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पिछले 50 वर्षों में 70 फीसदी से ज्यादा घटी शार्क और रे मछलियों की आबादी

समुद्री शार्क की 31 में से 16 प्रजातियां गंभीर खतरे में हैं जबकि तीन प्रजातियों समुद्री वाइटटिप शार्क, स्कैलप्ड हैमरहेड शार्क और ग्रेट हैमरहेड शार्क पर विलुप्त होने का गंभीर संकट मंडरा रहा है

By Lalit Maurya

On: Thursday 28 January 2021
 

1970 के बाद से शार्क और रे मछलियों की वैश्विक आबादी में करीब 71.1 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। शोधकर्ताओं ने इसके लिए मछलियों के बढ़ते शिकार को जिम्मेवार माना है। अनुमान है कि जिस तरह से 1970 के बाद से मछलियों के शिकार में इजाफा हुआ है उसके चलते शार्क और रे पर पड़ने वाला दबाव 18 गुना तक बढ़ चुका है।

यह स्पष्ट तौर पर इंसान के प्रकृति पर बढ़ते हस्तक्षेप को स्पष्ट करता है। गौरतलब है कि शोधकर्ताओं ने पहली बार इतने बड़े पैमाने पर समुद्री जीवन को हो रहे नुकसान की बात कही है। जिसके कारण कई प्रजातियां विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी हैं। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंज़र्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) के मुताबिक आज जीवों पर दबाव इस कदर बढ़ चुका है कि दुनिया की तीन चौथाई संकटग्रस्त प्रजातियों पर विलुप्त होने का खतरा मंडराने लगा है।

हालांकि वैज्ञानिक दशकों से इस बात को जानते हैं कि शार्क की कोई न कोई प्रजाति घट रही है, लेकिन 57 वैश्विक डेटासेट पर आधारित इस शोध से पता चला है कि पिछली करीब आधी सदी में दुनिया की अनगिनत शार्क प्रजातियों की आबादी नाटकीय ढंग से कम हो रही है। पता चला है कि समुद्री शार्क की 31 में से 16 प्रजातियां गंभीर खतरे में हैं जबकि इनकी तीन प्रजातियों समुद्री वाइटटिप शार्क, स्कैलप्ड हैमरहेड शार्क और ग्रेट हैमरहेड शार्क पर विलुप्त होने का गंभीर संकट मंडरा रहा हैयह शोध अंतराष्ट्रीय जर्नल नेचर में प्रकाशित हुआ है।

क्यों ख़त्म हो रही हैं यह मछलियां

जहाज से टकराने, तेल और गैस ड्रिलिंग और जलवायु संकट से भी शार्क और रे प्रभावित हो रही हैं, पर शोधकर्ताओं का मानना है कि इनके खत्म होने में मछलियों का अधिक पैमाने पर शिकार सबसे बड़ी वजह है। आमतौर पर इन मछलियों को जानबूझकर नहीं पकड़ा जाता पर अनजाने में ही यह सबसे पहले जाल में फंस जाती हैं। हालांकि कई जगहों पर इन्हें इनके मीट, गिल, लिवर ऑइल, फिन और सूप बनाने के लिए पकड़ा जाता है।

1950 से 2018 के बीच देखें तो समुद्र में मछली पकड़ने के बेड़ों की संख्या दोगुनी हो चली है जिसका असर समुद्री जीवन पर पड़ रहा है।

जलवायु परिवर्तन की भी है बड़ी भूमिका

हाल ही में जर्नल नेचर साइंटिफिक रिपोर्ट में छपे एक शोध से पता चला है कि जैसे-जैसे समुद्र का तापमान बढ़ रहा है उसका असर यहां रहने वाले जीवों पर पड़ रहा है। समुद्री तापमान में आने वाले इस बदलाव के चलते शार्क मछलियों के बच्चे समय से पहले ही जन्म ले रहे हैं साथ ही उनमें पोषण की कमी भी दर्ज की गई है। जिस वजह से उनका जिन्दा रहना और मुश्किल होता जा रहा है। इसका असर उनके आकार पर भी पड़ रहा है जो पहले से घट गया है। 2013 में डलहौसी यूनिवर्सिटी, कनाडा द्वारा किए एक शोध के अनुसार हर साल करीब 10 करोड़ शार्कों को मार दिया जाता है। अनुमान है कि यह दुनिया भर में शार्क का करीब 7.9 फीसदी है।

यदि इन मछलियों की शारीरिक बनावट देखें तो इनके शरीर में कंकाल, हड्डियों की जगह कार्टिलेज से बना होता है। इस वजह से अन्य मछलियों के विपरीत इनके परिपक़्व अवस्था में पहुंचने में कई साल लगते हैं। यही वजह है कि इनकी आबादी बहुत धीरे-धीरे बढ़ती है। इस शोध से जुड़े प्रमुख शोधकर्ता नाथन पेकोरिउ के अनुसार “इन मछलियों का प्रजनन काफी हद तक स्तनधारियों की तरह होता है, जो इनके लिए हानिकारक होता है। इस वजह से इनकी आबादी तेजी से नहीं बढ़ती है।”

दुनिया भर में शार्क को उसके हमलावार स्वाभाव के लिए जाना जाता है पर इसके साथ ही वो समुद्र के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बहुत जरुरी भी होती हैं। वह एक महत्वपूर्ण समुद्री शिकारी है, जो समुद्र के इकोसिस्टम को स्वस्थ बनाए रखती हैं। इन शिकारियों के बिना पूरा इकोसिस्टम ही नष्ट हो सकता है। ऐसे में यह मछलियां हमारे पर्यावरण के लिए बहुत मायने रखती हैं और इन जीवों को बचाना भी जरुरी है।