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पर्यावरण मुकदमों की डायरी: महुल और अंबापाड़ा में वीओसी के आकलन पर एनजीटी ने मांगी रिपोर्ट

यहां पढ़िए पर्यावरण सम्बन्धी मामलों के विषय में अदालती आदेशों का सार

By Susan Chacko, Lalit Maurya

On: Wednesday 01 July 2020
 
Photo: Getty Images

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 30 जून, 2020 को एक आदेश जारी कर महुल और अंबापाड़ा में हो रहे वायु प्रदूषण पर सीपीसीबी से रिपोर्ट तलब की है| अपने इस आदेश में एनजीटी ने सीपीसीबी से पूछा है कि वो महाराष्ट्र के महुल और अंबापाड़ा वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (वीओसी) की मात्रा का आंकलन किस तरह कर रहे हैं| यह मामला मुंबई के बाहरी इलाकों में अंबापाड़ा और माहुल के आसपास हो रहे प्रदूषण और उसके नियंत्रण के लिए उठाए जा रहे क़दमों से जुड़ा है|

गौरतलब है कि इस क्षेत्र में वायु प्रदूषण के लिए मुख्य रूप से लॉजिस्टिक सर्विसेज, तेल, गैस और रासायनिक वस्तुओं के भंडारण के साथ-साथ तेल कंपनियों द्वारा किया जा रहा उत्सर्जन जिम्मेवार है| इस इलाके में खतरनाक रसायनों की लोडिंग, भंडारण और अनलोडिंग के कारण वीओसी के साथ-साथ अन्य प्रदूषकों का उत्सर्जन हो रहा है।

इस मामले में इससे पहले सीपीसीबी ने 18 मार्च, 2020 को एक रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। जिसमें प्रदूषण के कारण पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान का मूल्यांकन किया गया था। साथ ही इसमें उस अनुपात के बारे में भी लिखा था जिस हिसाब से प्रदूषण फैला रही इकाइयों से जुर्माना वसूलना है। इस मामले में आवेदकों ने 1.5 करोड़ रूपए का हर्जाना मांगा था|

इस रिपोर्ट पर भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और एजिस लॉजिस्टिक्स लिमिटेड ने कड़ी आपत्ति जताई थी । उनके अनुसार सीपीसीबी ने रिपोर्ट में जो उत्सर्जित वीओसी की मात्रा दिखाई है, वो सही नहीं है। साथ ही उन्होंने इस बात की मांग की थी कि सीपीसीबी ने किस तरह वीओसी की मात्रा का आकलन किया है उसके आधार का खुलासा करे।


अब कुडलू चिक्काकेरे झील में नहीं डाला जा रहा कचरा: केएसपीसीबी रिपोर्ट

कर्नाटक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (केएसपीसीबी) ने कुडलू चिक्काकेरे झील पर अपनी निरीक्षण रिपोर्ट एनजीटी के समक्ष प्रस्तुत कर दी है। इस रिपोर्ट के अनुसार अब कुडलू चिक्काकेरे झील में कचरा नहीं डाला जा रहा है। यह झील बैंगलोर के अनेकल तालुका के कुडलू में स्थित है।

केएसपीसीबी ने एनजीटी को जानकारी दी है कि इस मामले में ब्रुहत बेंगलुरु महानगरपालिक (बीबीएमपी) को निर्देश दिए गए थे कि वो कुडलू चिक्काकेरे झील के बफर क्षेत्र में हो रहे अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई करे। इसके साथ ही झील में सीवेज के प्रवेश को रोकने के लिए सभी प्रमुख स्थानों पर बेरिकेड लगाने के निर्देश दिए गए थे। केएसपीसीबी द्वारा जब इस झील का निरीक्षण किया गया तो समय यह पानी से भरी पाई गई थी। इस झील का रखरखाव बीबीएमपी के लेक डिवीजन द्वारा किया जा रहा है। इससे पहले 4 फरवरी, 2020 को किये गए निरिक्षण में भी झील के पानी में वृद्धि देखी गई थी।

रिपोर्ट के अनुसार बीबीएमपी के तीन स्थानों पर रोक लगाकर सीवेज को झील के पानी में जाने से रोक दिया है। लेकिन एक स्थान पर इस अवरोध को नुकसान हुआ है। जिस वजह से थोड़ी मात्रा में सीवेज झील में जा रहा है। साथ ही रिपोर्ट में यह भी जानकारी दी है कि झील की ओर जा रहे सीवेज को रोककर अब नवनिर्मित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में भेज दिया है। इस प्लांट को झील के किनारे ही बनाया गया है। जिसकी क्षमता 500 केएलडी की है।

निरिक्षण के समय यह प्लांट पूरी तरह से काम कर रहा था। और इसके द्वारा उपचारित सीवेज को झील में डाला जा रहा था। साथ ही रिपोर्ट में इस बात की भी जानकारी दी गई है कि अब इस झील में कचरा नहीं डाला जा रहा। और नगर निगम ने कुडलू चिक्काकेरे झील के बफर क्षेत्र में अवैध तरीके से किये जा रहे निर्माण और परियोजनाओं की पहचान कर ली है।


पर्यावरण के अनुकूल हैं धामपुर चीनी मिलें: एसपीसीबी रिपोर्ट

सीपीसीबी ने मुरादाबाद, बिजनौर और बरेली में चल रही धामपुर शुगर मिल्स और उनसे हो रहे प्रदूषण के मामले में एनजीटी को रिपोर्ट दे दी है। इस रिपोर्ट के अनुसार धामपुर शुगर मिल्स की चारों यूनिट पर्यावरण के अनुकूल हैं। गौरतलब है कि यह रिपोर्ट सीपीसीबी के निर्देश पर उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) द्वारा तैयार की गई है।

यूपीपीसीबी ने समय-समय पर इन सभी इकाइयों का निरीक्षण किया है| जिसमें यह सामने आया है कि इन सभी इकाइयों ने संयुक्त समिति द्वारा जारी सिफारिशों का ठीक से पालन किया है|  गौरतलब है कि एनजीटी के आदेश पर एक संयुक्त जांच समिति गठित की गई थी| साथ ही शुगर मिलों ने उन पर लगाए गए पर्यावरणीय मुआवजे को भी जमा कर दिया है।