झारखंड के आदिवासी बच्चों की शिक्षा को हुआ बड़ा नुकसान

झारखंड के आदिवासी इलाकों में दो साल बाद स्कूल तो खुल गए हैं, लेकिन बच्चों ने पहले जो सीखा था, वो भी भूल गए हैं

By Md. Asghar khan

On: Friday 22 April 2022
 
खूंटी ब्लॉक के टकरा गांव स्थित संत पॉल उच्च प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाई करने पहुंचे बच्चे। फोटो: असगर खान
खूंटी ब्लॉक के टकरा गांव स्थित संत पॉल उच्च प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाई करने पहुंचे बच्चे। फोटो: असगर खान खूंटी ब्लॉक के टकरा गांव स्थित संत पॉल उच्च प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाई करने पहुंचे बच्चे। फोटो: असगर खान

झारखंड के खूंटी जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर की दूरी पर मरांग गोमके (अगुआई करने वाले नेता) जयपाल सिंह मुंडा का गांव है, टकरा। यहीं के संत पॉल उच्च प्राथमिक विद्यालय से उन्होंने प्राइमरी शिक्षा पूरी की थी और बाद में विदेश जाकर उच्च शिक्षा हासिल की। 

लेकिन अब इस गांव से निकल कर क्या कोई पढ़ाई के लिए विदेश तक जा पाएगा? दो साल के लॉकडाउन के दौरान ग्रामीण झारखंड की चरमराई शिक्षा व्यवस्था को देखकर तो ऐसी कोई भी उम्मीद की किरण दूर दूर तक दिखाई नहीं देती है।

दो साल तक बंद के होने के बाद यह स्कूल पूर्ण रूप से खुल चुका है। पांचवीं में पढ़ रहे जिदन मुंडू और तीसरी में पढ़ रही सुनीला नाग इसी स्कूल में पढ़ाई करते हैं। वे कहते हैं, “पिछली कक्षा की पढ़ाई में कुछ भी याद नहीं है। सब कुछ भूल गए हैं कि क्योंकि लॉकडाउन था। एक भी दिन पढ़ाई नहीं की। क्यों उनके परिवार के पास मोबाइल नहीं था।”

स्कूल के प्रभारी शिक्षक महानंद जुनूल कच्छप बताते हैं कि लॉकडाउन से पढाई को बहुत नुकसान हुआ है। मेरे स्कूल में तो ऐसे चार-पांच ही बच्चे थे, जिन्होंने थोड़ी बहुत पढ़ाई की।

स्कूल में 84 बच्चों पर तीन शिक्षक हैं। शिक्षक की माने तो लॉकडाउन ने बच्चों की पढ़ाई को पूरी तरह से चौपट कर दिया।

टकरा, खूंटी ब्लॉक के मुरही पंचायत में पड़ता है। इस पंचायत में 18 गांव है जिसकी 12-15 हजार आबादी है, लेकिन एक भी हाई स्कूल नहीं है। 

महानंद जुनूल कच्छप कहते हैं, “दो साल में बच्चे अपना नाम, पता तक लिखना भूल गए हैं। दो साल में पूर्व वे अपना नाम, पता लिख लेते थे। हमलोग इन्हें फिर से नाम लिखना सिखा रहे हैं।”

राजधानी रांची से 30 किलोमीटर की दूरी पर नामकुम ब्लॉक के हुरबा पंचायत में डुण्डीगड़ा गांव स्थित राजकीय उच्च विद्यालय है। रजत मुंडा दसवीं, सोनी कुमारी सातवीं, कोमल कुमारी पांचवी, अनुष्का कुमारी तीसरी कक्षा की छात्र हैं। वे कहते हैं- लॉकडाउन में हम लोग पढ़ाई नहीं कर पाएं, क्योंकि परिवार के पास मोबाइल नहीं था। 

