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सांभर झील: पर्यटन विकास से बढ़ा पक्षियों के लिए खतरा

18 हजार से अधिक पक्षियों की मौत के लिए जिम्मेवार सांभर झील में लगातार पयर्टन विकास की योजनाएं चलाई जा रही हैं, इसका नुकसान पक्षियों को झेलना पड़ रहा है। 

On: Monday 25 November 2019
 
सांभर झील में मरे पक्षियों को इकट्ठा करता एक युवक। फोटो: माधव शर्मा
सांभर झील में मरे पक्षियों को इकट्ठा करता एक युवक। फोटो: माधव शर्मा सांभर झील में मरे पक्षियों को इकट्ठा करता एक युवक। फोटो: माधव शर्मा

माधव शर्मा 

राजस्थान की सबसे बड़ी सांभर झील में 18 हजार से अधिक पक्षियों की मौत हो चुकी है। मोटे तौर पर उनकी मौत के लिए एवियन बोट्यूलिज्म (एक तरह का वायरस) को जिम्मेवार माना ज रहा है, लेकिन पक्षियों की मौत से पहले से झील अपनी मौत मर रही है। इसके कारणों की पड़ताल करती एक विशेष रिपोर्ट डाउन टू अर्थ में आप पढ़ रहे हैं। पहली कड़ी में आपने पढा कि झील की मौत की पटकथा 25 साल पहले लिखी गई थी। दूसरी कड़ी में आपने पढ़ा कि पर्याप्त बारिश के बावजूद क्यों झील सूख गई। पढ़ें, तीसरी कड़ी- 

राज्य और केन्द्र सरकार सांभर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना चाहती है। केन्द्र सरकार ने स्वदेश दर्शन योजना के तहत केन्द्र ने मरुस्थल परिपथ में चिन्हित की गई सांभर के विकास के लिए 63.96 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं। इसमें से 51.17 करोड़ रुपए जारी कर दिए गए हैं। इस पैसे से सांभर में नेरोगेज ट्रेन ट्रैक, प्लेटफॉर्म और सर्किट हाउस में विकास कार्य कराए गए हैं। पर्यटन बढ़ाने के लिए तैयार केन्द्र सरकार की नेशनल लेक कंजर्वेशन प्लान में सांभर झील का नाम भी नहीं है। 

बीते कुछ सालों में सांभर ने सुपर-30, पीके और बादशाह जैसी फिल्मों की शूटिंग होने से पर्यटकों को अपनी ओर खींचा है। सरकार ने इस पर्यटन को बढ़ाने के लिए सांभर में मेला ग्राउंड, सांस्कृतिक सेंटर, होटल और शॉपिंग पैलेस तैयार कराए हैं। 

सरकार का प्लान है कि झील में से 10 करोड़ रुपए की लागत से बनाई गई नेरोगेज ट्रेन से पर्यटकों को पक्षियों और झील को दिखाया जाए, लेकिन इससे वहां होने वाले शोर से पक्षियों की एकांतता और उन पर पर्यटन के होने वाले परिणामों की चिंता नहीं की है। हालांकि उद्घाटन नहीं होने के कारण ट्रेन का संचालन फिलहाल बंद है।

पक्षीविद् डॉ. हर्षवर्धन पर्यटन विकास पर कहते हैं, ‘वहां पर्यटक आएं, लेकिन अगर इससे पक्षियों को परेशानी होती है तो यह खतरनाक है। ये ठीक वैसा ही है कि कोई आपके घर में आपकी मर्जी के बिना रहने लग जाए।इसीलिए सरकार को वेटलैंड नियमों का ध्यान रखते हुए वहां कोई एक्शन प्लान बनाना चाहिए।’ 

सांभर झील में पक्षियों की मौत, अतिक्रमण, बिना प्लानिंग के पर्यटन सहित सभी समस्याओं को वन विभाग के चीफ वाइल्ड लाइफ वॉर्डन डॉ. अरिंदम तोमर स्वीकार करते हैं। वे कहते हैं, ‘यह बात ठीक है कि वेटलैंड नियमों के हिसाब से सांभर में सब कुछ ठीक नहीं है, लेकिन सांभर में ना तो वन विभाग की भूमि है और ना ही कोई अन्य संपत्ति। यहां प्रवासी पक्षियों की मौत हुई है इसीलिए यह वन विभाग की जिम्मेदारी है कि कारणों का पता लगाए। सरकार भी इसमें काफी गंभीर है। फिलहाल हम पक्षियों की मौत के कारणों का पता लगा रहे हैं, लेकिन धीरे-धीरे सांभर को वेटलैंड नियमों के अनुसार बनाया जाएगा।

वहीं, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 19 नवंबर को कहा कि, ‘मैंने सांभर झील सहित प्रदेश के अन्य वेटलैंड्स के संरक्षण एवं संवर्द्धन कार्यों के लिए राज्य स्तरीय वेटलैंड अथॉरिटी को शीघ्र क्रियाशील करने के निर्देश दिए हैं। इसमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की मदद भी ली जाएगी। जिससे जैव विविधता का संवर्धन हो सकेगा।

यह है सांभर झील का ओरिजनल नक्शा। फोटो: माधव शर्मा

आखिर समाधान क्या?

डॉ. हर्षवर्धन कहते हैं, झील से ब्राइन की चोरी, निजी होटल मालिकों पर रोक लगाकर वेडलैंड नियम 2010 को प्रभावी तरीके से लागू किया जाए। पक्षियों की मौत की तह तक जाकर उसे दूर किया जाना चाहिए। झील के पूरे एरिया को सरकार अपने कब्जे में ले। 

वहीं, डॉ. जीतेन्द्र का मानना है कि अगर झील को जिंदा रखना है तो वहां हो रही सभी गैर-कानूनी कामों पर रोक लगाई जाए। साथ ही झील में आने वाले पानी के प्राकृतिक स्त्रोतों को फिर से चालू किया जाना चाहिए ताकि वहां बारिश का पानी बिना किसी व्यवधान के पहुंच सके।