Sign up for our weekly newsletter

विशेषज्ञों ने सुलझायी प्रकाश संश्लेषण की गुत्थी, कृषि उपज में हो सकती है बढ़ोतरी

वैज्ञानिकों के अनुसार इस खोज की मदद से पौधों में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया को नियंत्रित करके उच्च पैदावार प्राप्त की जा सकती है, जिससे खाद्य सुरक्षा की समस्या हल हो सकती है

By Lalit Maurya

On: Saturday 16 November 2019
 
Photo: Vikas Choudhary
Photo: Vikas Choudhary Photo: Vikas Choudhary

वैज्ञानिकों ने पौधों में मौजूद और प्रकाश संश्लेषण को नियंत्रित करने वाले प्रमुख घटकों में से एक बी6एफ काम्प्लेक्स की संरचना को हल करने में सफलता हासिल की है। इस खोज की मदद से प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया को नियंत्रित करके उच्च पैदावार प्राप्त की जा सकती है, जिससे खाद्य असुरक्षा की समस्या हल हो सकती है। शेफील्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया यह अध्ययन अंतराष्ट्रीय जर्नल नेचर में छपा है । जिसके अनुसार वैज्ञानिकों को पौधे में मौजूद साइटोक्रोम बी6एफ प्रोटीन एंजाइम की संरचना का पता चला है । यह प्रोटीन कॉम्प्लेक्स एंजाइम पौधों के क्लोरोप्लास्टस में मौजूद रहता है और प्रकाश संश्लेषण (फोटोसिंथेसिस) के माध्यम से पौधे की वृद्धि को प्रभावित करता है। प्रकाश संश्लेषण पृथ्वी पर जीवन का आधार है। यह भोजन, ऊर्जा और ऑक्सीजन प्रदान करती है, जो जीवमंडल और मानव सभ्यता को जीवन प्रदान करती है। गौरतलब है कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्रकाश संश्लेषण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा पौधे अपने हरे रंग वाले अंगो जैसे पत्ती, द्वारा सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में वायु से कार्बनडाइऑक्साइड तथा भूमि से जल लेकर जटिल कार्बनिक खाद्य पदार्थों जैसे कार्बोहाइड्रेट्स का निर्माण करते हैं तथा आक्सीजन गैस बाहर निकालते हैं।

 प्रकाश संश्लेषण में क्या है साइटोक्रोम बी6एफ की भूमिका

इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं की टीम ने हाई रिज़ॉल्यूशन वाले संरचनात्मक मॉडल का उपयोग किया है। उन्होंने पाया कि बी6एफ प्रोटीन कॉम्प्लेक्स, प्लांट सेल 'क्लोरोप्लास्ट' में पाए जाने वाले दो प्रकाश संचालित क्लोरोफिल-प्रोटीन (फोटोसिस्टम I और II) के बीच विद्युत संबंध बनाता है जो सूर्य की रोशनी को रासायनिक ऊर्जा में बदल देते हैं। इस अध्ययन की प्रमुख लेखिका और यूनिवर्सिटी ऑफ शेफील्ड के डिपार्टमेंट ऑफ मॉलिक्यूलर बायोलॉजी एंड बायोटेक्नोलॉजी में अध्ययनरत लोर्ना मालोन ने बताया कि "हमारा अध्ययन यह समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है कि कैसे साइटोक्रोम बी6एफ अपने अंदर प्रवाहित होने वाले इलेक्ट्रिक करंट का उपयोग करके 'प्रोटॉन बैटरी' एटीपी को ऊर्जा प्रदान करता है। इस संचित ऊर्जा के माध्यम से पौधे, कार्बन डाइऑक्साइड को कार्बोहाइड्रेट में बदल देते हैं, जोकि उनके विकास और खाद्य श्रृंखला को बनाए रखने के लिए जरुरी होता है। " इस अध्ययन में साइटोक्रोम बी6एफ के बारे में एक महत्वपूर्ण बात पता चली है, यह एंजाइम पौधों को पर्यावरण में आने वाले बदलावों से बचाने में भी अहम भूमिका निभाता है । यह पौधों में एक सेंसर के रूप में कार्य करता है जो सूखे जैसी स्थिति होने पर प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया को नियंत्रित कर सकता है। जिससे पौधे पर पड़ने वाले सूखे के प्रभाव को कम किया जा सके । शेफ़ील्ड विश्वविद्यालय के बायोकैमिस्ट्री विभाग में रीडर डॉ मैट जॉनसन के अनुसार "साइटोक्रोम बी6एफ प्रकाश संश्लेषण का मूल घटक है जो प्रकाश संश्लेषक को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।"

संयुक्त राष्ट संघ के आंकलन के अनुसार 2050 तक वैश्विक आबादी करीब 970 करोड़ हो जाएगी । एक रिपोर्ट के अनुसार आज हमारे पास आज लगभग 700 करोड़ लोगों के लिए पर्याप्त भोजन है, लेकिन इसके बावजूद आज भी लगभग 100 करोड़ लोग या तो भूखे या कुपोषित हैं । और जिसके पीछे की सबसे बड़ी वजह गरीबी और असमान वितरण है। साथ ही जैसा कि अनुमान बताते हैं 2050 तक हमारी आबादी करीब 970 करोड़ हो जाएगी, तो हमें इतनी बड़ी आबादी का पेट भरने के लिए अपनी फसलों का उत्पादन 60 से 100 फीसदी बढ़ाना होगा। प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल अकादमी ऑफ साइंसेज में छपे एक शोध के अनुसार वैश्विक स्तर पर तापमान में जिस तरह वृद्धि हो रही है उसके चलते प्रत्येक डिग्री सेल्सियस की वृद्धि के कारण गेहूं की उपज में 6 फीसदी, चावल में 3.2, मक्का में 7.4 और सोयाबीन की उपज में 3.1 फीसदी की गिरावट आ जाएगी । जिससे कृषि क्षेत्र पर दबाव और बढ़ता जायेगा |

वैज्ञानिकों के अनुसार इस अध्ययन से हमें जो महत्वपूर्ण जानकारी मिली है उसकी सहायता से हम प्रकाश संश्लेषण को नियंत्रित करके उच्च पैदावार प्राप्त कर सकते हैं । जिसकी सहायता से भविष्य में बढ़ती हुई आबादी की खाद्य सम्बन्धी जरूरतों को पूरा किया जा सकता है।