डुण्डीगड़ा स्कूल में 758 छात्र हैं और 15 शिक्षक। स्कूल के सहायक शिक्षक शैलेंद्र कुमार कहते हैं कि दो साल स्कूल बंद रहने के कारण जो बच्चे तीसरी से जो पांचवीं में गए हैं उनको काफी परेशानी हो रही है। छठी कक्षा में गए बच्चों को सरल जोड़ घटाव भी नहीं आ रहा है, अब उसको छठी क्लास में जोड़ घटाव तो पढ़ाना है नहीं। 

ऐसे छात्र-छत्राएं राजधानी रांची के ही आस-पड़ोस के सराकरी स्कूलों में बहुतरे मिल जाएंगे। दीप शिखा तिर्की का नाम भी उन्हीं शामिल हैं. जब पहला लॉकडाउन लगा तो दीपशिखा आठवीं में थी। फिर बिना परीक्षा के प्रोमेट होकर नौवीं और दसवी में आ गई, लेकिन अब कुछ समझ नहीं आ रहा है।

राजधानी से महज 15 किलोमीटर की दूरी पर टाटीसिलवे में स्थित जय प्रभा कमला नेहरू बालिका उच्च विधालय स्कूल हैं जहां दीपशिखा जैसी और भी कई छात्राएं दसवीं की ही सोनाली कुमारी, सोनी कुमारी, अनुराधा कुमारी, ज्योति कुमारी, अंशु कुमारी, भारती कुमारी का हाल भी लॉकडाउन में कमोबेश दिपीशिखा जैसा ही रहा। किसी के घर में मोबाइल नहीं था। तो किन्हीं के अभिवावक मोबाइल लेकर काम चले जाते थे।

इन गांवों में कहीं भी भारत सरकार की ओर से चलाई जा रही ‘भारत नेट प्रोजेक्ट’ के तहत इंटरनेट सेवा की सुविधा नहीं दिखी. एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत सरकार की यह इंटरनेट सेवा झारखंड के 90 प्रतिशत पंचायतों में नहीं पहुंची है।

झारखंड समेत 15 राज्यों को लेकर चिल्ड्रेन ऑनलाइन एंड ऑफलाइन लर्निंग, नामक सर्वे रिपोर्ट मुताबिक 1-8 क्लास के आठ प्रतिशत ही बच्चे तालाबंदी के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई कर पाएं। इसमें एसटी(आदिवासी)-एससी(दलित) सिर्फ 4 प्रतिशत ही नियामित रूप से ऑनलाइन पढ़ाई कर पाए।

रिपोर्ट के मुताबिक 55 प्रतिशत एसटी-एससी बच्चों के पास स्मार्टफोन नहीं हैं. जबकि सर्वे में शामिल 1-5 तक के बच्चों आधे बच्चे तो कुछ ही शब्द पढ़ पाए हैं. एक अन्य रिपोर्ट सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड के ग्रामीण इलाकों में 93.6 प्रतिशत बच्चों के पास अपना मोबाइल नहीं था.

एनुवल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट(असर) 2020 के मुताबिक झारखंड के गांवों में पढ़ने वाले 28.6 प्रतिशत ही बच्चों को स्कूल बंद रहने के कारण ऑनलाइन शैक्षानिक सामग्री मिल पाई।

झारखंड राज्य के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो भी मानते हैं कि लॉकडाउन के समय ग्रामीण इलाकों में शिक्षा काफी प्रभावित हुई है और ऑनलाइन की प्रक्रिया गांव में फेल रही है. उन्होंने डाउन टू अर्थ से कहा, “लॉकडाउन के कारण झारखंड ही नहीं, पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई. सरकार अपने स्तर से शिक्षा व्यवस्था को बेहतर करने का हर संभव प्रयास कर रही है। मैं खुद गांव में स्कलों का भ्रमण कर रहा हूं।”

सरकार के मुताबिक लॉकडाउन में प्रभावित हुए छात्रों की पढ़ाई की भरपाई करने के लिए जून से निदानात्मक कक्षा शुरू करेगी। इसके लिए स्कूलों में विशेष कक्षा के तहत पढ़ाई करायी जाएगी

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