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एवियन बोट्यूलिज्म से ही हुई है सांभर झील में 18 हजार पक्षियों की मौतः रिपोर्ट

भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली की गुरूवार को आई रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई है कि सांभर झील में 18,496 पक्षियों की मौत की वजह एवियन बोट्यूलिज्म ही है

On: Thursday 21 November 2019
 
राजस्थान के सांभर झील में हजारों प्रवासी पक्षियों की मौत हो गई। फोटो: विकास चौधरी
राजस्थान के सांभर झील में हजारों प्रवासी पक्षियों की मौत हो गई। फोटो: विकास चौधरी राजस्थान के सांभर झील में हजारों प्रवासी पक्षियों की मौत हो गई। फोटो: विकास चौधरी

सांभर झील में 18,496 पक्षियों की मौत की वजह एवियन बोट्यूलिज्म ही है। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली की गुरूवार को आई रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई है। हालांकि राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर के विशेषज्ञ डॉ. अनिल कुमार कटारिया नेभी 14 नवंबर को पक्षियों की मौत का कारण बोट्यूलिज्म को ही बताया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिज़्म के कारण एवियन बोट्यूलिज्म बीमारी आधी से ज्यादा झील में फैल गई। सांभर झील में 10 नवंबर को पक्षियों की मरने की सूचना मिलने से लगभग 14 दिन पहले प्रवासी पक्षियों का मरना शुरू हो गया था।

रिपोर्ट कहती है कि पानी में सेलेनिटी यानी खारापन लेवल कम होने, पानी का तापमान 25 डिग्री से ऊपर जाने, हाइड्रोजन की मात्रा 7-9 होने और पानी में घुली ऑक्सीजन की मात्रा 4 होने से क्लोस्ट्रीडियम बोट्यूलिज्म को फैलने में मदद मिली। इतने दिनों तक झील में मृत पक्षी पड़े रहने से उनमें कीड़े पड़ गए और उससे झील का एरिया संक्रमित और जहरीला हो गया। बोट्यूलिज्म से पीड़ित पक्षी करीब दो दिन तक लकवाग्रस्त रहे, उनकी पलकें बंद हो गईं और बाद में उनकी मौत हो गई।

हालांकि भारतीय वन्यजीव संस्थान की रिपोर्ट के मुताबिक झील में सेलेनिटी का स्तर काफी बढ़ा हुआ पाया गया है।

रिपोर्ट कहती है कि, जुलाई और अगस्त महीने में तेज बारिश के कारण झील भर गई. इससे झील ने कई नए मार्शी एरिया बना लिए। तेज बारिश के कारण झील के पानी में सेलेनिटी की कमी आ गई। खारेपन की कमी के कारणबोट्यूलिज्म फैलाने वाले वैक्टिरिया जैसे क्रस्टेशियंस, अकशेरुकी और प्लवक के प्रसार के लिए अनुकूल वातावरण होगया और ये तेजी से झील में फैल गए। नतीजा यह हुआ कि महज कुछ ही दिनों में 18 हजार से ज्यादा पक्षियों की मौत हो गई। गौरतलब है कि इन वैक्टीरिया के शरीर में क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिज़्मपनाह लेता है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि ये बीमारी सिर्फ कीटभक्षी और सर्वाहारी पक्षियों में फैली है। शाकाहारी पक्षी इससे प्रभावित नहीं हुए हैं। 10 नवंबर जो पक्षी मृत पाए गए उनमें कीड़े भी पड़े हुए थे। ये कीड़े केलीफोरा प्रजाति के थर्ड इनस्टार हैं।

भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली से करीब 6 दिन बाद इस रिपोर्ट के अनुसार सभी मृत पक्षियों की लाश सही अवस्था में थीं। मृत पक्षियों की मांसपेशियां, हड्डी और चर्बी सामान्य थी। हालांकि गिजार्ड ने कम खाना खाया था और उसके शरीर में छोटे पत्थर के टुकड़े भी मिले हैं। मोटे तौर पर पक्षियों के आंतरिक अंग सामान्य पाए गए हैं। पक्षियों के मस्तिष्क,हद्रय, गले उनके अंदर पानी के नमूने और आंतों के सैंपल संस्थान की ओर से लिए गए थे।