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क्या इलेक्ट्रिक व्हीकल का लक्ष्य हासिल करने में कामयाब रहेगा बजट?

फेम के दूसरे चरण में 3 साल में 10 हजार करोड़ खर्च करने की योजना है तो क्या पहले साल में 500 करोड़ का प्रावधान काफी है

By Raju Sajwan

On: Saturday 30 November 2019
 
Photo: Creative commons

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट 2019-20 में उम्मीद के मुताबिक  बिजली से चलने वाले वाहनों (इलेक्ट्रिक व्हीकल) को बढ़ावा देने के लिए कई घोषणाएं की हैं। इसमें एक अहम घोषणा है कि अगर आप इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीदने के लिए लोन लेते हैं तो आप को लोन पर दिए जाने वाले ब्याज में 1.5 लाख रुपए तक की आयकर छूट मिलेगी। इसके अलावा वित्त मंत्री ने घोषणा की कि सरकार ने भारत को इलेक्ट्रिक वाहनों का मेन्युफेक्चरिंग हब बनाने का लक्ष्य रखा है।

बजट डॉक्यूमेंट के मुताबिक फास्टर एडोप्शन एंड मेन्युफेक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल (फेम) योजना के दूसरे चरण के लिए साल 2019-20 का बजट केवल 500 करोड़ रुपए का रखा गया है। हालांकि फरवरी 2019 में मंत्रिमंडल की बैठक में फेम योजना के दूसरे चरण के लिए तीन साल में 10 हजार करोड़ के खर्च को मंजूरी दी गई थी।

चालू वित्त वर्ष में सरकार ने बजट में 1650 इलेक्ट्रिक बसों को इंसेंटिव देने के अलावा 1650 चार पहिया वाहन, 16500 ई रिक्शा, 33000 दोपहिया वाहन को इंसेंटिव दिया जाएगा।  मंत्रालय ने इंसेंटिव के लिए 271.26 करोड़ रुपए का बजट का प्रस्ताव रखा है। जबकि फेम-2 के तहत 7000 बस, 55000 चारपहिया, जबकि 5 लाख तिपहिया और 10 लाख दोपहिया वाहनों का लक्ष्य रखा गया है। 

इसी तरह चालू वित्त वर्ष में 330 चार्जिंग स्टेशन लगाने का प्रस्ताव है, ये चार्जिंग स्टेशन 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के अलावा स्मार्ट सिटी में लगाए जाएंगे, जबकि 66 चार्जिंग स्टेशन राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगेंगे।  इसके अलावा जागरूकता कार्यक्रम चलाने का भी प्रस्ताव है। हालांकि फेम-2 के तहत देश भर में तीन साल में 2700 चार्जिंग स्टेशन बनाने का प्रस्ताव था। इनमें छोटे शहरों और पर्वतीय राज्यों के शहर भी शामिल थे, लेकिन चालू बजट में छोटे शहरों व पर्वतीय शहरों का शामिल नहीं किया गया है।   

पेट्रोल डीजल की गाड़ियों से बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार ने बिजली से चलने वाले वाहनों को प्रोत्साहित करने की घोषणा की थी। इसके तहत फेम का पहला चरण चलाया गया था, जिसके परिणाम उत्साहजनक नहीं रहे, इसके बाद फेम दो की शुरुआत की गई है।

अपने बजट भाषण में सीतारमण ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से फेम योजना के दूसरे चरण में आधुनिक बैटरी और पंजीकृत ई-वाहन की खरीद के लिए छूट दी जाएगी। फेम योजना का दूसरा चरण 1 अप्रैल, 2019 से प्रारंभ हो गया है। इस योजना के तहत तीन वर्षों के लिए 10,000 करोड़ रुपये की धनराशि निर्धारित की गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने को प्रोत्साहन देना है। इसके लिए इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद तथा इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने की अवसंरचना स्थापित करने के लिए रियायत दी जाएगी, लेकिन सीतारमण ने स्पष्ट किया कि केवल आधुनिक बैटरियों और पंजीकृत ई-वाहनों को ही रियायत दी जाएगी। इस योजना का लक्ष्य लोगों को किफायती और पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन का विकल्प प्रदान करना है।

वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों पर लगने वाले जीएसटी की दर को 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव दिया है। इन वाहनों को किफायती बनाने के लिए सरकार, इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद के लिए प्राप्त ऋण की ब्याज अदायगी में 1.5 लाख रुपये की अतिरिक्त आयकर छूट देगी। सरकार का दावा है कि करदाताओं को इलेक्ट्रिक वाहन की खरीद पर लगभग 2.5 लाख रुपये का लाभ मिलेगा। साथ ही, इलेक्ट्रिक वाहनों के कुछ कलपुर्जों पर सीमा शुल्क से मुक्त रखे जाने का प्रस्ताव है। इस मामले में नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने ट्विट करते हुए कहा कि यह सही समय पर उठाया गया कदम है, क्योंकि नीति आयोग की हाल ही एक रिपोर्ट बताती है कि साल 2030 तक देश में 6,89,13,000 दोपहिया व तिपहिया इलेक्ट्रिक व्हीकल बिक चुके होंगे। ऐसे में जो लोग लोन लेकर इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीदेंगे, उन्हें आयकर में छूट मिलने से राहत मिलेगी।

अभी 0.6 फीसदी है मार्केट शेयर

बजट से एक दिन पहले पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि भारत में अभी जितने वाहन बिक रहे हैं, उनमें इलेक्ट्रिक व्हीकल की हिस्सेदारी 0.52 फीसदी है, जबकि नार्वे जैसे देश में इलेक्ट्रिक व्हीकल की हिस्सेदारी 39 फीसदी है और चीन में 2 फीसदी।