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दिल्ली में अवैध रूप से चल रहे 30,000 उद्योग बंद करने होंगे: रिपोर्ट

यहां पढ़िए पर्यावरण सम्बन्धी मामलों के विषय में अदालती आदेशों का सार

By Susan Chacko, Lalit Maurya

On: Tuesday 14 July 2020
 
Photo: Getty Images

दिल्ली के नगर निगमों को चाहिए कि वो आवासीय और गैर औद्योगिक क्षेत्रों में उद्योगों को लाइसेंस / एनओसी प्रदान करने से पहले दिल्ली के मास्टर प्लान 2021 में दिए प्रावधानों का पालन करे। यह जानकारी दिल्ली सरकार द्वारा एनजीटी के सामने प्रस्तुत रिपोर्ट में सामने आई है। यह रिपोर्ट दिल्ली के आवासीय और गैर औद्योगिक क्षेत्रों चल रहे उद्योगों के मामले में प्रस्तुत की है|

रिपोर्ट के अनुसार आवासीय और गैर औद्योगिक क्षेत्रों में चल रही 21,960 इकाइयों को बंद कर दिया गया है| जबकि अभी भी करीब 30,000 ऐसी इकाइयां हैं, जो अवैध तरीके से चल रही हैं और जिन्हें बंद करना जरुरी है। दिल्ली के इंडस्ट्रीज कमिश्नर ने बताया है कि 2021 के मास्टर प्लान के अंतर्गत 33 औद्योगिक क्षेत्रों और 23 औद्योगिक क्लस्टर को अनुमति दी गई है| जिनका पुनः विकास किया जाना है| इन क्षेत्रों में केवल उन उद्योगों को छोड़कर जिन्हें निषिद्ध किया गया है और जो हानिकारक हैं, सभी को चलाने की अनुमति है।  

इसके अलावा नए मास्टर प्लान में घरेलू उद्योगों को आवासीय और गैर औद्योगिक क्षेत्रों और गावों में भी चलाने की अनुमति दी गई है। बशर्ते वो श्रेणी 'ए' में आते हों। लेकिन इन इकाइयों को पहले दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति से सहमति लेनी होगी। साथ ही यह भी तय किया गया है कि बिजली वितरण कंपनियां और दिल्ली जल बोर्ड 11 किलोवाट से अधिक के कनेक्शन वाली घरेलू इकाइयों की आपूर्ति को बंद कर देंगे।

 रिपोर्ट के अनुसार नगर निगमों को अब तक लाइसेंस के लिए 2104 आवेदन प्राप्त हुए हैं जोकि नगर निगमों के फैक्ट्री लाइसेंसिंग विभाग के पास लंबित है। साथ ही सरकार ने अवैध इकाइयों से मुआवजा वसूलने के लिए और अधिक समय देने का अनुरोध कोर्ट से किया है।


डेंगरा गांव में बंद हो चुका है अवैध रेत खनन: रिपोर्ट

मध्य प्रदेश के जिला दतिया के ग्राम डेंगरा में पनडुब्बियों की मदद से जो अवैध रेत खनन किया जा रहा था, उसपर रोक लगा दी गई है। यह जानकारी दतिया के जिला मजिस्ट्रेट द्वारा दायर रिपोर्ट से पता चली है। गौरतलब है कि डेंगरा गांव के निवासियों ने अवैध रेत खनन की शिकायत करते हुए एनजीटी में एक आवेदन दायर किया था। जिसके अनुसार इस अवैध खनन से जलीय जीवन और पर्यावरण पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

इस मामले में दतिया के जिला मजिस्ट्रेट और मध्य प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जांच की गई थी। जिसमें यह पाया गया था कि डांगरा के सरपंच और पंचायत सचिव पनडुब्बियों की मदद से अवैध खनन कर रहे थे। इस मामले में उन्हें  29 जून, 2019 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।

दतिया के जिला मजिस्ट्रेट ने 20 अगस्त, 2019 को तत्काल प्रभाव से खनन पट्टे को रद्द कर दिया था। साथ ही रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि खनन विभाग इस क्षेत्र की निगरानी कर रहा है और अब तक किसी भी अवैध खनन की जानकारी नहीं मिली है। और यदि इस तरह के किसी भी मामले की सूचना मिलती है, तो उसपर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।


पर्यावरण मानकों के अनुरूप ही काम कर रहें हैं पानीपत में नेशनल वोलेंस

हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) द्वारा दायर एक कार्रवाई रिपोर्ट में एनजीटी को जानकारी दी है कि प्लॉट नंबर 302, सेक्टर 29, भाग -2, पानीपत में चल रही कंपनी नेशनल वोलेन एंड फिनिशर्स, पर्यावरण नियमों का पालन कर रही है। यह मामला यूनिट द्वारा अवैध रूप से भूजल के दोहन और नालियों में रंगों और रसायनों के साथ प्रदूषित पानी को फेंके जाने का था। जिसकी जांच के लिए हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया गया था। साथ ही एचएसपीसीबी को इसपर रिपोर्ट भी प्रस्तुत करनी थी।

13 फरवरी 2020 को इस यूनिट का निरीक्षण किया गया। जिसमें पाया गया था कि नेशनल वोलेंस को स्थापित और संचालित करने के लिए अनुमति प्राप्त थी। इसके साथ ही उसने एचएसपीसीबी से हानिकारक और अन्य अपशिष्ट (प्रबंधन और पारगमन) नियम, 2016 के तहत प्राधिकरण भी प्राप्त था। इस इकाई ने पर्याप्त उपचार क्षमता वाले एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट की भी स्थापना की हुई है। साथ ही यह हरियाणा शहरी  विकास प्राधिकरण द्वारा अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्र में भी स्थित है। इसमें कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट की भी फैसिलिटी है।

निरीक्षण दल ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि इकाई ने अपने परिसर में हानिकारक अपशिष्ट भंडारण के लिए पर्याप्त जगह दी हुई है। उन्होंने बॉयलर और थर्मिक फ्लूइड हीटर से होने वाले उत्सर्जन का नमूना भी लिया था, जिसे पंचकुला में एचएसपीसीबी की प्रयोगशाला में जांचा गया था। जिसकी रिपोर्ट के अनुसार यूनिट द्वारा किया जा रहा उत्सर्जन मापदंडों और लागू मानकों की तय सीमा में ही था।


चैलिया नाले पर अतिक्रमण के लिए ग्रासिम इंडस्ट्रीज पर लगा 40,20,000 रुपए का जुर्माना

झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने चैलिया नाले पर हो रहे अतिक्रमण के लिए ग्रासिम इंडस्ट्रीज पर 40,20,000 रुपए का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना 5 दिसंबर, 2019 को एनजीटी द्वारा दिए आदेश पर लगाया गया है।

इस मुआवजे की गणना केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा विकसित पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के आकलन की पद्धति के अनुसार की गई थी। जोकि  प्रदूषण सूचकांक, दिनों की संख्या के संदर्भ में उल्लंघन की अवधि, सूक्ष्म/ लघु / मध्यम / बड़े उद्योग के मामले में संचालन के पैमाने पर आधारित थी। इसके साथ ही इसमें इस बात का भी ध्यान रखा गया है कि यह मामला कितनी बड़ी आबादी से कितनी दूरी पर है।  जिससे उसपर पड़ने वाले प्रभावों का भी आंकलन किया जा सके।