का मूल्य प्रति वर्ष 38.1 करोड़ (381 मिलियन) डॉलर से अधिक है, और व्हेल देखने के लिए आने वाले लोगों से 2.6 करोड़ (26 मिलियन) डॉलर से अधिक है। यदि इन प्रजातियों की संपन्न आबादी का नुकसान हो जाता हैं, तो हम इन उद्योगों को भी खो देगें। हमारा अध्ययन बताता है कि संरक्षण में निवेश से रोजगार और आर्थिक अवसर पैदा होते हैं।

अध्ययन में पाया गया कि भविष्य के प्रमुख औद्योगिक विकास, जिसमें विवादास्पद ट्रांस माउंटेन पाइप लाइन और रॉबर्ट्स बैंक पोर्ट टर्मिनल विस्तार शामिल हैं, दक्षिणी रेजिडेंट किलर व्हेल, सैल्मन और स्टर्जन और प्रवासी पश्चिमी सैंडपाइपर सहित इन प्रजातियों में से कई के भविष्य को खतरे में डालते हैं।

अध्ययन में निष्कर्ष है कि दुनिया भर में जैव विविधता संरक्षण के लिए तत्काल रणनीतिक योजना, इस पर ध्यान देने और बड़े पैमाने पर निवेश की आवश्यकता है।